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Exclusive: अप्रैल में खुलेगा 16वां फॉरेंसिक सेंटर, मिनटों में सुलझेंगे यूपी-बिहार के क्राइम केस

हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 25 Feb 2026 01:25 PM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी में अप्रैल में 16वां फॉरेंसिक सेंटर खुलेगा। जाल्हूपुर में ट्रांजिट कैंपस और दो साल में राजातालाब में भवन बनकर तैयार होगा। इसके लिए निदेशक डॉ. सतीश कुमार ने मुआयना किया। 

16th Forensic Centre to open in April crime cases in UP and Bihar to be solved in minutes in varanasi
फॉरेंसिक वैज्ञानिक डॉ. सतीश कुमार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बनारस में फॉरेंसिक रिसर्च और शिक्षा का बड़ा केंद्र तैयार हो रहा है। उत्तर भारत के इस पहले केंद्र में यूपी-बिहार के क्राइम केस मिनटों में सुलझेंगे। यहीं पूरे यूपी-बिहार सहित आसपास के राज्यों के कोर्ट ऑर्डर, सरकार, एनआईए, सीबीआई से मिले फॉरेंसिक सैंपल की जांच की जाएगी। इसी साल अप्रैल में जाल्हूपुर स्थित समेकित विद्यालय में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) गुजरात का ट्रांजिट कैंपस खुलेगा। दो साल बाद राजातालाब में 50 एकड़ जमीन पर फॉरेंसिक संस्थान का भवन तैयार हो जाएगा। इसके बाद ट्रांजिट कैंपस वहीं शिफ्ट हो जाएगा। देश का यह 16वां कैंपस होगा।

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जाल्हूपुर में ट्रांजिट कैंपस का मुआयना करने पहुंचे एनएफएसयू वाराणसी के निदेशक बनाए गए वैज्ञानिक डॉ. सतीश कुमार ने अमर उजाला से बातचीत की। उन्होंने बताया कि इस कैंपस के बन जाने से क्राइम के मामलों में फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया और गति दोनों बढ़ेगी। सैंपल दूसरे राज्यों में नहीं भेजने होंगे। साथ ही इस फॉरेंसिक साइंस के तहत बीएचयू के छात्रों को न्यायालय और पुलिसकर्मियों को साक्ष्य जुटाकर लैब तक भेजने की ट्रेनिंग दी जाएगी।

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डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि देश भर में करीब पांच करोड़ फॉरेंसिक केस अलग-अलग कोर्ट में पेंडिंग हैं। स्थिति ये है कि यदि आज से हम लोग केस लेना बंद कर दें तो भी इन्हें सॉल्व करने में 36 साल लग जाएंगे। ऐसे में फॉरेंसिक लैब की जरूरत बड़े स्तर पर है। इसलिए बनारस के बाद बिहार में भी फॉरेंसिक केंद्र खोला जाएगा। यहां पर फॉरेंसिक एजुकेशन के अलावा क्राइम होने के बाद कैसे साक्ष्य जुटाए जाएं, उन्हें कैसे पहचाना जाए और कोर्ट में कैसे रखा जाए इसकी पूरी ट्रेनिंग दी जाएगी।

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डॉ. सतीश कुमार ने कहा कि सैंपल जितना नया होगा रिजल्ट उतना ही बेहतर और जल्दी आएगा। सैंपल खराब और पुराना होने पर जांच की अवधि काफी बढ़ जाती है। बनारस में सेंटर बनने से केस को कम समय में हल किया जा सकता है। वाराणसी की बहुत सारी ऐसी जांचें हैं जिनके सैंपल भेजे जाने के बाद महीनों रिपोर्ट नहीं मिल पातीं। एनएफएसयू और बीएचयू मिलकर रिसर्च करेंगे।

जहर देकर मारा तो 30 मिनट में आएगी रिपोर्ट

जहर देकर मारा तो 30 मिनट में जांच रिपोर्ट। अधिकतम 5 दिन तक लगता है। दुष्कर्म मामलों के फॉरेंसिक टेस्ट में दो दिन में पता लग जाता है। 48 घंटे में पोक्सो के केस सुलझ सकते हैं। गोली मारकर हत्या में फिंगर प्रिंट रिपोर्ट दो दिन में आ सकती है। इसी तरह से फर्जी हस्ताक्षर, साइबर डिजिटल मोबाइल अपराध आदि केस को भी जल्दी से सुलझाकर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
 
कोर्ट के आदेश से विसरा की जांच भी बनारस में
केंद्र बन जाने के विसरा के सैंपल भी बाहर भेजने की जरूरत नहीं होगी। न्यायालय के आदेश पर इसकी यहीं जांच हो सकेगी। फिलहाल इसकी रिपोर्ट आने में 72 घंटे से लेकर सप्ताह भर लग जाते हैं लेकिन स्थानीय केंद्र बनने से सिर्फ 2 से तीन दिन में रिपोर्ट मिल जाएगी। इसे कलेक्ट कर फॉरेंसिक लैब तक भेजना बड़ी जटिल प्रक्रिया है। जितना देर करेंगे रिजल्ट उतना ही खराब होगा।

एनएफएसयू में चल रहे 70 से ज्यादा कोर्स
एनएफएसयू में फॉरेसिंक और इससे जुड़े 70 से ज्यादा कोर्स चल रहे हैं। साइबर साइकोलॉजी, डिजिटल, फॉरेंसिक फार्मेसी, मैनेजमेंट, फ्रॉड इंवेस्टिगेशन केस को हल करने की भी पढ़ाई होती है। पूरे भारत में इसके 15 कैंपस हैं। अफ्रीका के यूगांडा में ओवरसीज कैंपस है। 2009 में बने इस कैंपस को पीएम मोदी ने 2020 में अपग्रेड कर लोकार्पण किया था।
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