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# Lock down के मारों की दास्तां, दिल्ली से सफर में जो बना सहारा, पैसे खत्म होने पर उसी को बेचकर मिटाई भूख

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Wed, 01 Apr 2020 12:00 AM IST
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Tales of victims of Lock down, the support made in the journey from Delhi, when money end then sell it and ate food
कोरोना वायरस से लॉकडाउन - फोटो : अमर उजाला।
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कोरोना वायरस के संक्रमण की आशंका के चलते सोमवार देर रात वाराणसी की सीमाएं पूरी तरह सील कर दी गईं। बावजूद इसके दूसरे राज्यों और शहरों से अलग-अलग माध्यमों से करीब लोग जिंदा रहने की कोशिश में अपनी-अपनी मातृभूमि की ओर निकल पड़े हैं। ऐसे ही दिल्ली से जिस सगड़ी (एक प्रकार का हाथ रिक्शा वाहन) पर बैठकर बिहार-झारखंड के लिए हजारों लोग निकले हैं रास्ते में खाने-पीने के लिए पैसे खत्म होने पर उसी सगड़ी को बेचकर भूख मिटानी पड़ी। 

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वाराणसी के राजातालाब में मंगलवार को एक दर्जन से अधिक सगड़ी तथा रिक्शे वाले घरों को जाते दिखाई दिए। एक-एक सगड़ी पर चार-पांच लोग बैठे हुए थे। सगड़ी से लौट रहे विवेक, मुस्तकीम, धर्मेंद्र आदि ने बताया कि दिल्ली में खाने के लाले पड़ गए थे। हम लोग 28 मार्च को ही दिल्ली से निकले हैं। बताया कि पैसे के अभाव में कई लोगों ने अपनी सगड़ी बेच दी और फिर वाहन पर सवार होकर घर को रवाना हो गए। रास्ते में दुकान नहीं खुलने से खाने-पीने का सामान भी नहीं मिल रहा। डंगहरिया में यात्रियों को भोजन कराया गया। 
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Tales of victims of Lock down, the support made in the journey from Delhi, when money end then sell it and ate food
अपने घर के लिए पैदल जाते लोग - फोटो : अमर उजाला

बाहर से आने वाले अपने ही घर में हो गए घुसपैठिए

वाराणसी की सीमाएं पूरी तरह सील होने के बावजूद दूसरे राज्यों और शहरों से अलग-अलग माध्यमों से करीब 265 परदेसियों ने घुसपैठियों की तरह गांवों में घुसने की कोशिश की। मगर, ग्रामीणों व पुलिस की सूचना पर उन्हें थर्मल स्कैनिंग सहित अन्य जांच के लिए प्रशासन की ओर से बनाए गए स्क्रीनिंग सेंटर पर ले जाया गया। वहां से अलग-अलग जगहों पर बनाए गए सेंटर पर होम क्वारंटीन कराया गया। दिल्ली सहित अन्य महानगरों से यूपी की सीमा तक पहुंचे लोगों को बसों से पहुंचाया गया। 

Tales of victims of Lock down, the support made in the journey from Delhi, when money end then sell it and ate food
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

14 दिन तक घर वालों से मिलने पर रहेगी पाबंदी

परदेस से अपने गांव पहुंच रहे लोग सीधे न तो अपने घरों में जाएंगे और न तो वे लोग घरवालों के साथ रहेंगे। बल्कि ऐसे लोग जो देश के विभिन्न जनपदों, महानगरों से वापस आए हैं, वह अपनी ग्राम पंचायतों में सामुदायिक विकास केंद्र, पंचायत भवन, प्राथमिक विद्यालय व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में रहेंगे।

यह लोग वहां पर 14 दिनों तक आइसोलेशन में बिताएंगे और इस दौरान उनका बाहर घूमना तथा गांव वालों से मेलजोल करना बंद रहेगा। ऐसा ना होने पर जिम्मेदारी खंड शिक्षा अधिकारी और उस विकासखंड के खंड विकास अधिकारी की होगी। ऐसे लोगों को भोजन उनके घर से या वहां पर सामुदायिक किचन का प्रयोग करते हुए ग्राम प्रधान या ग्राम विकास अधिकारी की निगरानी में दिया जा रहा है।

भोजन तीन मीटर की दूरी से दिया जाएगा। खाना खाने के बाद बर्तन उठाने वाले व्यक्ति हाथ में ग्लब्स पहने रहेंगे तथा गर्म पानी और साबुन से इन बर्तनों को धुलेंगे। मुख्य विकास अधिकारी इन केंद्रों की निगरानी कर रहे हैं। 

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