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Pithoragarh News: बच्चों को इलाज मिलना हुआ बंद, भटक रहे हैं परिजन
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 23 Jan 2026 11:27 PM IST
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जिला अस्पताल में बीमार बच्चों का इलाज करते सामान्य चिकित्सक। संवाद
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं आ रही हैं। जिले में बच्चों को इलाज मिलना बंद हो गया है। एकमात्र बाल रोग विशेषज्ञ के अवकाश पर जाने से बीमार बच्चों और अभिभावकों की दिक्कत बढ़ गई है। हालात यह हैं कि अभिभावक अपने बच्चों के इलाज के लिए भटक रहे हैं।
सीमांत जिले में जिला अस्पताल को छोड़कर किसी भी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। सेवा विस्तार के जरिये तैनात एकमात्र बाल रोग विशेषज्ञ पर नवजातों के साथ ही बीमार और भर्ती बच्चों की जांच और इलाज की जिम्मेदारी है। बीते बृहस्पतिवार को बाल रोग विशेषज्ञ लंबे अवकाश पर चले गए। ऐसे में जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में बच्चों को इलाज मिलना बंद हो गया है। जिला अस्पताल में हर रोज विभिन्न हिस्सों से 80 से अधिक बच्चे इलाज के लिए पहुंचते हैं। शुक्रवार को भी अभिभावक अपने बीमार बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। संवाद न्यूज एजेंसी ने बच्चों और अभिभावकों की दिक्कत जानने के लिए पड़ताल की। सुबह से ही अभिभावक बीमार बच्चों को लेकर विशेषज्ञ के आने का इनके कक्ष के बाहर इंतजार करते रहे। बाद में इन्हें मालूम चला कि अब विशेषज्ञ की जगह सामान्य चिकित्सक बच्चों का इलाज कराएंगे तो कई अभिभावकों ने निजी अस्पतालों का रुख किया। कई अभिभावकों को मजबूरी में सामान्य चिकित्सक से बच्चों का इलाज कराना पड़ा। संवाद
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जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञों के दो पद स्वीकृत, एक भी स्थायी नहीं
सीमांत जिले में बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां किसी भी अस्पताल में एक भी स्थायी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। जिले में जिला, महिला सहित अन्य सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ के आठ पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष कहीं भी स्थायी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल में भी सेवा विस्तार के जरिए बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। इन पर पूरे जिले के बच्चों की जिम्मेदारी है। अब इनके अवकाश पर जाने से पूरा जिला बाल रोग विशेषज्ञ विहीन हो गया है।
केस एक
कनालीछीना की पुष्पा देवी बुखार से तप रहे अपने बच्चे के इलाज के लिए सुबह से ही बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष के बाहर इंतजार करती रहीं। जब उन्हें मालूम चला कि बाल रोग विशेषज्ञ छुट्टी पर हैं तो उन्होंने निजी अस्पताल का रुख किया।
केस दो
मुवानी क्षेत्र के रमेश सिंह निमोनिया से जूझ रहे आठ साल के बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। बाल रोग विशेषज्ञ न होने से उन्हें सामान्य चिकित्सक से बच्चे की जांच करानी पड़ी।
कोट
बाल रोग विशेषज्ञ अवकाश पर हैं। इससे दिक्कत बढ़ गई है। सामान्य चिकित्सक को बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी दी गई। हर बीमार बच्चे को बेहतर इलाज मिले इसके लिए अस्पताल प्रबंधन गंभीर है। - डॉ. एमसी रजबार, प्रभारी पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़
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जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञों के दो पद स्वीकृत, एक भी स्थायी नहीं
सीमांत जिले में बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां किसी भी अस्पताल में एक भी स्थायी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। जिले में जिला, महिला सहित अन्य सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ के आठ पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष कहीं भी स्थायी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल में भी सेवा विस्तार के जरिए बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। इन पर पूरे जिले के बच्चों की जिम्मेदारी है। अब इनके अवकाश पर जाने से पूरा जिला बाल रोग विशेषज्ञ विहीन हो गया है।
केस एक
कनालीछीना की पुष्पा देवी बुखार से तप रहे अपने बच्चे के इलाज के लिए सुबह से ही बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष के बाहर इंतजार करती रहीं। जब उन्हें मालूम चला कि बाल रोग विशेषज्ञ छुट्टी पर हैं तो उन्होंने निजी अस्पताल का रुख किया।
केस दो
मुवानी क्षेत्र के रमेश सिंह निमोनिया से जूझ रहे आठ साल के बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। बाल रोग विशेषज्ञ न होने से उन्हें सामान्य चिकित्सक से बच्चे की जांच करानी पड़ी।
कोट
बाल रोग विशेषज्ञ अवकाश पर हैं। इससे दिक्कत बढ़ गई है। सामान्य चिकित्सक को बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी दी गई। हर बीमार बच्चे को बेहतर इलाज मिले इसके लिए अस्पताल प्रबंधन गंभीर है। - डॉ. एमसी रजबार, प्रभारी पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़

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