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UK: मत्स्य किसानों के लिए राहत...आईसीएआर-सीआईसीएफआर ने 'ओवाक्वा' हार्मोन विकसित किया, बढ़ेगा बीज उत्पादन

Fri, 24 Jul 2026 11:19 AM IST
Heera हरीश चंद्र पांडे
हरीश चंद्र पांडे Published by: Heera Updated Fri, 24 Jul 2026 11:19 AM IST
सार

केंद्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान भीमताल ने मछलियों में कृत्रिम प्रजनन (बीज उत्पादन) के लिए ओवाक्वा नामक एक नया इंजेक्टेबल हार्मोन विकसित किया है। यह तकनीक देश में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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Ovaqua hormone will increase farmers income along with fish breeding in bhimatl
केंद्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान भीमताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मत्स्य पालन से जुड़े किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। केंद्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान भीमताल (आईसीएआर-सीआईसीएफआर) ने मछलियों में कृत्रिम प्रजनन (बीज उत्पादन) के लिए ओवाक्वा नामक एक नया इंजेक्टेबल हार्मोन विकसित किया है। यह तकनीक देश में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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भीमताल सीआईसीएफआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ख. विक्टोरिया चानू और डॉ. डी ठाकुरिया ने तीन साल के शोध के बाद ओवाक्वा हार्मोन को विकसित करने में सफलता पाई है। दोनों वैज्ञानिकों का दावा है कि इसके इस्तेमाल से मत्स्य पालन से जुड़े किसानों की मछलियों के बीज के उत्पादन और किसानों की आजीविका में वृद्धि होगी। देश में आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अधिकतर मछलियां वर्ष के केवल एक निश्चित मौसम में ही प्रजनन करती हैं। नियंत्रित परिस्थितियों में इनके प्राकृतिक प्रजनन की सफलता कम रहती है जिससे पर्याप्त मात्रा में मत्स्य बीज उपलब्ध नहीं हो पाता है। वर्तमान में उपलब्ध कई कृत्रिम हार्मोन के उपयोग में गाढ़ापन, इंजेक्शन लगाने में कठिनाई, प्रजनक मछलियों में तनाव और अपेक्षित परिणाम जैसी समस्याएं सामने आती रही है। आईसीएआर-सीआईसीएफआर की ओर से विकसित ओवाक्वा एक उच्च शुद्धता वाला हार्मोन है। इसे आसानी से इंजेक्ट किया जा सकता है। उत्तराखंड, गुजरात, जम्मू कश्मीर, असोम, मेघालय और मणिपुर में किए गए प्रयोगों में इसने रोहू, कतला, मृगल, ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प और कालाबांस जैसी मछलियों में सफल प्रजनन कराया। इसके उपयोग से अंडे देने, निषेचन और हैचिंग की सफलता अधिक रही है। प्रजनन मछलियों पर तनाव और दुष्प्रभाव बेहद कम पाए गए हैं। 

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मत्स्य बीज उत्पादन में होगी वृद्धि
ओवाक्वा हार्मोन के उपयोग से गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता बढ़ने के साथ हैचरी संचालन अधिक प्रभावी होगा और मत्स्य किसानों को समय पर बीज उपलब्ध हो पाएगा। संस्थान की इस तकनीक को वर्ष 2025 में आईसीएआर प्रौद्योगिकी प्रमाणपत्र दिया गया। साथ ही 16 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय कृषि एवं कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने इसका औपचारिक लोकार्पण किया।

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सीआईसीएफआर के वैज्ञानिकों ने ओवाक्वा हार्मोन विकसित किया है। ओवाक्वा के प्रयोग से मछलियों के बीज उत्पादन में वृद्धि होने के साथ किसानों की आजीविका भी बेहतर होगी। साथ ही मत्स्य पालन को भी बढ़ावा मिलेगा। डॉ. अमित पांडे, निदेशक, सीआईसीएफआर

 

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