{"_id":"6973b551494a723980060c3c","slug":"in-pithoragarh-43-youths-got-jobs-by-doing-deled-with-fake-certificates-pithoragarh-news-c-230-1-alm1001-137417-2026-01-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pithoragarh News: पिथौरागढ़ में फर्जी प्रमाणपत्र से डीएलएड कर 43 युवाओं ने हथिया ली नौकरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pithoragarh News: पिथौरागढ़ में फर्जी प्रमाणपत्र से डीएलएड कर 43 युवाओं ने हथिया ली नौकरी
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 23 Jan 2026 11:22 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
पिथौरागढ़। यूएसनगर, नैनीताल के बाद अब सीमांत जिले पिथौरागढ़ में भी सहायक अध्यापकों की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां फर्जी प्रमाणपत्र से डीएलएड कर 43 युवाओं ने सहायक अध्यापक पद हथिया लिया। मामला खुलने के बाद विभाग ने इन फर्जी सहायक अध्यापकों को नोटिस जारी किया है। फर्जी दस्तावेजों के दम पर शिक्षकों की नियुक्ति होने से अन्य प्रशिक्षित निराश और मायूस हैं। अब इन्हें शिक्षा विभाग की कार्रवाई का इंतजार है।
उत्तराखंड में वर्ष 2024 में प्राथमिक शिक्षा में डीएलएड प्रशिक्षितों के लिए सहायक अध्यापक की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई। पिथौरागढ़ जिले में भी 326 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति हुई। इस भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आया है। 43 सहायक अध्यापक ऐसे हैं जो सिस्टम की आखों में धूल झोंककर भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए और मेरिट सूची में जगह बनाकर फर्जी दस्तावेजों के जरिये नौकरी पा ली। इन अभ्यर्थियों ने यूपी, हरियाणा, मध्यप्रदेश, दिल्ली और जम्मू कश्मीर से डीएलएड किया। इसके लिए इन्होंने इन राज्यों का स्थायी निवास प्रमाणपत्र लगाया। जब उत्तराखंड में भर्ती निकली तो ये लोग फर्जी तरीके से कागजों में उत्तराखंड के निवासी बन गए। जाली स्थायी निवास प्रमाणपत्र के आधार पर इन्हें यहां सहायक अध्यापक की नौकरी मिल गई और इन्होंने यहां के मूल निवासी होनहार युवाओं के हक पर डाका डालने का काम किया है। विभाग ने आंख बंद कर इन्हें शपथपत्र के आधार पर नियुक्ति दे दी गई।
नौकरी पाने वाले दो राज्यों के स्थायी निवासी
अन्य राज्यों से डीएलएड करने के लिए संबंधित राज्य का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार ने इसका शासनादेश जारी किया था। सीमांत क्षेत्र में बाहरी क्षेत्रों के 43 अभ्यर्थियों में से 15 ने उत्तर प्रदेश से डीएलएड की डिग्री हासिल की है। ऐसे में साफ है कि इन अभ्यर्थियों ने पहले खुद को यूपी का निवासी बताया और नौकरी पाने के लिए उत्तराखंड के निवासी बन गए।
दो राज्यों का स्थायी प्रमाणपत्र जारी होना सिस्टम पर सवाल
फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने वाले सभी सहायक अध्यापक धारचूला विकासखंड में तैनात हैं। साफ है कि इन्होंने डीएलएड करने और नौकरी पाने के लिए दो राज्यों का स्थायी निवास प्रमाणपत्र हासिल किया। दो राज्यों का स्थायी निवासी प्रमाणपत्र जारी होना पूरे सिस्टम पर सवाल उठा रहा है।
कश्मीर के डीएलएड अभ्यर्थी को भी मिली नियुक्ति
राज्य में हजारों बेरोजगार डीएलएड प्रशिक्षितों में शिक्षा विभाग को योग्य अभ्यर्थी नहीं मिला। विभाग ने जम्मू कश्मीर से डीएलएड किए एक अभ्यर्थी को सीमांत के दूरस्थ क्षेत्र के स्कूल में सहायक अध्यापक की नौकरी दे दी।
कोट
बाहरी राज्यों के लोगों को नौकरी मिलने की जानकारी है। सभी नोटिस जारी किया गया है। अर्हता साबित न कर पाने की स्थिति में ऐसे लोगों के विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्यवाही की जाएगी। - तरुण कुमार पंत, प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी, पिथौरागढ़
Trending Videos
उत्तराखंड में वर्ष 2024 में प्राथमिक शिक्षा में डीएलएड प्रशिक्षितों के लिए सहायक अध्यापक की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई। पिथौरागढ़ जिले में भी 326 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति हुई। इस भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आया है। 43 सहायक अध्यापक ऐसे हैं जो सिस्टम की आखों में धूल झोंककर भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए और मेरिट सूची में जगह बनाकर फर्जी दस्तावेजों के जरिये नौकरी पा ली। इन अभ्यर्थियों ने यूपी, हरियाणा, मध्यप्रदेश, दिल्ली और जम्मू कश्मीर से डीएलएड किया। इसके लिए इन्होंने इन राज्यों का स्थायी निवास प्रमाणपत्र लगाया। जब उत्तराखंड में भर्ती निकली तो ये लोग फर्जी तरीके से कागजों में उत्तराखंड के निवासी बन गए। जाली स्थायी निवास प्रमाणपत्र के आधार पर इन्हें यहां सहायक अध्यापक की नौकरी मिल गई और इन्होंने यहां के मूल निवासी होनहार युवाओं के हक पर डाका डालने का काम किया है। विभाग ने आंख बंद कर इन्हें शपथपत्र के आधार पर नियुक्ति दे दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
नौकरी पाने वाले दो राज्यों के स्थायी निवासी
अन्य राज्यों से डीएलएड करने के लिए संबंधित राज्य का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार ने इसका शासनादेश जारी किया था। सीमांत क्षेत्र में बाहरी क्षेत्रों के 43 अभ्यर्थियों में से 15 ने उत्तर प्रदेश से डीएलएड की डिग्री हासिल की है। ऐसे में साफ है कि इन अभ्यर्थियों ने पहले खुद को यूपी का निवासी बताया और नौकरी पाने के लिए उत्तराखंड के निवासी बन गए।
दो राज्यों का स्थायी प्रमाणपत्र जारी होना सिस्टम पर सवाल
फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने वाले सभी सहायक अध्यापक धारचूला विकासखंड में तैनात हैं। साफ है कि इन्होंने डीएलएड करने और नौकरी पाने के लिए दो राज्यों का स्थायी निवास प्रमाणपत्र हासिल किया। दो राज्यों का स्थायी निवासी प्रमाणपत्र जारी होना पूरे सिस्टम पर सवाल उठा रहा है।
कश्मीर के डीएलएड अभ्यर्थी को भी मिली नियुक्ति
राज्य में हजारों बेरोजगार डीएलएड प्रशिक्षितों में शिक्षा विभाग को योग्य अभ्यर्थी नहीं मिला। विभाग ने जम्मू कश्मीर से डीएलएड किए एक अभ्यर्थी को सीमांत के दूरस्थ क्षेत्र के स्कूल में सहायक अध्यापक की नौकरी दे दी।
कोट
बाहरी राज्यों के लोगों को नौकरी मिलने की जानकारी है। सभी नोटिस जारी किया गया है। अर्हता साबित न कर पाने की स्थिति में ऐसे लोगों के विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्यवाही की जाएगी। - तरुण कुमार पंत, प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी, पिथौरागढ़

कमेंट
कमेंट X