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UP: IPL के बहाने युवाओं को बनाया जा रहा था रियल इस्टेट का खिलाड़ी, बेटिंग से 700 करोड़ की ठगी; पुलिस अलर्ट

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 14 Jun 2026 11:59 AM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी में आईपीएल बेटिंग के नाम पर युवाओं को रियल इस्टेट निवेश का झांसा देकर करीब 700 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि मलिक फर्म के माध्यम से लोगों को बड़े मुनाफे का लालच दिया गया। मामले की जांच साइबर क्राइम पुलिस कर रही है और कई अहम दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।

Youths being groomed real estate players under guise IPL 700 crore fraud linked betting police alert
बेटिंग से 700 करोड़ की ठगी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

UP News: मुंबई की मलिक फर्म आईपीएल के बहाने युवाओं को रियल इस्टेट का खिलाड़ी बनाने के प्रयास में थी। इसका मुख उद्देश्य ब्लैक मनी को ह्वाइट करना था। फर्म से जुड़कर आईपीएल बेटिंग के बहाने देशभर के लगभग दो लाख लोगों से 700 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह की जांच अब साइबर क्राइम थाने की पुलिस कर रही है। पहले मामले की जांच कैंट पुलिस एसओजी कर रही थी। 



स्थानीय स्तर पर तीन राज्यों के 13 युवाओं को चर्चित सेलिब्रिटी के एआई जनरेटेड वीडियो बनाकर फेसबुक और इंस्टाग्राम पर वायरल करने तथा हवाला की रकम को रियल इस्टेट में खपाने की जिम्मेदारी दी गई थी। लखनऊ, नोएडा, वाराणसी समेत अन्य शहरों में मलिक फर्म ने रियल इस्टेट में 50 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। 

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जेल भेजे गए आरोपियों को आईपीएल शुरू होने से पहले मुंबई में बाकायदा प्रशिक्षण दिया गया था। ठगी की रकम आरोपियों तक हवाला के जरिए पहुंचाई जाती थी।  पिछले महीने करीब 30 करोड़ रुपये हवाला के माध्यम से आरोपियों तक पहुंचाए गए।

पुलिस के अनुसार ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए क्रिप्टोकरेंसी और रियल इस्टेट में निवेश कराया जा रहा था। पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों ने मलिक फर्म के मुख्य संचालकों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी। उनका कहना है कि उन्हें केवल वीडियो कॉल और मैसेज के जरिए काम आगे बढ़ाने के निर्देश मिलते थे।

31 मई को 13 आरोपियों को किया गिरफ्तार : 31 मई को आईपीएल फाइनल की रात कैंट पुलिस और एसओजी ने टकटकपुर स्थित एक अपार्टमेंट में छापा मारकर 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि यह अंतरराज्यीय गिरोह सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर लोगों को आईपीएल सट्टेबाजी का लालच देता था। चर्चित चेहरों के एआई जेनरेटेड वीडियो बनाकर लोगों का भरोसा जीता जाता था। सभी आरोपी फिलहाल जेल में हैं।

मुंबई में मिला था प्रशिक्षण
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि मुंबई, राजस्थान और हरियाणा के आरोपियों को कपसेठी के दिलावरपुर निवासी रितेश दिवाकर शुक्ला और उसका करीबी चोलापुर के करमा निवासी रवि यादव लीड कर रहे थे। रितेश अपने पांच साथियों के साथ मुंबई में एक महीने तक प्रशिक्षण लेकर लौटा था। 

वहां उन्हें यह बताया गया था कि ठगी की रकम को कैसे और कहां इस्तेमाल करना है। साइबर क्राइम पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, व्हाट्सएप चैट और ईमेल डेटा को रिकवर करने में जुटी है। अधिकारियों को आशंका है कि मुंबई के मुख्य गिरोह तक पहुंचने की यह सबसे अहम कड़ी साबित हो सकती है। इस मामले में मुंबई पुलिस से भी मदद ली जाएगी।

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हवाला नेटवर्क कई राज्यों तक फैला
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि पूर्वांचल के लगभग 50 हजार लोगों से बेटिंग के नाम पर 50 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कराया गया था। इसके बदले आरोपियों को छह प्रतिशत कमीशन मिलता था। हवाला नेटवर्क के जरिए रकम मुंबई, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात और पश्चिम बंगाल तक पहुंचाई जाती थी। टेलीग्राम पर सक्रिय मलिक फर्म के डिजिटल नेटवर्क और पते की भी जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि ठगी की वास्तविक रकम 700 करोड़ से भी अधिक हो सकती है।
 

13 आरोपियों को जेल भेजा गया। इनके और परिजनों के बैंक खातों को भी खंगाला गया। मुंबई की मलिक फर्म की जांच शुरू हो चुकी है। साइबर क्राइम पुलिस को इसकी जांच सौंपी गई है। - आलोक प्रियदर्शी, अपर पुलिस आयुक्त (अपराध)

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