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Almora News: रंग लाई पांच साल की मेहनत...बचपन के सपने ने भरी उड़ान
Sat, 08 Aug 2026 11:15 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sat, 08 Aug 2026 11:15 PM IST
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रवि
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अल्मोड़ा। पहाड़ के युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने बचपन के सपने को हकीकत में बदलते हुए सिंगल सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप तैयार किया है। धौलादेवी विकासखंड के काफलीखान निवासी रवि ने सीमित संसाधनों के बीच देश-विदेश से जरूरी उपकरण जुटाकर ‘हपिडा स्काइनेक्स’ नाम का यह फ्लाइंग व्हीकल तैयार किया है। रवि का दावा है कि इसका डिजाइन और निर्माण उन्होंने खुद किया है। शनिवार को अल्मोड़ा के एचएनबी स्टेडियम में उन्होंने इसका दोबारा परीक्षण किया। परीक्षण को देखने के लिए लोगों में कौतुहल बना रहा।
बचपन से था उड़ने का जुनून
खास बातचीत में रवि ने बताया कि उन्हें बचपन से ही उड़ने वाली मशीनें बनाने का शौक था। इसी जुनून के चलते वर्ष 2015 में उन्होंने सिंगल सीटर हेलीकॉप्टर भी तैयार किया था। हालांकि, उसमें कुछ तकनीकी कमियां थीं। हेलीकॉप्टर ने उड़ान तो भरी लेकिन परीक्षण सफल नहीं हो सका। इसके बाद रवि के मन में विचार आया कि आखिर परिवहन के लिए हमेशा सड़कों पर ही निर्भर क्यों रहा जाए। जिस तरह आज लोगों के पास कार और बाइक हैं, उसी तरह भविष्य में फ्लाइंग व्हीकल भी लोगों के व्यक्तिगत परिवहन का साधन बन सकता है। इसी सोच और अनुभव का नतीजा ‘हपिडा स्काइनेक्स’ के रूप में सामने आया।
पांच साल की मेहनत लगी
रवि के मुताबिक, इस फ्लाइंग व्हीकल को तैयार करने में उन्हें करीब पांच साल की मेहनत लगी है। उनका दावा है कि यह करीब डेढ़ किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है और इसकी अधिकतम गति 150 किलोमीटर प्रति घंटा है। पूरी तरह इलेक्ट्रिक इस वाहन को एक बार चार्ज करने पर करीब एक घंटे तक उड़ाया जा सकता है।
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आपात स्थिति में पैराशूट से लैंडिंग का विकल्प
रवि ने बताया कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फ्लाइंग व्हीकल में पैराशूट का विकल्प भी रखा गया है। किसी आपात स्थिति में पैराशूट के जरिये सुरक्षित लैंडिंग की जा सकती है। उन्होंने बताया कि लंबी दूरी की उड़ान के लिए डीजीसीए से अनुमति लेने की प्रक्रिया चल रही है। अनुमति मिलने के बाद उनका लक्ष्य इस वाहन से अल्मोड़ा से हल्द्वानी तक उड़ान भरने का है।
इंटरनेट से सीखी तकनीक, चीन से लाए उपकरण
रवि का कहना है कि उन्होंने तकनीक की पढ़ाई किसी विशेष संस्थान से नहीं की है। इंटरनेट के माध्यम से अलग-अलग तकनीकी विषयों की जानकारी हासिल की और उसी के आधार पर अपने प्रयोग आगे बढ़ाए। करीब पांच साल की मेहनत के बाद ‘हपिडा स्काइनेक्स’ का प्रोटोटाइप तैयार किया गया। करीब दो साल पहले चीन की यात्रा के दौरान रवि ने वहां हो रहे तकनीकी प्रयोगों को देखा और वाहन के लिए कुछ जरूरी उपकरण लेकर आए। वाहन का इंजन तमिलनाडु से मंगाया गया जबकि इसका निर्माण उन्होंने अपने घर पर ही किया।
जिला प्रशासन की मौजूदगी में किया परीक्षण
रवि ने शुक्रवार देर रात एचएनबी स्टेडियम में भी फ्लाइंग व्हीकल का परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी अंशुल सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के की मौजूदगी में सुरक्षा के आवश्यक इंतजामों के बीच वाहन का परीक्षण किया गया।
सीएम ने वीडियो कॉल पर की रवि से बात
रवि टम्टा के इस प्रयोग की मुख्यमंत्री ने भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉल के माध्यम से रवि से बातचीत कर उनकी उपलब्धि की जानकारी ली। उन्होंने इसे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में ऐसे प्रयोग नई संभावनाओं को जन्म देते हैं। मुख्यमंत्री ने रवि को उनके काम को आगे बढ़ाने में हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिया।
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बचपन से था उड़ने का जुनून
खास बातचीत में रवि ने बताया कि उन्हें बचपन से ही उड़ने वाली मशीनें बनाने का शौक था। इसी जुनून के चलते वर्ष 2015 में उन्होंने सिंगल सीटर हेलीकॉप्टर भी तैयार किया था। हालांकि, उसमें कुछ तकनीकी कमियां थीं। हेलीकॉप्टर ने उड़ान तो भरी लेकिन परीक्षण सफल नहीं हो सका। इसके बाद रवि के मन में विचार आया कि आखिर परिवहन के लिए हमेशा सड़कों पर ही निर्भर क्यों रहा जाए। जिस तरह आज लोगों के पास कार और बाइक हैं, उसी तरह भविष्य में फ्लाइंग व्हीकल भी लोगों के व्यक्तिगत परिवहन का साधन बन सकता है। इसी सोच और अनुभव का नतीजा ‘हपिडा स्काइनेक्स’ के रूप में सामने आया।
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पांच साल की मेहनत लगी
रवि के मुताबिक, इस फ्लाइंग व्हीकल को तैयार करने में उन्हें करीब पांच साल की मेहनत लगी है। उनका दावा है कि यह करीब डेढ़ किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है और इसकी अधिकतम गति 150 किलोमीटर प्रति घंटा है। पूरी तरह इलेक्ट्रिक इस वाहन को एक बार चार्ज करने पर करीब एक घंटे तक उड़ाया जा सकता है।
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आपात स्थिति में पैराशूट से लैंडिंग का विकल्प
रवि ने बताया कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फ्लाइंग व्हीकल में पैराशूट का विकल्प भी रखा गया है। किसी आपात स्थिति में पैराशूट के जरिये सुरक्षित लैंडिंग की जा सकती है। उन्होंने बताया कि लंबी दूरी की उड़ान के लिए डीजीसीए से अनुमति लेने की प्रक्रिया चल रही है। अनुमति मिलने के बाद उनका लक्ष्य इस वाहन से अल्मोड़ा से हल्द्वानी तक उड़ान भरने का है।
इंटरनेट से सीखी तकनीक, चीन से लाए उपकरण
रवि का कहना है कि उन्होंने तकनीक की पढ़ाई किसी विशेष संस्थान से नहीं की है। इंटरनेट के माध्यम से अलग-अलग तकनीकी विषयों की जानकारी हासिल की और उसी के आधार पर अपने प्रयोग आगे बढ़ाए। करीब पांच साल की मेहनत के बाद ‘हपिडा स्काइनेक्स’ का प्रोटोटाइप तैयार किया गया। करीब दो साल पहले चीन की यात्रा के दौरान रवि ने वहां हो रहे तकनीकी प्रयोगों को देखा और वाहन के लिए कुछ जरूरी उपकरण लेकर आए। वाहन का इंजन तमिलनाडु से मंगाया गया जबकि इसका निर्माण उन्होंने अपने घर पर ही किया।
जिला प्रशासन की मौजूदगी में किया परीक्षण
रवि ने शुक्रवार देर रात एचएनबी स्टेडियम में भी फ्लाइंग व्हीकल का परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी अंशुल सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के की मौजूदगी में सुरक्षा के आवश्यक इंतजामों के बीच वाहन का परीक्षण किया गया।
सीएम ने वीडियो कॉल पर की रवि से बात
रवि टम्टा के इस प्रयोग की मुख्यमंत्री ने भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉल के माध्यम से रवि से बातचीत कर उनकी उपलब्धि की जानकारी ली। उन्होंने इसे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में ऐसे प्रयोग नई संभावनाओं को जन्म देते हैं। मुख्यमंत्री ने रवि को उनके काम को आगे बढ़ाने में हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिया।