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Pithoragarh News: उत्तराखंड में मनरेगा मजदूरों के लिए मजदूरी का सूखा

संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Fri, 23 Jan 2026 11:27 PM IST
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MGNREGA workers face wage drought in Uttarakhand
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पिथौरागढ़। दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा में मजदूरों के लिए मजदूरी का सूखा पड़ा है। पर्वतीय प्रदेश उत्तराखंड में यह योजना अपने नाम के मुताबिक गारंटी को पूरा नहीं कर पा रही है। योजना के पोर्टल से मिले आंकड़े इसकी हकीकत बयां कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 10.20 लाख परिवारों को जाॅब कार्ड जारी कर रोजगार की गारंटी दी गई है। इससे उलट इस वित्तीय वर्ष में अब तक सिर्फ 0.39 प्रतिशत यानि 4043 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिल सका है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में सिर्फ दो महीने नौ दिन शेष हैं। इस समयावधि में रोजगार मिलने की गारंटी कितने मजदूरों के लिए सही साबित होगी यह सवाल चर्चाओं में है। संवाद
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मजदूरी कम, अन्य जगह काम तलाशने की मजबूरी
महंगाई के दौर में मनरेगा के तहत मजदूरों को अन्य जगह काम करने के मुकाबले 50 फीसदी से भी कम मजदूरी मिलती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में योजना के तहत मजदूरी 237 रुपये थी, जो 2025-26 में 15 रुपये बढ़ाई गई। वहीं बाहर काम करने पर मजदूरी 600 रुपए तक आसानी से मिल रही है। संवाद
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57 फीसदी है महिलाओं की भागीदारी
राज्य में मनरेगा में काम करने वालों में महिलाओं की भागीदारी अधिक है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी 56.53 प्रतिशत है। मनरेगा में वित्तीय वर्ष 2023-24 में महिलाओं की भागीदारी 56.85, वर्ष 2024-25 में 55.93 प्रतिशत रही। वहीं 2025-26 में अब तक मनरेगा में महिलाओं की हिस्सेदारी 56.82 फीसदी है।
इस वित्तीय वर्ष जिलेवार 100 दिन का रोजगार पाने वाले परिवार(19 जनवरी तक)
जिला परिवार
पिथौरागढ़ 245
अल्मोड़ा 190
बागेश्वर 204
चमोली 136
देहरादून 878
हरिद्वार 451
नैनीताल 70
पौड़ी 273
रुद्रप्रयाग 219
टिहरी 149
यूएस नगर 373
उत्तरकाशी 812
चंपावत 44
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कोट
केंद्र सरकार से मिले निर्देश के अनुसार मनरेगा के तहत किसी भी ग्राम पंचायत में 10 कार्य पूरे होने के बाद भी नए काम शुरू किए जा सकते हैं। सरकार से मिले दिशा-निर्देशों के तहत ही योजना को अंजाम तक पहुंचाया जा रहा है। श्रमिकों की इच्छा के मुताबिक इन्हें काम देने के लिए शासन-प्रशासन गंभीर है।- डॉ. दीपक सैनी, सीडीओ, पिथौरागढ़
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