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Exclusive: काशी में मौसम का सटीक हाल बताएगा हाईटेक रडार, 500 मीटर तक होगी निगरानी; खासियत जान लें

Fri, 31 Jul 2026 09:28 AM IST
Pragati Chand हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Fri, 31 Jul 2026 09:28 AM IST
सार

Varanasi Weather: वाराणसी के पिंडरा में हाईटेक मौसम रडार स्थापित किया गया है। इससे बिजली गिरने, आंधी-तूफान और बारिश की अधिक सटीक जानकारी मिलेगी। बनारस के अलावा आजमगढ़ और प्रयागराज में भी ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है। 

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high-tech Doppler weather radar in Kashi will provide accurate weather updates
varanasi weather - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशीवासियों को जल्द ही मौसम की अधिक सटीक और स्थानीय जानकारी मिल सकेगी। बदलते मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान के लिए पहली बार पिंडरा में हाईटेक डॉप्लर मौसम रडार स्थापित किया गया है। इसकी निगरानी क्षमता 500 किलोमीटर तक होगी, जबकि 250 किलोमीटर तक के क्षेत्र में यह अधिक सटीक आंकड़े उपलब्ध कराएगा।

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यह रडार उच्च गुणवत्ता का रेडियो डेटा भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वैज्ञानिकों तक पहुंचाएगा, जिससे बिजली गिरने, आंधी-तूफान और बारिश जैसी मौसम संबंधी घटनाओं का अधिक सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा। बनारस के अलावा आजमगढ़ और प्रयागराज में भी ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है। दूसरी ओर, काशी में मौसम की निगरानी के लिए अब 27 मौसम स्टेशनों का नेटवर्क तैयार किया गया है। इससे वाराणसी के विभिन्न क्षेत्रों से बारिश और तापमान सहित अन्य मौसम संबंधी आंकड़े एकत्र किए जा सकेंगे।
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यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. अतुल कुमार सिंह के अनुसार, पिंडरा में स्थापित रडार का अभी कमीशनिंग कार्य पूरा नहीं हुआ है। फिलहाल इसे स्थापित कर दिया गया है और जल्द ही इसके माध्यम से मौसम का अध्ययन शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि लखनऊ में पहले से एक रडार कार्यरत है। इसके अलावा दो अन्य रडार लगाए जा रहे हैं। झांसी, अलीगढ़ और बरेली में भी रडार स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि गोरखपुर में इसके लिए स्थल का चयन किया जा रहा है।

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ऑटोमैटिक मिलेगा बारिश का आंकड़ा
डॉ. सिंह ने बताया कि काशी में स्थानीय स्तर पर मौसम के अधिक सटीक आंकड़े उपलब्ध होंगे। 27 मौसम स्टेशनों में तीन स्टेशन पूरी तरह आईएमडी ने स्थापित किए हैं, जबकि शेष 24 स्टेशन उत्तर प्रदेश सरकार ने आईएमडी के तकनीकी सहयोग से लगाए हैं। ये सभी ऑटोमैटिक स्टेशन हैं, जहां वर्षा होने पर स्वतः मिलीमीटर में वर्षा का आंकड़ा दर्ज हो जाएगा। इस नेटवर्क में स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस) और स्वचालित वर्षामापी (एआरजी) शामिल हैं।

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सेंसर के बजाय प्रशिक्षित व्यक्ति तैयार करता है आंकड़े
बाबतपुर और बीएचयू में मैनुअल वेदर ऑब्जर्वेटरी संचालित हैं, जहां मैनुअल रेन गेज के माध्यम से वर्षा के आंकड़ों का रिकॉर्ड रखा जाता है। वहीं, राजघाट में भी रेन गेज के जरिए वर्षा दर्ज की जाती है। रेन गेज एक ऐसा उपकरण है, जिसका उपयोग किसी निश्चित अवधि में हुई वर्षा को मापने के लिए किया जाता है। मैनुअल वेदर ऑब्जर्वेटरी में स्वचालित सेंसर के बजाय प्रशिक्षित ऑब्जर्वर स्वयं उपकरण का निरीक्षण कर आंकड़े दर्ज करता है।
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