महंगे शौक बना रहे अपराधी: छोटी उम्र, संगीन जुर्म, 30 थानों में हर हफ्ते पकड़े जा रहे सात बाल अपचारी
कमिश्नरेट के तीन प्रमुख जोन के तहत आने वाले 30 थानों से हर हफ्ते सात बाल अपचारियों को पकड़ा जा रहा है। छोटी उम्र में ही संगीन जुर्म में इनकी संलिप्तता सामने आ रही है।
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कम उम्र में ही अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले नाबालिगों का आंकड़ा डराने वाला रुख अपना रहा है। कमिश्नरेट के तीन प्रमुख जोन के तहत आने वाले 30 थानों से हर हफ्ते 6-7 बाल अपचारियों को गंभीर अपराधों के आरोप में हिरासत में लेकर बाल सुधार गृह (बाल संरक्षण गृह) भेजा जा रहा है। खेल-कूद और पढ़ाई की उम्र में ये किशोर हत्या, लूट, चोरी, साइबर और पॉक्सो एक्ट जैसे संगीन मामलों में पकड़े जा रहे हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, पकड़े गए ज्यादातर किशोरों की उम्र 14 से 17 वर्ष के बीच है। आपराधिक गिरोह इन नाबालिगों का इस्तेमाल इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि कानूनी प्रावधानों के तहत इन्हें वयस्कों की तुलना में सख्त सजा से राहत मिल जाती है। लग्जरी लाइफस्टाइल और अपराध की दुनिया को महिमामंडित करने वाली रील्स और वेब सीरीज से प्रभावित होकर युवा गलत राह पकड़ रहे हैं।
महंगे नशे और अपने शौक पूरे करने के लिए नाबालिग चोरी, स्नैचिंग और लूटपाट जैसे अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। स्थानीय शातिर अपराधी और संगठित गैंग इन किशोरों को पैसे और हथियार का लालच देकर अपराध कराने में इस्तेमाल कर रहे हैं।
साइबर सेल ने चिह्नित किए हैं 200 अकाउंट
डिजिटल क्रिएटर बनकर सोशल मीडिया पर खुद को वायरल करने वाले भी गैरकानूनी कार्य कर रहे हैं। असलहा, तलवार लेकर रील बनाने और जन्मदिन पर काफिला निकालने वालों समेत अन्य वीडियो में गाली-गलौज कर समाज में द्वेष फैलाने वालों के अकाउंट भी साइबर क्राइम सेल ने चिन्हित किए हैं। तीन जोन में मिलाकर लगभग 200 अकाउंट चिन्हित किए गए हैं। जल्द ही पुलिस सभी को नोटिस जारी करने वाली है।
केस-1
फूलपुर थाना क्षेत्र के कठिरांव बेहवरिया गांव में नितिन चौहान को रील बनाने के दौरान गोली लग गई। उसके दो दोस्तों, जो बाल अपचारी हैं, को कोर्ट ने सुधार गृह भेज दिया। रील के शौक में नितिन का चेहरा खराब हुआ और उसके दोनों दोस्तों पर प्राथमिकी भी दर्ज हुई। घटना 5 सितंबर को हुई थी।
केस-2
सिगरा थाना क्षेत्र के शिवपुरवा में पुरानी रंजिश में ईशू कन्नौजिया की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। इसमें दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और एक बाल अपचारी को पकड़ा गया। 20 अगस्त को ईशू का सड़ा-गला शव बोरे में बरामद हुआ था।
केस-3
गर्लफ्रेंड के महंगे शौक पूरे करने और गलत सोहबत में रामनगर क्षेत्र का एक बाल अपचारी चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। पुलिस ने बाल अपचारी को पकड़ा। छानबीन में मालूम चला कि वह 17 वर्ष की उम्र में 12 चोरी की घटनाओं को अंजाम दे चुका था।
कचहरी के अधिवक्ता विकास सिंह ने बताया कि नाबालिगों के इस तरह अपराध में फंसने के पीछे मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर होने वाली दोस्ती, कम उम्र का आकर्षण और परिपक्वता की कमी देखी जा रही है। ज्यादातर मामलों में 15 से 17 साल के किशोरों की जान पहचान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए हुई। शादी का वादा करके किशोरियों को घर से भगा ले जाना और साथ रहना कानून की नजर में गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
लड़की के नाबालिग होने के कारण परिजनों की शिकायत पर पुलिस अपहरण और पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज करती है। कई मामलों में किशोरों को यह अहसास ही नहीं होता है कि आपसी सहमति से भी नाबालिग के साथ बनाया गया शारीरिक संबंध या उसे भगाना पॉक्सो कानून के तहत गैरजमानती अपराध है।
पुलिस और समाज के सामने बड़ी चुनौती
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ कानूनी कार्रवाई से इस समस्या का हल नहीं निकल सकता। थानों के स्तर पर बाल मित्र पुलिस अधिकारी तैनात किए गए हैं, लेकिन परिवार और समाज की सतर्कता के बिना इसे रोकना बेहद कठिन है। मंडलीय मनोवैज्ञानिक डॉ. बनानी घोष का मानना है कि बच्चों पर ध्यान न देना, घर में कलह का माहौल और इंटरनेट का अनियंत्रित इस्तेमाल बच्चों को आक्रामक बना रहा है। यदि समय रहते अभिभावकों ने बच्चों की बदलती आदतों पर ध्यान नहीं दिया, तो बाल अपराध का यह दायरा और विकराल रूप ले सकता है।
जेल या सुधार गृह भेजना समस्या का स्थायी समाधान नहीं
मनोचिकित्सक डॉ. प्रदीप चौरसिया ने बताया कि सिर्फ जेल या सुधार गृह भेजना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। जब तक माध्यमिक स्कूलों, कोचिंग संस्थानों और परिवारों के स्तर पर किशोरों को पॉक्सो कानून और उसके गंभीर कानूनी परिणामों की जानकारी नहीं दी जाएगी, तब तक अज्ञानता और भावनात्मकता में बहकावे में आकर जेल जाने वाले बाल अपचारियों की संख्या में कमी आना मुश्किल है।
अधिकारी बोले
अभिभावकों को अपने बच्चों पर गहरी नजर रखनी चाहिए। वे क्या कर रहे हैं, कहां आते-जाते हैं और उनकी संगत किस तरह के लड़कों से है, इस पर ध्यान देना चाहिए। मोबाइल से भी जुर्म पर कानूनी कार्रवाई तय होती है। -मोहित अग्रवाल, पुलिस आयुक्त