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शिव-गौरा विवाह: 108 थालों के चढ़ावे के साथ मां गौरा को लगी अभिमंत्रित हल्दी, महंत आवास में निभाई गई परंपरा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 25 Feb 2026 10:47 AM IST
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सार
Varanasi News: वाराणसी में माता गौरा के गौने की हल्दी की रस्म की परंपरा टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास में सविधि निभाई गई। इस दौरान 108 थालों के चढ़ावे के साथ मां गौरा को अभिमंत्रित हल्दी लगी।
मां गौरा को लगी अभिमंत्रित हल्दी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
काशी में मंगलवार को शिव-गौरा विवाह परंपरा के तहत माता गौरा के गौने की हल्दी की रस्म की परंपरा टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास में सविधि निभाई गई। 108 थालों में भोग के साथ नौ गौरी–नौ दुर्गा के आह्वान मंत्रों से अभिमंत्रित पावन हल्दी जब माता गौरा की चल प्रतिमा पर अर्पित की गई, तब पूरा परिसर हर-हर महादेव और जय गौरा के उद्घोष से गूंज उठा।
माता के शृंगारित छवि के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार देर रात तक लगी रही। 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी पर बाबा की पालकी यात्रा के साथ इस लोकपरंपरा का समापन होगा। गौने की हल्दी की परंपरा के अनुसार सुबह दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में विशेष अनुष्ठान हुआ।
वैदिक ब्राह्मणों ने नौ गौरी और नौ दुर्गा के आह्वान मंत्रों के साथ हल्दी का विधिवत पूजन किया। मंदिर के महंत कौशल द्विवेदी के आचार्यत्व में वैदिक ब्राह्मणों ने शंखध्वनि, घंटानाद और वैदिक ऋचाओं से हल्दी को अभिमंत्रित कर मंगलमय बनाया।
शाम को कौशल द्विवेदी के साथ अवनीश शुक्ला, संजय दुबे सहित महंत परिवार ने शोभायात्रा निकाली। यात्रा टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत के आवास पहुंची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर इस यात्रा का स्वागत किया। इसके बाद मंगल मंडप सजाया गया। रंग-बिरंगे पुष्पों, आम्र पल्लव और पारंपरिक सजावट से सुसज्जित कर हल्दी की रस्म शुरू हुई।
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माता के शृंगारित छवि के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार देर रात तक लगी रही। 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी पर बाबा की पालकी यात्रा के साथ इस लोकपरंपरा का समापन होगा। गौने की हल्दी की परंपरा के अनुसार सुबह दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में विशेष अनुष्ठान हुआ।
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वैदिक ब्राह्मणों ने नौ गौरी और नौ दुर्गा के आह्वान मंत्रों के साथ हल्दी का विधिवत पूजन किया। मंदिर के महंत कौशल द्विवेदी के आचार्यत्व में वैदिक ब्राह्मणों ने शंखध्वनि, घंटानाद और वैदिक ऋचाओं से हल्दी को अभिमंत्रित कर मंगलमय बनाया।
शाम को कौशल द्विवेदी के साथ अवनीश शुक्ला, संजय दुबे सहित महंत परिवार ने शोभायात्रा निकाली। यात्रा टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत के आवास पहुंची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर इस यात्रा का स्वागत किया। इसके बाद मंगल मंडप सजाया गया। रंग-बिरंगे पुष्पों, आम्र पल्लव और पारंपरिक सजावट से सुसज्जित कर हल्दी की रस्म शुरू हुई।
पूर्व महंत स्व. कुलपति तिवारी के पुत्र और आयोजक पं. वाचस्पति तिवारी के सानिध्य में 11 वैदिक ब्राह्मणों ने माता गौरा की चल प्रतिमा का विशेष पूजन किया। वेदमंत्रों की गूंज के साथ माता को मंडप में विराजमान कराया। इसके बाद वैदिक रीति से अभिमंत्रित हल्दी मां को अर्पित की गई। हल्दी चढ़ाकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। महिलाओं के पारंपरिक मंगलगीत और सोहर गूंज उठे। गीतों में दुल्हन की विदाई, ससुराल और शुभकामनाओं के भाव झलक रहे थे।
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बनारसी वस्त्र, रत्नाभूषण और सिंदूरी आभा में सजीं गौरा
हल्दी के रस्म के साथ माता गौरा का शृंगार हुआ। मां को बनारसी वस्त्र, रत्नाभूषण, पुष्पमालाएं और सिंदूरी आभा से सुसज्जित कराया गया। मां के शृंगारित छवि के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। रस्म निभाने के लिए काफी संख्या में भक्त पहुंचे थे।
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हल्दी के रस्म के साथ माता गौरा का शृंगार हुआ। मां को बनारसी वस्त्र, रत्नाभूषण, पुष्पमालाएं और सिंदूरी आभा से सुसज्जित कराया गया। मां के शृंगारित छवि के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। रस्म निभाने के लिए काफी संख्या में भक्त पहुंचे थे।
