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काबू में आया धनराज: लगे तीन इंजेक्शन, हथिनी को देखने के बाद बिदक गया था; महावत का ट्रॉमा सेंटर में चल रहा इलाज

Tue, 20 Oct 2026 06:23 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Tue, 20 Oct 2026 06:23 AM IST
सार

तीन इंजेक्शन लगाने के बाद हाथी धनराज को काबू में किया जा सका। डॉक्टरों के मुताबिक, रविवार को हथिनी को देखकर बिदकने के बाद उसने उत्पात मचाया था। रामलीला में धनराज 14वीं बार आया था, लेकिन हाथी के इस्तेमाल की अनुमति नहीं थी। महावत का ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है। हाथी को रासलीला मैदान में बांधकर रखा गया है। मालिक उसे आजमगढ़ ले जाने की तैयारी कर रहा है।

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elephant under control Administered injections agitated seeing female elephant mahout currently serious
रामलीला मैदान में बंधा धनराज। - फोटो : संवाद

विस्तार

गोरखपुर से आई प्राणि उद्यान के डॉक्टरों की टीम ने रामनगर की रामलीला में आए हाथी धनराज को तीन इंजेक्शन दिए तब जाकर काबू में आ सका। हाथी को रासलीला मैदान में बांधकर रखा गया है। वन विभाग और हाथी मालिक के कर्मचारी उसकी निगरानी कर रहे हैं। 

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डॉक्टरों की टीम के मुताबिक, हाथी मस्ती में है। एक हथिनी को देखने के बाद बिदक गया था। हाथी के मस्ती में रहने की समय सीमा दो महीने की होती है। हाथी जब मस्ती में रहे तो उसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नहीं भेजना चाहिए। इस मामले में निर्धारित प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है। दूसरी तरफ, विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में हाथी के उपयोग की अनुमति वन विभाग से नहीं ली गई थी। यह 14वां मौका है जब आजमगढ़ से हाथी रामनगर की रामलीला में आया था।
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प्रभु नारायण इंटर कॉलेज के सामने रासलीला मैदान में बांधे गए हाथी को देखने के लिए सोमवार को भी लोगों की भीड़ पहुंची। सुरक्षा व्यवस्था में रामनगर थाने के चार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मालिक अब हाथी को वापस आजमगढ़ ले जाने की तैयारी में है। रविवार को बिदके हाथी को काबू में करने के लिए वन विभाग की टीम को 11:30 घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी थी। हाथी ने महावत छापलू को कुचल दिया था। उसका बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है। हाथी ने कई खंभे उखाड़ दिए थे। जमकर उत्पात मचाया था।

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हाथी के उपयोग के लिए अनुमति की परंपरा नहीं : सुरक्षाधिकारी
दुर्ग प्रशासन के सुरक्षाधिकारी राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि रामलीला में हाथी के उपयोग के लिए अनुमति लेने की परंपरा नहीं रही है। इसी वजह से इस साल भी अनुमति नहीं ली गई थी। रामनगर की रामलीला में काशीराज परिवार के डॉ. अनंत नारायण सिंह और उनके पूर्वजों के हाथी पर सवार होकर लीला में शामिल होने की परंपरा वर्षों पुरानी है।

60 साल से काशीराज परिवार के पास नहीं है हाथी
रामलीला में शामिल होने वाले हाथी काशीराज परिवार के नहीं होते हैं। पिछले करीब 60 वर्षों से रामलीला के दौरान किराये पर हाथी मंगाए जाते हैं। आजमगढ़ के तीन लोगों के यहां से हाथी पिछले 15 वर्षों से रामलीला में शामिल होने के लिए मंगाए जा रहे हैं।

रामनगर की रामलीला में आए हाथियों का लाइसेंस था या नहीं और वन विभाग से अनुमति मांगी गई थी या नहीं, इसकी जांच कराई जाएगी। इसके बाद ही स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। निधि चौहान, डीएफओ, वाराणसी

याद आया 2013 का विवाद, हाथी के उपयोग पर फिर उठे सवाल
रामलीला में हाथी के उपयोग का विवाद वर्ष 2013 में हुआ था। उस समय वन विभाग ने बिना अनुमति हाथी के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद कुंवर ने हाथी की सवारी बंद कर दी थी। इससे रामलीला प्रभावित हुई थी। रामलीला प्रेमियों का एक बड़ा समूह रामनगर किले के पक्ष में खड़ा हो गया था। रामलीला प्रभावित होने और लोगों के विरोध के बाद प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे।

विश्वप्रसिद्ध रामलीला में हाथी के उपयोग को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। जनसुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण की चिंता सता रही है। रामलीला प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अवधेश दीक्षित ने सोमवार को सक्षम अधिकारियों को पत्र भेजकर हाथी के उपयोग से पहले सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कराने की मांग की है। 

उन्होंने कहा कि हाथी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-एक में शामिल है। ऐसे में उसके स्वामित्व, परिवहन और सार्वजनिक आयोजनों में उपयोग के लिए लागू प्रावधानों का पालन जरूरी है। उन्होंने स्वामित्व प्रमाण-पत्र, वन विभाग की आवश्यक अनुमति, पशु चिकित्सक का स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र और जिला प्रशासन की अनुमति कराने पर जोर दिया।

परंपरा के साथ सुरक्षा भी जरूरी
डॉ. अवधेश ने कहा कि रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला की परंपरा के निर्वहन के साथ जनसुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हाथी के उपयोग की सभी जरूरी अनुमतियां और सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी होने के बाद ही किया जाए। अनुमति में हाथी के स्वास्थ्य, देखभाल, नियंत्रण और आम लोगों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान भी स्पष्ट होने चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मामले में जल्द संज्ञान लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की है।

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