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Unnao News: सर्राफ भाइयों से 37 लाख के जेवर लूटने में दो लुटेरे और हिस्ट्रीशीटर दुकानदार गिरफ्तार
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फोटो-11- लूट का आरोपी रंजीत। संवाद
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औरास (उन्नाव)। सराफा व्यापारी दो भाइयों के साथ 17 दिन पहले हुई 37 लाख की लूट का पुलिस ने खुलासा कर दिया। लूट में शामिल अंतरजनपदीय दो लुटेरों और जेवर खरीदने वाले हिस्ट्रीशीटर दुकानदार को पुलिस ने पकड़ा है। दो लुटेरों की पुलिस को तलाश है। लुटेरों के पास से पुलिस ने आठ किलो चांदी के जेवर और जेवर बिक्री के 4.50 लाख रुपये बरामद किए हैं। एसपी ने लुटेरों को पकड़ने वाली टीम को 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
औरास थानाक्षेत्र के रामपुर खजड़ी गांव निवासी सराफा व्यापारी प्रभात सोनी और भाई अतुल आठ जून को सीसी चौराहा स्थित दुकान से घर जा रहे थे। उस समय तमंचा लगाकर दो बाइक पर सवार चार लुटेरों ने 37 लाख के सोने-चांदी के जेवर लूट लिए थे। एसपी जयप्रकाश ने खुलासा करते हुए बताया कि घटनास्थल से करीब 16 किलोमीटर दूर तक न कोई सीसीटीवी कैमरा मिला और न ही संदिग्ध मोबाइल नंबर ट्रेस हुआ। यक्ष एप का सहारा लिया तो पुलिस को सफलता मिली। अपराधियों की कुंडली खंगाली तो अमेठी जिले के तीन नाम सामने आए जिसमें एक हिस्ट्रीशीटर भी था। ये सभी इसी तरह से लूट की घटना को अंजाम देते थे। पुलिस ने तीनों का ब्योरा निकाला तो पता चला कि ये जेल से बाहर हैं।
पुलिस ने जांच के बाद अमेठी जिले के थाना जामों के पूरे संघई गांव निवासी रंजीत, इसी जिले के थाना जगदीशपुर के पूरे गंगा पांडेय निवासी चंद्रशेखर और चोरी के जेवर आधी कीमत में खरीदने वाले जगदीशपुर थाने के शांति मार्केट निवासी दुकानदार आशीष कुमार उर्फ मुकेश कुमार को उठाया। पूछताछ में रंजीत ने पुलिस को बताया कि वह चंद्रशेखर के साथ दुकानों की रेकी करता था। घटना को अंजाम देने के बाद आशीष को आधी कीमत में जेवर बेचते हैं। आशीष की दुकान जगदीशपुर के शांति बाजार में घर में ही है लेकिन लूट या चोरी का माल बेचने और बंटवारे के लिए लखनऊ के बीआर दुबे कॉलोनी गुलाबी बिल्डिंग में घर किराये पर लिया था।
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पुलिस के मुताबिक आरोपी आशीष ने बताया कि घटना में शामिल दो अन्य लोगों ने उसे माल बेचा था उसका पैसा भी उन्हीं के पास है। जो माल रंजीत और चंद्रशेखर को बेचा था उसका पैसा दे दिया था। एसपी ने बताया कि लुटेरों में रंजीत पर व्यापारी की हत्या कर लूट सहित 20, चंद्रशेखर पर 15 और आशीष पर आठ मुकदमे दर्ज हैं। एसओजी प्रभारी जयप्रकाश यादव, सर्विलांस टीम प्रभारी अतुल कुमार वर्मा और थानाध्यक्ष संजीव कुमार के साथ उनकी टीमें गिरफ्तारी करने में शामिल रहीं।
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एक लुटेरा ई-रिक्शा चालक, दूसरा श्रमिकों का ठेकेदार
औरास। पुलिस के हत्थे चढ़े लुटेरों में चंद्रशेखर लखनऊ में ई-रिक्शा चलाता था। रंजीत निर्माणाधीन इमारतों में श्रमिकों की सप्लाई की ठेकेदारी करता था। दोनों लखनऊ के चिनहट के देवा रोड पर श्रमिकों के साथ रहते थे ताकि किसी को कोई शक न हो। रंजीत ने पुलिस को बताया कि वह पांच महीने से लगातार रेकी कर रहे थे। पूरी लोकेशन मिलने के बाद साथियों को बुलाकर वारदात को अंजाम दिया था। यही नहीं बाइक का नंबर भी बदला था ताकि कोई उन तक पहुंच न सके। पुलिस ने जिस बाइक को बरामद किया घटना के दिन उसका नंबर भी बदला गया था। नंबर प्लेट बदलने के आरोप में भी इन पर पुलिस धारा बढ़ाएगी। (संवाद)
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बिना मोबाइल, बगैर सीसीटीवी कैमरे वाले रास्तों का करते थे प्रयोग
पूछताछ में लुटेरे रंजीत ने बताया कि पुलिस से बचने के लिए वे सभी किसी भी घटना में न तो मोबाइल और न ही सीसीटीवी वाले रास्तों का प्रयोग करते थे। उन्हीं दुकानों को निशाना बनाते थे जिन दुकानों के बाहर यह लिखा रहता था कि यह ज्वैलर्स कहां का रहने वाला है। इससे उस गांव के आने-जाने वाले रास्ते को आसानी से खोज लेते थे। दुकानदार प्रभात सोनी के साथ भी ऐसा ही किया था। पूरी जानकारी के बाद ही वारदात को अंजाम दिया। लूट के बाद शारदा नहर के किनारे रास्ते से महादोई गांव पहुंचे। वहां से पहाड़पुर अटौरा दतली गांव होते हुए मलिहाबाद फिर अपने कमरे पर पहुंच गए थे।
पीड़ित व्यापारी बोला- दो लुटेरों से मिल सकता है बाकी माल
पीड़ित दुकानदार प्रभात सोनी ने वारदात के खुलासे के बाद कहा कि पुलिस ने उन्हें बताया है कि लुटेरों ने आपस में भी कुछ माल बांट लिया था। इसलिए जो पकड़े गए हैं उनसे माल मिल गया है। जो अभी भागे हुए हैं उनकी गिरफ्तारी के बाद अन्य सामान मिलने की संभावना है।
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औरास थानाक्षेत्र के रामपुर खजड़ी गांव निवासी सराफा व्यापारी प्रभात सोनी और भाई अतुल आठ जून को सीसी चौराहा स्थित दुकान से घर जा रहे थे। उस समय तमंचा लगाकर दो बाइक पर सवार चार लुटेरों ने 37 लाख के सोने-चांदी के जेवर लूट लिए थे। एसपी जयप्रकाश ने खुलासा करते हुए बताया कि घटनास्थल से करीब 16 किलोमीटर दूर तक न कोई सीसीटीवी कैमरा मिला और न ही संदिग्ध मोबाइल नंबर ट्रेस हुआ। यक्ष एप का सहारा लिया तो पुलिस को सफलता मिली। अपराधियों की कुंडली खंगाली तो अमेठी जिले के तीन नाम सामने आए जिसमें एक हिस्ट्रीशीटर भी था। ये सभी इसी तरह से लूट की घटना को अंजाम देते थे। पुलिस ने तीनों का ब्योरा निकाला तो पता चला कि ये जेल से बाहर हैं।
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पुलिस ने जांच के बाद अमेठी जिले के थाना जामों के पूरे संघई गांव निवासी रंजीत, इसी जिले के थाना जगदीशपुर के पूरे गंगा पांडेय निवासी चंद्रशेखर और चोरी के जेवर आधी कीमत में खरीदने वाले जगदीशपुर थाने के शांति मार्केट निवासी दुकानदार आशीष कुमार उर्फ मुकेश कुमार को उठाया। पूछताछ में रंजीत ने पुलिस को बताया कि वह चंद्रशेखर के साथ दुकानों की रेकी करता था। घटना को अंजाम देने के बाद आशीष को आधी कीमत में जेवर बेचते हैं। आशीष की दुकान जगदीशपुर के शांति बाजार में घर में ही है लेकिन लूट या चोरी का माल बेचने और बंटवारे के लिए लखनऊ के बीआर दुबे कॉलोनी गुलाबी बिल्डिंग में घर किराये पर लिया था।
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पुलिस के मुताबिक आरोपी आशीष ने बताया कि घटना में शामिल दो अन्य लोगों ने उसे माल बेचा था उसका पैसा भी उन्हीं के पास है। जो माल रंजीत और चंद्रशेखर को बेचा था उसका पैसा दे दिया था। एसपी ने बताया कि लुटेरों में रंजीत पर व्यापारी की हत्या कर लूट सहित 20, चंद्रशेखर पर 15 और आशीष पर आठ मुकदमे दर्ज हैं। एसओजी प्रभारी जयप्रकाश यादव, सर्विलांस टीम प्रभारी अतुल कुमार वर्मा और थानाध्यक्ष संजीव कुमार के साथ उनकी टीमें गिरफ्तारी करने में शामिल रहीं।
एक लुटेरा ई-रिक्शा चालक, दूसरा श्रमिकों का ठेकेदार
औरास। पुलिस के हत्थे चढ़े लुटेरों में चंद्रशेखर लखनऊ में ई-रिक्शा चलाता था। रंजीत निर्माणाधीन इमारतों में श्रमिकों की सप्लाई की ठेकेदारी करता था। दोनों लखनऊ के चिनहट के देवा रोड पर श्रमिकों के साथ रहते थे ताकि किसी को कोई शक न हो। रंजीत ने पुलिस को बताया कि वह पांच महीने से लगातार रेकी कर रहे थे। पूरी लोकेशन मिलने के बाद साथियों को बुलाकर वारदात को अंजाम दिया था। यही नहीं बाइक का नंबर भी बदला था ताकि कोई उन तक पहुंच न सके। पुलिस ने जिस बाइक को बरामद किया घटना के दिन उसका नंबर भी बदला गया था। नंबर प्लेट बदलने के आरोप में भी इन पर पुलिस धारा बढ़ाएगी। (संवाद)
बिना मोबाइल, बगैर सीसीटीवी कैमरे वाले रास्तों का करते थे प्रयोग
पूछताछ में लुटेरे रंजीत ने बताया कि पुलिस से बचने के लिए वे सभी किसी भी घटना में न तो मोबाइल और न ही सीसीटीवी वाले रास्तों का प्रयोग करते थे। उन्हीं दुकानों को निशाना बनाते थे जिन दुकानों के बाहर यह लिखा रहता था कि यह ज्वैलर्स कहां का रहने वाला है। इससे उस गांव के आने-जाने वाले रास्ते को आसानी से खोज लेते थे। दुकानदार प्रभात सोनी के साथ भी ऐसा ही किया था। पूरी जानकारी के बाद ही वारदात को अंजाम दिया। लूट के बाद शारदा नहर के किनारे रास्ते से महादोई गांव पहुंचे। वहां से पहाड़पुर अटौरा दतली गांव होते हुए मलिहाबाद फिर अपने कमरे पर पहुंच गए थे।
पीड़ित व्यापारी बोला- दो लुटेरों से मिल सकता है बाकी माल
पीड़ित दुकानदार प्रभात सोनी ने वारदात के खुलासे के बाद कहा कि पुलिस ने उन्हें बताया है कि लुटेरों ने आपस में भी कुछ माल बांट लिया था। इसलिए जो पकड़े गए हैं उनसे माल मिल गया है। जो अभी भागे हुए हैं उनकी गिरफ्तारी के बाद अन्य सामान मिलने की संभावना है।

फोटो-11- लूट का आरोपी रंजीत। संवाद

फोटो-11- लूट का आरोपी रंजीत। संवाद