{"_id":"6ae31a6795b48d431c056846","slug":"one-minister-at-centre-eight-ministers-from-purvanchal-region-in-state-bjp-defeated-in-mlc-elections-in-up-2026-10-29","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एमएलसी चुनाव: केंद्र में एक, राज्य में पूर्वांचल से आठ मंत्री फिर भी भाजपा की हार, सपा की जीत का अंतर भी बढ़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमएलसी चुनाव: केंद्र में एक, राज्य में पूर्वांचल से आठ मंत्री फिर भी भाजपा की हार, सपा की जीत का अंतर भी बढ़ा
Thu, 29 Oct 2026 03:35 PM IST
Pragati Chand
राहुल दुबे, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
राहुल दुबे, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Thu, 29 Oct 2026 03:35 PM IST
सार
केंद्र में एक और राज्य में पूर्वांचल से आठ मंत्री हैं फिर भी एमएलसी चुनाव में भाजपा की हार हुई। इससे मंत्रियों, विधायक और संगठन के पदाधिकारियों के कामकाज पर सवाल खड़े हो गए हैं।
विज्ञापन
वाराणसी में मतगणना स्थल पर तैनात पुलिस फोर्स
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पूर्वांचल में राज्य और केंद्र के नौ मंत्री हैं फिर भी शिक्षक एमएलसी के चुनाव में भाजपा की करारी हार हुई है। अकेले वाराणसी से ही चार मंत्री हैं। इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशी को निर्दलीय के तौर पर जितने मत पिछले चुनाव में मिले थे उससे भी कम मत इस बार मिले हैं। इससे मंत्रियों, विधायक और संगठन के पदाधिकारियों के कामकाज पर सवाल खड़े हो गए हैं।
विज्ञापन
यूपी सरकार में मऊ के एके शर्मा, वाराणसी के रविंद्र जायसवाल, हंसराज विश्वकर्मा, अनिल राजभर, डॉ दयाशंकर मिश्र दयालु, सोनभद्र के संजीव गौड़, जौनपुर के गिरीश चंद्र यादव, बलिया के दयाशंकर सिंह मंत्री हैं। इसी तरह केंद्र सरकार में मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल मंत्री हैं। इन्हीं जिलों में शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव हुए हैं। इसमें भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। सबसे अहम बात यह है कि 2020 में 936 मतों से जीतने वाले लाल बिहारी यादव ने इस बार जीत का अंतर बढ़ाकर 5,015 मत कर लिया। यानी पांच साल में जीत का अंतर 4,079 मत बढ़ गया।
विज्ञापन
वर्ष 2020 में लाल बिहारी यादव को 7,766 मत मिले थे। उस चुनाव में डॉ. प्रमोद मिश्रा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में थे और उन्हें 6,830 मत मिले थे। इस बार भाजपा ने प्रमोद मिश्रा को अपना प्रत्याशी बनाया, लेकिन अंतिम गणना में उन्हें 6,597 मत ही मिल सके। पिछले चुनाव की तुलना में उनके मत 233 कम रहे। दूसरी ओर, लाल बिहारी यादव के अंतिम मत बढ़कर 11,612 हो गए। यानी 2020 के मुकाबले उन्हें 3,846 अधिक मत मिले।
विज्ञापन
भाजपा के लिए यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों में सात पर भाजपा और एक पर उसकी सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) का प्रतिनिधित्व है। इसके बावजूद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी की जीत का अंतर बढ़ना बताता है कि विधानसभा की राजनीतिक ताकत और शिक्षक मतदाताओं का चुनावी व्यवहार अलग-अलग हो सकता है।
Trending Videos
संगठन की पहुंच, प्रत्याशी चयन और शिक्षक मतदाताओं के बीच संपर्क अभियान की समीक्षा का विषय
यह परिणाम भाजपा के लिए प्रत्याशी चयन, शिक्षक समुदाय के बीच संगठन की पहुंच और चुनावी संपर्क की प्रभावशीलता की समीक्षा का विषय बन सकता है। वहीं, सपा के लिए यह लगातार दूसरी जीत अपने मौजूदा मताधार को बनाए रखने और उसे बढ़ाने का संकेत है। दूसरी ओर भाजपा के नेता कह रहे हैं कि इस नतीजे को पूरे जिले के मतदाताओं का रुझान मानने के बजाय शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित रखकर ही देखना चाहिए।
एक बड़े भाजपा नेता ने कहा कि यह परिणाम भाजपा के लिए संगठन की पहुंच, प्रत्याशी चयन और शिक्षक मतदाताओं के बीच संपर्क अभियान की समीक्षा का विषय है। सम्मेलन में जुटी भीड़ और चुनाव में मिले मतों के बीच सीधा संबंध माना जाए या फिर प्रत्याशी, स्थानीय संगठन, शिक्षकों के मुद्दे या अन्य कारकों की कितनी भूमिका रही। आगे की बैठकों में जल्द ही इन्हीं सभी पर बात होगी।
यह परिणाम भाजपा के लिए प्रत्याशी चयन, शिक्षक समुदाय के बीच संगठन की पहुंच और चुनावी संपर्क की प्रभावशीलता की समीक्षा का विषय बन सकता है। वहीं, सपा के लिए यह लगातार दूसरी जीत अपने मौजूदा मताधार को बनाए रखने और उसे बढ़ाने का संकेत है। दूसरी ओर भाजपा के नेता कह रहे हैं कि इस नतीजे को पूरे जिले के मतदाताओं का रुझान मानने के बजाय शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित रखकर ही देखना चाहिए।
एक बड़े भाजपा नेता ने कहा कि यह परिणाम भाजपा के लिए संगठन की पहुंच, प्रत्याशी चयन और शिक्षक मतदाताओं के बीच संपर्क अभियान की समीक्षा का विषय है। सम्मेलन में जुटी भीड़ और चुनाव में मिले मतों के बीच सीधा संबंध माना जाए या फिर प्रत्याशी, स्थानीय संगठन, शिक्षकों के मुद्दे या अन्य कारकों की कितनी भूमिका रही। आगे की बैठकों में जल्द ही इन्हीं सभी पर बात होगी।
2020 में भाजपा से थे चेत नारायण, इस बार निर्दलीय लड़कर तीसरे स्थान पर रहे
वाराणसी खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव में चेत नारायण सिंह की राजनीतिक भूमिका पांच साल में बदल गई। वर्ष 2020 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ते हुए उन्हें 4858 मत मिले थे। इस बार वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे और अंतिम गणना में 3471 मत प्राप्त किए। उनके मतों में पिछले चुनाव की तुलना में 1387 की कमी आई। वर्ष 2020 में चेत नारायण सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे। उस चुनाव में सपा के लाल बिहारी यादव को 7766 और डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 6830 मत मिले थे। चेत नारायण सिंह के मतों में कमी और प्रमोद मिश्रा के प्रदर्शन को साथ रखकर देखने पर यह सवाल उठता है कि पिछले चुनाव में भाजपा से जुड़े मतदाताओं का समर्थन इस बार किस दिशा में गया।
वाराणसी खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव में चेत नारायण सिंह की राजनीतिक भूमिका पांच साल में बदल गई। वर्ष 2020 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ते हुए उन्हें 4858 मत मिले थे। इस बार वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे और अंतिम गणना में 3471 मत प्राप्त किए। उनके मतों में पिछले चुनाव की तुलना में 1387 की कमी आई। वर्ष 2020 में चेत नारायण सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे। उस चुनाव में सपा के लाल बिहारी यादव को 7766 और डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 6830 मत मिले थे। चेत नारायण सिंह के मतों में कमी और प्रमोद मिश्रा के प्रदर्शन को साथ रखकर देखने पर यह सवाल उठता है कि पिछले चुनाव में भाजपा से जुड़े मतदाताओं का समर्थन इस बार किस दिशा में गया।
शिक्षक एमएलसी चुनाव में सपा की जीत, मुद्दों और संपर्क अभियान की भी परीक्षा
शिक्षक एमएलसी चुनाव में सपा के लाल बिहारी यादव की लगातार दूसरी जीत ने शिक्षक समुदाय के बीच राजनीतिक दलों की पहुंच और मुद्दों पर उनके प्रभाव को चर्चा में ला दिया है। चुनाव से पहले सपा ने शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को अपने प्रचार में प्रमुखता दी थी।
शिक्षक एमएलसी चुनाव में सपा के लाल बिहारी यादव की लगातार दूसरी जीत ने शिक्षक समुदाय के बीच राजनीतिक दलों की पहुंच और मुद्दों पर उनके प्रभाव को चर्चा में ला दिया है। चुनाव से पहले सपा ने शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को अपने प्रचार में प्रमुखता दी थी।