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हरतालिका तीज 2026: पूजन के लिए मिलेगा 3 घंटे 18 मिनट का शुभ मुहूर्त, 14 को बन रहा खास संयोग

Mon, 07 Sep 2026 03:13 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Mon, 07 Sep 2026 03:13 PM IST
सार

हरतालिका तीज पर सुहागिन व कुंवारी युवतियां निर्जला व्रत रखेंगी। इस दौरान 14 सितंबर को पूजन के लिए 3:18 घंटे शुभ मुहूर्त मिलेंगे। इस दिन महिलाएं सोलह शृंगार कर शिव-पार्वती की पूजा करेंगी।

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Hartalika Teej 2026 puja shubh muhurat special celestial alignment forming on teej in Varanasi
हरतालिका तीज प्रतिमा - फोटो : amar ujala

विस्तार

सुहागिन अखंड सौभाग्य और कुंवारी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए 14 सितंबर को हरतालिका तीज व्रत रखेंगी। इस बार यह व्रत सोमवार को होने से और भी फलदायी होगा। सुहागिन व कुंवारी निराहार-निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगी। इस दिन चित्रा नक्षत्र के अलावा ब्रह्म और मुद्गर योग रहेगा। पूजा के लिए सुबह और शाम को कुल 3:18 घंटे का शुभ मुहूर्त मिलेगा।

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भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाएगी। पंचांगों के अनुसार, भादो मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 13 सितंबर सुबह 7:15 बजे होगी, जो अगले दिन 14 सितंबर सोमवार को सुबह 7:14 बजे तक रहेगी। हिंदू धर्म में उदयातिथि की प्रधानता होने के कारण 14 सितंबर को दिनभर तृतीया तिथि रहेगी। इसलिए इसी दिन यह पर्व मनाया जाएगा। 
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श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष व प्रख्यात ज्योतिषविद् प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि यह पर्व खासकर कुंवारियों के लिए सबसे उत्तम माना गया है। मान्यता है कि भगवान शिव से माता पार्वती का विवाह कराने के लिए उनकी सखियां उन्हें हरण कर वन में ले गईं और वहां माता पार्वती ने भगवान शिव की पूजा की। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ।

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पूजा के लिए सुबह 54 मिनट शुभ मुहूर्त 
हरतालिका तीज पर दो समय पूजा करना सबसे उत्तम और फलदायी होगा। सुबह 6:12 से 7:06 बजे तक शुभ मुहूर्त है। कुल 54 मिनट का शुभ मुहूर्त बन रहा है। सुबह पूजा करनी हो तो तृतीया तिथि समाप्त होने से पहले यानी सुबह 7:06 बजे तक पूजा करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा। महिलाएं सुबह पूजा नहीं कर पाईं तो शाम को प्रदोष काल में पूजा कर सकती हैं। प्रदोष काल सूर्यास्त के ठीक बाद का समय होता है। इस दौरान 2:24 घंटे तक पूजा का मुहूर्त रहेगा।

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रेत की मूर्ति बनाकर करें पूजा, जागरण कर कीर्तन
हरतालिका व्रत अत्यंत कठिन माना गया है। इसके नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करना होता है। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि महिलाएं निराहार और निर्जला व्रत रखकर नए वस्त्र पहनें और सोलह शृंगार कर माता पार्वती को सुहाग की सामग्री चढ़ाकर पूजा करें। भगवान शिव और माता पार्वती की बालू (रेत) से मूर्ति बनाकर पूजा करना सबसे पवित्र माना गया है। व्रत में रात के समय सोना नहीं चाहिए। जागरण कर भगवान शिव और माता पार्वती के भजनों का कीर्तन और आरती करें। हरतालिका तीज की व्रत कथा का श्रवण करें।
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