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Cyber Crime: दो हजार की साइबर ठगी से 20 करोड़ रुपये के बेटिंग मॉड्यूल का खुलासा, दो ठग गिरफ्तार

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Fri, 26 Jun 2026 11:12 AM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी में महिला से दो हजार की साइबर ठगी से 20 करोड़ रुपये के बेटिंग मॉड्यूल का खुलासा हुआ। मामले में दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया गया है। 

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Varanasi police exposed ₹20 crore betting module following ₹2,000 cyber fraud case
पुलिस के गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महिला के साथ दो हजार रुपये की साइबर ठगी की जांच में बेटिंग ऐप के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। ओम वेबसाइट के बेटिंग ऐप से 20 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन का पर्दाफाश हुआ। साइबर पुलिस ने ऐप नेटवर्क को संचालित करने वाले दो ठगों दीपक सिंह और प्रवीण सिंह निवासी कानपुर नगर को दासनगर नगर कॉलोनी जगतगंज वाराणसी से गिरफ्तार किया। 

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अभियुक्तों के पास से नौ मोबाइल फोन, 12 सिम समेत अन्य सामान मिले। पुलिस ने जांच के दौरान पांच लाख रुपये होल्ड कराए। ठगी के पैसों को साइबर ठग म्यूल बैंक खातों के अलावा अन्य डिजिटल वॉलेट व थर्ड पार्टी ऐप का उपयोग कर निकासी करते थे। पूछताछ के दौरान गिरोह से जुड़े दो अन्य नाम दिलावर और प्रवीण उर्फ अक्षय का नाम आया। पुलिस अब इनकी तलाश में जुट गई है।
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एसीपी साइबर क्राइम विदुष सक्सेना ने बताया कि प्रतिबिंब पोर्टल पर एक महिला ने दो हजार रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि उसका इंस्टाग्राम आईडी हैक कर क्यूआर कोड से पैसे लिए गए। शिकायत के आधार पर एक नंबर प्रकाश में आया। 
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जिसकी जांच की गई तो पता चला कि ठगी का पैसा ओम वेबसाइट बुक ऐप के माध्यम गया है। पुलिस नंबर के आधार पर दोनों साइबर ठगों के पास पहुंची। जांच के दौरान सामने आया कि साइबर ठगी का पैसा इस ऐप के माध्यम से खपाया जा रहा है। टेलीग्राम, व्हाट्सएप पर एडमिन वर्चुअल नंबर से जुड़े हैं। रोज पांच लाख रुपये का ट्रांजेक्शन होता था।

बेटिंग में फर्जी खातों और क्यूआर कोड का इस्तेमाल
जांच में सामने आया है कि धनराशि जमा कराने के लिए विभिन्न बैंक खातों और मर्चेंट क्यूआर कोड का उपयोग किया गया। वहीं, जीत-हार के आधार पर भुगतान (पे-आउट) करने के लिए अलग-अलग पोर्टलों और बैंक खातों का सहारा लिया जाता था। आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी या अन्य व्यक्तियों के नाम पर जारी सिम कार्ड और म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। कार्रवाई के दौरान बरामद मोबाइल फोन की जांच में बेटिंग पैनल, यूजर आईडी, बैंकिंग विवरण, भुगतान संबंधी स्क्रीनशॉट समेत कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका, लेन-देन के स्रोत और अवैध कमाई के पूरे तंत्र की जांच कर रही है।

दिन का पांच लाख का ट्रांजेक्शन, तीन साल से सक्रिय रहा गिरोह
सोशल साइट पर बाकायदा विज्ञापन में आरोपी पैसे खर्च करते थे। लोगों को मुनाफे का लालच देकर आकर्षित किया जाता था। टेलीग्राम, व्हाट्सएप ग्रुप पर वर्चुअल नंबर से एडमिन लोगों को जोड़ते थे और रोज पांच लाख की उगाही करते थे। साइबर ठगों से संपर्क होने से ठगी का पैसा भी लेते और उन्हें म्यूल खातों के साथ ही थर्ड पार्टी ऐप से निकासी कर लेते थे। पूछताछ में गिरोह के तार चार प्रदेशों से जुड़े हैं। आरोपियों ने सैकड़ों लोगों से ठगी की है। वाराणसी में ये मॉड्यूल तीन साल से सक्रिय रहा।

23 दिन में दूसरा बड़ा खुलासा
पुलिस ने 23 दिनों में ये दूसरा बड़ा खुलासा किया। एक जून को साइबर पुलिस ने आईपीएल सट्टे में निवेश का लालच देकर बेटिंग ऐप से दो लाख लोगों से 700 करोड़ रुपये की ठगी की थी। इस मामले में पुलिस ने 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों में बीटेक, प्रबंधन की पढ़ाई कर चुके आरोपी शामिल थे। गिरोह ने एक महीने के अंदर ही 25 करोड़ रुपये लगवाए थे। 
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