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Unnao News: न पंजीयन न फायर एनओसी, घरों और बेसमेंट में कोचिंग

Tue, 23 Jun 2026 12:32 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2026 12:32 AM IST
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फोटो-21-पन्नालालपार्क स्थित गली में दो मंजिला इमरात में संचालित कोचिंग। संवाद
उन्नाव। शहर में चल रहीं कोचिंगों में भी लखनऊ की कोचिंग जैसी आग लगने की आशंका है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में मानकों की अनदेखी कर चलने वाली कोचिंगों की भरमार है। ये कोचिंग आवासीय भवनों, दो मंजिला इमारतों और भूगर्भ तल में चल रही हैं। कोचिंग संचालकों ने न तो फायर विभाग से एनओसी ली है और न ही पंजीकरण है। डीआईओएस कार्यालय के अनुसार पूर्व में पंजीकृत 87 कोचिंग में से 86 का पंजीकरण समाप्त हो चुका है। इस सत्र में किसी भी कोचिंग ने नया पंजीकरण नहीं कराया है।
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शहर में पन्नालाल पार्क, आवास-विकास कॉलोनी, इंद्रानगर, पीडीनगर, शिवनगर और हरदोई पुल के नीचे कोचिंग चल रही हैं। घरों और गोदामों में भी कोचिंग सेंटर संचालित हैं। शहर में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 100 से अधिक कोचिंग सेंटर हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में केवल 87 कोचिंग पंजीकृत थीं। इनमें से 86 कोचिंग की तीन साल की पंजीकरण अवधि सितंबर 2025 में ही समाप्त हो गई थी। वर्तमान में मियागंज के अकबरपुर में संचालित केवल एक कोचिंग का ही पंजीकरण वैध है। इन कोचिंगों में कक्षा छह से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक की तैयारी कराई जाती है। घनी बस्तियों जैसे स्टेशन सड़क और पन्नालाल पार्क में कोचिंग संचालित हैं। यहां आग लगने पर दमकल का पहुंचना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में कोई घटना होने पर बड़ी जनहानि हो सकती है।
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पांच मई से तीन जुलाई 2025 तक हुई जांच में 37 अमान्य मिलीं थीं
डीआईओएस सुनील दत्त ने बताया कि बिना पंजीकरण कोचिंग बंद कराने के लिए पांच मई से तीन जुलाई 2025 तक टास्कफोर्स कमेटी गठित कर जिले भर में जांच कराई गई थी। इसमें 37 कोचिंग बिना मान्यता संचालित मिलने पर उन्हें बंद कराया गया था। नोटिस जारी कर सभी को पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए थे। रजिस्ट्रेशन के लिए 11 नई और पत्रावलियां आई थीं। इसमें फायर एनओसी और ट्रेजरी में रुपये जमा कर मिलने वाला चालान न होने से पंजीकरण नहीं किया गया था।
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अग्निशमन अधिकारी राममिलन भारती ने बताया कि अभी तक जिले में किसी भी कोचिंग संचालक ने फायर एनओसी नहीं ली है। यहां कोचिंगों की बहुमंजिला इमरात नहीं हैं, इसलिए डीआईओएस से ही पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

तीन साल के लिए मान्य होता है पंजीकरण, 50 छात्र संख्या पर 10 हजार शुल्क
डीआईओएस के मुताबिक, कोचिंग का पंजीकरण तीन साल के लिए मान्य होता है। 50 छात्र संख्या पर दस हजार रुपये शुल्क जमा होता है। कोचिंग संचालक फार्म भरकर डीआईओएस कार्यालय में जमा करेंगे। वहां से एक कोड दिया जाएगा। उसी कोड नंबर के आधार पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जाकर शुल्क जमा करना होगा। कोचिंग संचालन के लिए भवन होना चाहिए। कोचिंग में अध्ययन सामग्री की व्यवस्था हो। पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित स्टॉफ होना जरूरी है।


17 साल में 87 कोचिंगों का पंजीकरण
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के अभिलेखों में 10 सितंबर 2008 से अक्तूबर 2025 तक 85 कोचिंगों का पंजीकरण हुआ। इसमें तीन साल की अवधि पूरी करने वाले 86 का पंजीकरण समाप्त हो गया, फिर भी संचालित हैं। जांच में 37 और अमान्य मिलीं, 11 नई कोचिंगों के पंजीकरण की पत्रावलियां आईं लेकिन पूरे अभिलेख न होने से पंजीकरण नहीं हो पाया।

फोटो-21-पन्नालालपार्क स्थित गली में दो मंजिला इमरात में संचालित कोचिंग। संवाद

फोटो-21-पन्नालालपार्क स्थित गली में दो मंजिला इमरात में संचालित कोचिंग। संवाद

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