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Mahashivratri 2026: रुद्राक्ष और मेवों से बना सेहरा पहन निकलेंगे बाबा विश्वनाथ, दूल्हे के रूप में सजेंगे

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 10 Feb 2026 06:05 PM IST
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सार

Varanasi News: महाशिवरात्रि पर बाबा का दूल्हे के रूप में शृंगार किया जाएगा। इस दौरान रुद्राक्ष और मेवों से बना सेहरा पहनकर बाबा विश्वनाथ निकलेंगे। 

Mahashivratri 2026 Baba kashi Vishwanath will groom wearing turban made of Rudraksha and dry fruits
Kashi Vishwanath Dham - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि पर काशीपुराधिश्वर बाबा विश्वनाथ दूल्हे के रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। बाबा का रुद्राक्ष, फल, मेवा और पुष्पों से निर्मित सेहरा से शृंगार होगा। बाबा सेहरा पहनकर भक्तों को दर्शन देंगे, तब परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। 

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महाशिवरात्रि पर बाबा के दूल्हा के रूप में शृंगार की काशी की सदियों पुरानी परंपरा है। दूल्हे के रूप में किए जाने वाले इस शृंगार में सेहरा विशेष है। रुद्राक्ष से बना सेहरा बाबा की वैराग्य परंपरा और शिवतत्व का प्रतीक है, जबकि इसमें प्रयुक्त फल, मेवा और पुष्प लोकाचार और मंगल भाव को दर्शाते हैं। 
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टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत के आवास से शिव बरात और श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में रातभर चलने वाली चारों पहर की आरती के दौरान बाबा को यह सेहरा अर्पित किया जाएगा। यह सेहरा बाबा की चल प्रतिमा सहित मंदिर में होने वाली आरती के दौरान विराजमान रहेगा। 

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आयोजक वाचस्पति तिवारी ने बताया कि सेहरा पूर्ण रूप से प्राकृतिक और धार्मिक सामग्री से तैयार होगा। इसमें रुद्राक्ष के साथ मखाना, लौंग, इलाइची, अंगूर आदि सुगंधित पुष्पों का प्रयोग होगा। इन वस्तुओं के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। रुद्राक्ष शिव का प्रिय है। 

शिवलिंगी संतान और समृद्धि का प्रतीक है। फल और मेवा मंगल कामना और समर्पण भाव को दर्शाते हैं। उन्होंने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में चारों पहर की सप्तर्षि आरती होगी। इस आरती का संचालन पं. शशिभूषण त्रिपाठी ‘गुड्डु महाराज’ के नेतृत्व में होगा।

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