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US Tariff Relief: ट्रंप के टैरिफ कट से वाराणसी से भदोही तक निर्यातकों के खिले चेहरे, इन उद्योगों पर प्रभाव

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 04 Feb 2026 01:33 PM IST
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सार

ट्रंप के टैरिफ कट से वाराणसी से भदोही तक निर्यातकों के चेहरे खिल उठे हैं। टैरिफ 50 फीसदी से 18% पर आया। ऐसे में कालीन-सिल्क के लिए अमेरिका के द्वार खुल गए।
 

Trump tariff cut Relief for carpets and silk to exporters from Varanasi to Bhadohi
कालीन - फोटो : निर्यातक
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ घटाकर अब 18 फीसदी करने के फैसले से पूर्वांचल के उद्यमियों और निर्यातकों ने राहत की सांस ली है। पिछले छह महीनों से अमेरिका के साथ ठप पड़े व्यापारिक रिश्तों में इस कटौती के बाद एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

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वाराणसी, मिर्जापुर और भदोही के निर्यातकों का मानना है कि इस ट्रेड डील से न केवल व्यापार की लागत कम होगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धी क्षमता भी बढ़ेगी। पूर्वांचल में भदोही और मिर्जापुर अपनी कालीन बुनाई और हस्तशिल्प के लिए दुनिया भर में विख्यात हैं।
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कालीन कारोबारी विजय कपूर के अनुसार, इन तीन जिलों से सालाना 12 हजार करोड़ रुपये का निर्यात होता है। इसमें अकेले 8000 करोड़ रुपये का व्यापार अमेरिका से जुड़ा है। पिछले साल अगस्त में जब ट्रंप ने पहले 25 प्रतिशत और फिर उसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत टैरिफ कर दिया था, तब अमेरिकी खरीदारों ने भारतीय सामानों की ऊंची कीमतों के कारण हाथ खींच लिए थे। इसके कारण वाराणसी की सिल्क साड़ियां, भदोही के कालीन और टेक्सटाइल उत्पादों के करोड़ों रुपये के ऑर्डर अधर में लटक गए थे।

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कारखानों को मिलेगी नई ऊर्जा 

उद्यमियों का कहना है कि 50 प्रतिशत के दमनकारी शुल्क के कारण कई कारखाने बंद होने की कगार पर थे और लाखों कारीगर बेरोजगार हो गए थे। अब डील फाइनल होने के बाद निर्यात की राह आसान हुई है।

कृषि यंत्र निर्यातक राजेश सिंह बताते हैं कि वहां के खरीदारों से फिर से बातचीत की जा रही है। संभावना है कि ठप पड़े उद्योगों को फिर से पंख लगेंगे। पूर्वांचल निर्यातक संघ के अध्यक्ष रघु मेहरा का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब भी 18 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रभाव उद्योगों पर पड़ रहा है। हालांकि अब के फैसले से भी काफी हद तक राहत मिलेगी।

कारखानों को मिलेगी नई ऊर्जा

उद्यमियों का कहना है कि 50 प्रतिशत के दमनकारी शुल्क के कारण कई कारखाने बंद होने की कगार पर थे और लाखों कारीगर बेरोजगार हो गए थे। अब डील फाइनल होने के बाद निर्यात की राह आसान हुई है। कृषि यंत्र निर्यातक राजेश सिंह बताते हैं कि पूर्वांचल से अमेरिका में निर्यात की चैन टूट गई है। वहां के खरीदारों से फिर से बातचीत की जा रही है। संभावना है कि ठप पड़े उद्योगों को फिर से पंख लगेंगे। अमेरिका से नए ऑर्डर मिलने की प्रबल संभावना है, जिससे बेरोजगार हो चुके कारीगरों को दोबारा काम पर बुलाया जा सकेगा।
 
इन उद्योगों पर सकारात्मक प्रभाव

  • भदोही और मिर्जापुर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले इस उद्योग का 60% निर्यात अमेरिका को होता है।
  • बनारसी साड़ियां, चादरें, कुशन कवर, और जरी-जरदोजी के काम को नया बाजार मिलेगा।
  • निर्यातकों का कहना है कि टूटी हुई सप्लाई चेन को फिर से जोड़ने के लिए विदेशी खरीदारों से बातचीत शुरू हो गई है।
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