एयर शो: काशी में पहली बार दिखा हवाई कौशल, बालाकोट में शामिल सुखोई, ऑपरेशन सिंदूर के तेजस का फॉर्मेशन
लड़ाकू विमानों के एरोहेड फॉर्मेशन की क्षमता से काशी रूबरू हुई। सुखोई, राफेल और सारंग हेलीकॉप्टर ने सबसे जयादा 12-12 चक्कर लगाए। एयर शो में सबसे पहले काशी मैन्यूवर (फॉर्मेशन या करतब) का प्रदर्शन हुआ।
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ऑपरेशन सिंदूर में हिस्सा लेने वाले राफेल, सुखोई, मिराज 2000, मिग-29, तेजस, जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों ने बृहस्पतिवार को काशी के आसमान में अपना शौर्य प्रदर्शन किया। इन विमानों के डिफेंस सिस्टम और उनकी क्षमता को देखने, समझने और जानने का मौका काशीवासियों को पहली बार मिला। जब राफेल, सुखोई और तेजस ने गंगा के ऊपर उड़ान भरी तो सबकी आंखें आसमान में ही टिक गईं। ऐतिहासिक नॉर्थ अमेरिकन टी-6 टेक्सन विमान की उड़ान भी आकर्षण का केंद्र रही।
एयर शो में सबसे पहले काशी मैन्यूवर (फॉर्मेशन या करतब) का प्रदर्शन हुआ। बारी-बारी से सभी 25 मैन्यूवर दिखाए गए। इसमें सबसे ज्यादा 12-12 चक्कर सुखोई, राफेल और सारंग हेलीकॉप्टर ने लगाए। सारंग हेलिकॉप्ट, सूर्यकिरण विमान, राफेल, सुखोई-30 एककेआई, तेजस, अपाचे सभी विमानों के फॉर्मेशन आकर्षक रहे।
ये सभी एयरक्राफ्ट नमो घाट से अस्सी घाट और फिर अस्सी से नमो घाट तक आए और हवा में ही अपने गंतव्य को लौट गए। कुछ एयरक्राफ्ट नमो घाट से पड़ाव की ओर गए फिर वापस आकर अस्सी का रुख किया। पास से गुजरने वाले इन विमानों की गति इतनी ज्यादा और आवाज इतनी तेज थी कि लोग लगातार इन्हें देखते ही रहे।
बालाकोट एयरस्ट्राइक में भी शामिल रहे सुखोई और मिराज
26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने बालाकोट एयरस्ट्राइक की थी। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने को निशाना बनाया गया था। इस कार्रवाई में मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने मुख्य भूमिका निभाई थी। सुखोई-30 एमकेआई समेत अन्य विमान भी अभियान के दौरान सुरक्षा और निगरानी से जुड़ी भूमिकाओं में शामिल थे।
टी-6 टेक्सन की उड़ान ने भी खींचा ध्यान
नारंगी और सफेद रंग के नॉर्थ अमेरिकन टी-6 टेक्सन विमान ने अभ्यास के दौरान उड़ान भरी तो दर्शक उसे भी निहारते रह गए। इसे हार्वर्ड और एसएनजे नामों से भी जाना जाता है। यह विमान पायलट को उन्नत लड़ाकू विमानों के लिए तैयार करने वाले प्रशिक्षण विमानों में शामिल रहा है। भारतीय वायुसेना में इसे 1942 में शामिल किया गया था और 1975 में सेवा से हटा दिया गया। टी-6 टेक्सन को शुरुआती प्रशिक्षण विमानों और पी-51 मस्टैंग व सुपरमरीन स्पिटफायर जैसे उच्च प्रदर्शन वाले लड़ाकू विमानों के बीच प्रशिक्षण की कड़ी के रूप में विकसित किया गया था। अपनी फुर्ती और हवा में कलाबाजी करने की क्षमता के लिए मशहूर यह विमान आज भी विमानन प्रेमियों के बीच लोकप्रिय है। ऐतिहासिक सैन्य विमानों की श्रेणी में आने वाले इस विमान का रेडियल इंजन और विशिष्ट बनावट इसे अलग पहचान देते हैं।