उपनयन संस्कार: 101 वेदियां...111 वैदिक आचार्यों ने कराया अनुष्ठान, 1100 बटुक बने द्विज; विधायक नीलकंठ पहुंचे
Varanasi News:
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अक्षय तृतीया पर धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज की तपोभूमि श्रीधर्मसंघ दुर्गाकुंड में सोमवार को आठ राज्यों से आए 1100 बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञोपवीत धारण किया। धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज के सानिध्य में बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार हुआ।
101 वेदियों पर 111 वैदिक आचार्यों ने छह घंटे तक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान कराया। वातावरण मंत्रों की अनुगूंज और धूप-दीप से सुगंधित होता रहा। बटुकों को आशीष देने विधायक नीलकंठ तिवारी भी पहुंचे थे।
मुख्य यजमान रामप्रकाश दुबे सपत्नीक एवं बटुकों ने संकल्प लिया। विधि-विधान से पंचांग पूजन के बाद बटुकों का स्नानादि और छौरकर्म कराया गया। पीले वस्त्रों में बटुकों ने वैदिक रीति-रिवाज से यज्ञोपवीत धारण किया। मुख्य आचार्य पं. शिवपूजन पांडेय, सह-आचार्य पं. रामानंद पांडेय के आचार्यत्व में 111 वैदिक ब्राह्मणों ने अनुष्ठान कराया। बटुकों ने परिजनों से भिक्षा मांगी। उन्हें गायत्री मंत्र की दीक्षा दी गई और जनेऊ धारण कराया गया। महिलाएं लोकाचार के मंगल गीत गा रही थीं।
संयोजक धर्मसंघ के महामंत्री पं. जगजीतन पांडेय ने बताया कि ब्राह्मणों में यज्ञोपवीत संस्कार के बाद ही वेद अध्ययन का प्रावधान है। इसलिए शिक्षारंभ से पूर्व यज्ञोपवीत अनिवार्य है, अन्यथा वे वेद के अध्ययन के अधिकारी नहीं होंगे।
इस मौके पर डॉ. नीलकंठ तिवारी के अलावा भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह बबलू, प्रमोद मिश्र, शैलेन्द्र किशोर पांडेय, राजमंगल पांडेय आदि मौजूद रहे। उधर, अस्सी स्थित दक्षिणामूर्ति मठ में शंकराचार्य के सानिध्य में भी सैकड़ों बटुकों का उपनयन संस्कार हुआ। अन्य मठों और मंदिरों में उपनयन संस्कार और शादियां भी हुईं।
वैदिक बटुकों को शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण शुरू
नए प्रकल्प के तहत धर्मसंघ में रहने वाले वैदिक बटुकों को शास्त्रीय संगीत का निःशुल्क प्रशिक्षण भी शुरू हुआ। विख्यात सितारवादक पं. देवव्रत मिश्र के निर्देशन में पं. शिवनाथ मिश्र म्यूजिक फाउंडेशन के कुशल प्रशिक्षकों ने बटुकों को गायन, संवादिनी और तबले का प्रशिक्षण दिया। उन्हें राग यमन में सरगम, बंदिश ‘हरि चरणन में...’ तथा भजन ‘श्रीराम चंद्र कृपालु भज मन...’ सिखाया गया। तबले पर उन्हें तीनताल में बनारस घराने का प्रसिद्ध कायदा सिखाया गया। गायन में शक्ति मिश्र, तबले पर आनंद मिश्र और कृष्णा मिश्र ने सहयोग किया। स्वागत पं. जगजीतन पांडेय ने किया।

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