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Unnao News: एआई ने खोला निपुण आकलन का खेल, 77 फीसदी स्कूल फेल
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उन्नाव। स्कूलों में चलाए गए निपुण अभियान के आए परिणामों में जिले के सिर्फ 526 स्कूल ही निपुण हो पाए हैं। शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर दिखाने के लिए शिक्षकों के खेल को एआई ने पकड़ लिया। परिणामस्वरूप 77 फीसदी स्कूल निपुण असेसमेंट परीक्षा में फेल हो गए। पता चला कि कक्षा एक व दो के स्थान पर चार और पांच के छात्रों को बैठाकर निपुण परीक्षा करा दी गई थी। पिछले साल 87 फीसदी स्कूल निपुण हुए थे।
निपुण असेसमेंट अभियान में जिले के कुल 2201 स्कूलों को शामिल किया गया था। इन स्कूलों में पढ़ाई कर रहे कक्षा एक और दो के छात्रों का निपुण असेसमेंट होना था। इसके लिए एआरपी, एसआरजी के अलावा शिक्षक भी छात्रों को तैयारी करा रहे थे। डायट स्तर से इस निपुण असेसमेंट को कराया जाना था। इस बार असेसमेंट में एआई का भी विशेष प्रयोग किया गया था।
डायट के प्रशिक्षुओं द्वारा किए गए असेसमेंट में एआई का प्रयोग करते ही उन छात्रों को बाहर कर दिया गया। ये वे छात्र थे जिन्हें असेसमेंट में कक्षा एक और दो का दिखाया गया था लेकिन सही मायने में वे कक्षा चार और पांच के छात्र थे। यदि एआई का प्रयोग नहीं होता तो शिक्षक बड़ी कक्षाओं के बच्चों को शामिल कर अपना परिणाम बेहतर दिखा लेते। इस तकनीक ने शिक्षा की गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कम सफलता दर के अन्य कारण
एआई द्वारा गड़बड़ी पकड़े जाने के अलावा एसआईआर ड्यूटी के चलते भी अभियान पर असर पड़ा। शिक्षकों की अन्य सरकारी कार्यों में ड्यूटी लगी होने से भी परिणाम का प्रतिशत प्रभावित हुआ। इन सभी कारणों से निपुण असेसमेंट का परिणाम प्रतिशत घटकर केवल 23 फीसदी तक पहुंच गया। डायट से निपुण असेसमेंट देख रहे प्रवक्ता अनिल पटेल ने बताया कि एआई ने बड़ी कक्षाओं के बच्चों को पकड़ा। साथ ही, शिक्षकों की अन्य कार्यों में ड्यूटी भी कम प्रतिशत का एक प्रमुख कारण बनी।
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निपुण असेसमेंट अभियान में जिले के कुल 2201 स्कूलों को शामिल किया गया था। इन स्कूलों में पढ़ाई कर रहे कक्षा एक और दो के छात्रों का निपुण असेसमेंट होना था। इसके लिए एआरपी, एसआरजी के अलावा शिक्षक भी छात्रों को तैयारी करा रहे थे। डायट स्तर से इस निपुण असेसमेंट को कराया जाना था। इस बार असेसमेंट में एआई का भी विशेष प्रयोग किया गया था।
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डायट के प्रशिक्षुओं द्वारा किए गए असेसमेंट में एआई का प्रयोग करते ही उन छात्रों को बाहर कर दिया गया। ये वे छात्र थे जिन्हें असेसमेंट में कक्षा एक और दो का दिखाया गया था लेकिन सही मायने में वे कक्षा चार और पांच के छात्र थे। यदि एआई का प्रयोग नहीं होता तो शिक्षक बड़ी कक्षाओं के बच्चों को शामिल कर अपना परिणाम बेहतर दिखा लेते। इस तकनीक ने शिक्षा की गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कम सफलता दर के अन्य कारण
एआई द्वारा गड़बड़ी पकड़े जाने के अलावा एसआईआर ड्यूटी के चलते भी अभियान पर असर पड़ा। शिक्षकों की अन्य सरकारी कार्यों में ड्यूटी लगी होने से भी परिणाम का प्रतिशत प्रभावित हुआ। इन सभी कारणों से निपुण असेसमेंट का परिणाम प्रतिशत घटकर केवल 23 फीसदी तक पहुंच गया। डायट से निपुण असेसमेंट देख रहे प्रवक्ता अनिल पटेल ने बताया कि एआई ने बड़ी कक्षाओं के बच्चों को पकड़ा। साथ ही, शिक्षकों की अन्य कार्यों में ड्यूटी भी कम प्रतिशत का एक प्रमुख कारण बनी।