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Unnao News: 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट की मांग
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फोटो-33-डीएम को ज्ञापन देने जाते शिक्षक संघ के पदाधिकारी। स्रोत: संगठन
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उन्नाव। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की जनपद इकाई ने 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त रखने की मांग की है। बृहस्पतिवार को सैकड़ों शिक्षकों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा।
शिक्षक निराला पार्क के पास एकत्रित हुए और नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। जिलाध्यक्ष भरत चित्रांशी ने बताया कि ज्ञापन में 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग प्रमुख है। कहा कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने टीईटी को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया था। इससे पहले देश के विभिन्न राज्यों में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां तत्कालीन नियमों के अनुसार हुई थीं। सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मई 2026 को पुनर्विचार याचिकाओं का निस्तारण करते हुए पूर्व निर्णय को यथावत रखा है। चित्रांशी ने कहा कि बाद में निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्यायोचित नहीं है।
विकासखंड सुमेरपुर के कार्यकारी अध्यक्ष अभिलाष त्रिपाठी ने कहा कि लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों का भविष्य अनिश्चितता में है। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और शिक्षकों के मनोबल दोनों को प्रभावित करेगी। ज्ञापन देने वालों में अंबिका चौरसिया, धर्मेश श्रीवास्तव, गणेश शंकर गुप्ता उपाध्यक्ष, अजय प्रताप सिंह, शिव शंकर और विनय त्रिपाठी शामिल रहे।
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शिक्षक निराला पार्क के पास एकत्रित हुए और नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। जिलाध्यक्ष भरत चित्रांशी ने बताया कि ज्ञापन में 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग प्रमुख है। कहा कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने टीईटी को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया था। इससे पहले देश के विभिन्न राज्यों में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां तत्कालीन नियमों के अनुसार हुई थीं। सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मई 2026 को पुनर्विचार याचिकाओं का निस्तारण करते हुए पूर्व निर्णय को यथावत रखा है। चित्रांशी ने कहा कि बाद में निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्यायोचित नहीं है।
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विकासखंड सुमेरपुर के कार्यकारी अध्यक्ष अभिलाष त्रिपाठी ने कहा कि लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों का भविष्य अनिश्चितता में है। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और शिक्षकों के मनोबल दोनों को प्रभावित करेगी। ज्ञापन देने वालों में अंबिका चौरसिया, धर्मेश श्रीवास्तव, गणेश शंकर गुप्ता उपाध्यक्ष, अजय प्रताप सिंह, शिव शंकर और विनय त्रिपाठी शामिल रहे।
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