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Unnao News: 500 लीटर पानी सोख गई गिट्टी-मिट्टी की पिट
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फोटो-48- एक्सप्रेसवे पर किमी संख्या 32.4 सहरावां के पास ड्रेनेज सिस्टम की जांच करते एनएचएआई के
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उन्नाव। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की केंद्रीय कमेटी के वरिष्ठ सदस्य ने शनिवार को एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया। उन्होंने एक्सप्रेसवे के ड्रेनेज सिस्टम (जलनिकासी) और सड़क (बिटुमिन) की जांच की। 500 लीटर पानी सड़क पर पलटवाया तो पूरा पानी मिट्टी-गिट्टी की पिट सोख गई। उन्होंने ड्रेनेज सिस्टम ठीक न होने पर नाराजगी जताई। निगरानी में कमी और कमियों का सुधार न कराने पर एनएचएआई के अफसरों की क्लास ली। निर्माण एजेंसी पीएनसी के जिम्मेदारों से भी नाराजगी जताई।
एनएचएआई की केंद्रीय कमेटी के वरिष्ठ सदस्य (तकनीकी) आलोक दीपांकर ने शनिवार को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया। लखनऊ से आकर एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया। इसके बाद किलोमीटर संख्या 35 पर स्थित कंट्रोलरूम परिसर में पौधरोपण किया। वह किलोमीटर संख्या 32.4 सहरावां गांव के पास पहुंचे और यहां एक्सप्रेसवे के ड्रेनेज सिस्टम (जलनिकासी) की जांचने करने के लिए सोख्ता तकनीक से बनी सड़क पटरी में चार वर्ग फीट का गड्ढा खोदवाकर टैंकर से पानी डलवाया और उसके दूसरी तरफ से सड़क के बाहर निकलने का इंतजार करने लगे। करीब सात मिनट इंतजार के बाद भी पानी बाहर एक्सप्रेसवे से बाहर नहीं निकला तो एक कर्मचारी को वहीं रोक कर पानी बाहर निकलने का समय नोट करने के लिए कहा।
इसके बाद किलोमीटर संख्या 30.6 बेगमखेड़ा गांव के पास सड़क को खोदकर कराई जा रही मरम्मत के काम को देखा। मरम्मत की गुणवत्ता परखने के लिए जेसीबी से एक फीट का गड्ढा खोदवाया। और डामर-गिट्टी (बिटुमिन) की मोटाई, नीचे डाले गए बोल्डर और कंक्रीट की मोटाई को भी जांचा। इसके बाद वह फिर उस स्थान पर पहुंचे जहां पर गड्ढे में पानी भरवाया था। पानी सड़क से बाहर न होने पर 500 लीटर के टैंकर का पूरा पानी सड़क पर गिरवाया। काफी मात्रा में पानी सड़क में रुक गया। ड्रेनेज सिस्टम और ढाल ठीक न मिलने पर एनएचएआई के अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने साफ कहा कि बहुत ही लापरवाही बरती गई है। निर्माण एजेंसी के काम की गहनता से निगरानी और कमियों पर ध्यान देकर उसे दुरुस्त कराया जाता तो ये स्थिति न होती।
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इसके बाद उन्होंने एनएचएआई और पीएनसी के अधिकारियों के साथ बैठक की। निरीक्षण और बैठक के दौरान, एक्सप्रेसवे की जांच के लिए अधिकृत किए गए आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर कुमार सुधार रेड्डी, एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल, पीडी नवरतन और पीएनसी के अधिकारी शामिल रहे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में उन्होंने 45 किलोमीटर लंबे ग्रीन फील्ड एरिया में बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता बताई। उन्होंने आने वाले दिनों में आईआईटी प्रोफेसर व उनकी टीम की ओर से की जा रही तकनीकी जांच की रिपोर्ट आने पर उसके आधार पर सुधार कराने का निर्देश दिया।
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एनएचएआई की केंद्रीय कमेटी के वरिष्ठ सदस्य (तकनीकी) आलोक दीपांकर ने शनिवार को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया। लखनऊ से आकर एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया। इसके बाद किलोमीटर संख्या 35 पर स्थित कंट्रोलरूम परिसर में पौधरोपण किया। वह किलोमीटर संख्या 32.4 सहरावां गांव के पास पहुंचे और यहां एक्सप्रेसवे के ड्रेनेज सिस्टम (जलनिकासी) की जांचने करने के लिए सोख्ता तकनीक से बनी सड़क पटरी में चार वर्ग फीट का गड्ढा खोदवाकर टैंकर से पानी डलवाया और उसके दूसरी तरफ से सड़क के बाहर निकलने का इंतजार करने लगे। करीब सात मिनट इंतजार के बाद भी पानी बाहर एक्सप्रेसवे से बाहर नहीं निकला तो एक कर्मचारी को वहीं रोक कर पानी बाहर निकलने का समय नोट करने के लिए कहा।
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इसके बाद किलोमीटर संख्या 30.6 बेगमखेड़ा गांव के पास सड़क को खोदकर कराई जा रही मरम्मत के काम को देखा। मरम्मत की गुणवत्ता परखने के लिए जेसीबी से एक फीट का गड्ढा खोदवाया। और डामर-गिट्टी (बिटुमिन) की मोटाई, नीचे डाले गए बोल्डर और कंक्रीट की मोटाई को भी जांचा। इसके बाद वह फिर उस स्थान पर पहुंचे जहां पर गड्ढे में पानी भरवाया था। पानी सड़क से बाहर न होने पर 500 लीटर के टैंकर का पूरा पानी सड़क पर गिरवाया। काफी मात्रा में पानी सड़क में रुक गया। ड्रेनेज सिस्टम और ढाल ठीक न मिलने पर एनएचएआई के अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने साफ कहा कि बहुत ही लापरवाही बरती गई है। निर्माण एजेंसी के काम की गहनता से निगरानी और कमियों पर ध्यान देकर उसे दुरुस्त कराया जाता तो ये स्थिति न होती।
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इसके बाद उन्होंने एनएचएआई और पीएनसी के अधिकारियों के साथ बैठक की। निरीक्षण और बैठक के दौरान, एक्सप्रेसवे की जांच के लिए अधिकृत किए गए आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर कुमार सुधार रेड्डी, एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल, पीडी नवरतन और पीएनसी के अधिकारी शामिल रहे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में उन्होंने 45 किलोमीटर लंबे ग्रीन फील्ड एरिया में बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता बताई। उन्होंने आने वाले दिनों में आईआईटी प्रोफेसर व उनकी टीम की ओर से की जा रही तकनीकी जांच की रिपोर्ट आने पर उसके आधार पर सुधार कराने का निर्देश दिया।