उन्नाव। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने गोष्ठी आयोजित की। इसमें पर्यावरण अधिनियमों में हुए संशोधनों की जानकारी दी गई। अनापत्ति प्रमाणपत्र और जल एवं वायु शुल्क में बदलावों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसमें बताया गया कि पर्यावरणीय अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) शुल्क में ढाई गुना तक इजाफा हुआ है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शशि बिंदकर ने उद्यमियों को बताया कि उद्योगों को चार अलग-अलग श्रेणियों में अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है। रेड श्रेणी के लिए यह अवधि पांच वर्ष निर्धारित है। ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को 10 वर्ष के लिए अनापत्ति मिलती है। व्हाइट और ग्रीन श्रेणियों के लिए पंद्रह वर्ष की अवधि तय की गई है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई उद्यमी इस अवधि में नया उत्पाद जोड़ता है तो उसे ऑनलाइन मंच पर इसकी जानकारी अपडेट करना अनिवार्य है।
सहायक पर्यावरण अधिकारी उपेंद्र सिंह ने बताया कि अनापत्ति प्रमाणपत्र शुल्क में वृद्धि की गई है। यह वृद्धि श्रेणीवार लगभग ढाई गुना तक है। निर्धारित शुल्क जमा करके उद्यमी ऑनलाइन आवेदन से अनापत्ति प्राप्त कर सकते हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण कुमार माहेश्वरी और जीएन मिश्र ने उद्योगों की व्यावहारिक कठिनाइयों को साझा किया। उद्यमियों ने प्रदूषण की रोकथाम और पर्यावरण संरक्षण के दिशा-निर्देशों का पालन करने का आश्वासन दिया।मोहन बंसल, राकेश जैन, कांति मोहन गुप्ता, अभिषेक मेहरोत्रा, आनंद जैन, उदयराज यादव, बृजकिशोर यादव, आरके शर्मा, हसीन अहमद, शमीम अख्तर आदि मौजूद रहे।