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Rishikesh News: कमजोर विवेचना से आरोपी पति जमानत पर रिहा
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Mon, 22 Jun 2026 01:51 AM IST
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पुलिस की कमजोर विवेचना का लाभ दहेज हत्या के आरोपी पति को मिला। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कंवर अमिन्नदर सिंह की अदालत ने दहेज हत्या के आरोपी पति को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने माना कि मामले में विवेचना गंभीरता से नहीं बल्कि सरसरी ताैर पर की गई है। आरोपी बीते अप्रैल से जिला कारागार में न्यायिक अभिरक्षा में बंद था।
आरोपी विक्की निवासी गंजालपुर, थाना मंडावर, जिला बिजनौर (उत्तर प्रदेश) ने जमानत के लिए प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कंवर अमिन्नदर सिंह की अदालत में प्रार्थना पत्र दायर किया था। बीते शुक्रवार को जमानत पर दोनों पक्षों की बहस हुई। मामले में गवाह अदालत में यह भी नहीं बता पाए कि मृतका मेघा व विक्की के बीच लड़ाई झगड़ा किस कारण होता था। विवेचना के दौरान मृतका मेघना के पिता ने साक्ष्य के तौर पर जो ऑडियो पैन ड्राइव पुलिस को उपलब्ध कराया था, पुलिस ने उसे जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भी नहीं भेजा। केस डायरी के अनुसार जिस समय घटना होनी बताई गई, उस वक्त आरोपी के घर पर न होने का उल्लेख किया गया है। अदालत ने माना कि इस मामले में कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिनके संबंध में स्थिति विवेचना से स्पष्ट नहीं हो पाई है। अदालत ने माना कि विवेचना सरसरी तौर पर की गई है। इस कारण अदालत ने आरोपी विक्की को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।
क्या था मामला
रायवाला क्षेत्र के छिद्दरवाला निवासी वेदपाल ने बीते 30 मार्च को दहेज हत्या के आरोप में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी मेघा की शादी साढ़े तीन साल पहले विक्की निवासी गंजालपुर, थाना मंडावर, जिला बिजनौर (उत्तर प्रदेश) से हुई थी। शादी के बाद से ही पति विक्की, सास और ससुर दहेज की मांग के लिए मेघा को प्रताड़ित करते थे। 28 मार्च की रात करीब 8:30 बजे उन्होंने मेघा का हालचाल जानने के लिए फोन किया। इस दौरान मेघा रोते हुए बोली, पापा जल्दी आ जाओ। जब वह मौके पर पहुंचे तो उनकी बेटी की हालत गंभीर थी। उन्होंने एम्बुलेंस बुलाकर उसे सरकारी अस्पताल पहुंचाया जहां चिकित्सकों ने कथित तौर पर जहर दिए जाने की आशंका जताते हुए उसे तत्काल एम्स रेफर कर दिया। उपचार के दौरान मेघा की मौत हो गई। शिकायत पर पुलिस ने मेघा के पति विक्की और सास, ससुर के खिलाफ दहेज हत्या के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले में विक्की के माता-पिता को भी आरोपी बनाया गया था लेकिन पुलिस विवेचना में उक्त दोनों के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं पाए गए।
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आरोपी विक्की निवासी गंजालपुर, थाना मंडावर, जिला बिजनौर (उत्तर प्रदेश) ने जमानत के लिए प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कंवर अमिन्नदर सिंह की अदालत में प्रार्थना पत्र दायर किया था। बीते शुक्रवार को जमानत पर दोनों पक्षों की बहस हुई। मामले में गवाह अदालत में यह भी नहीं बता पाए कि मृतका मेघा व विक्की के बीच लड़ाई झगड़ा किस कारण होता था। विवेचना के दौरान मृतका मेघना के पिता ने साक्ष्य के तौर पर जो ऑडियो पैन ड्राइव पुलिस को उपलब्ध कराया था, पुलिस ने उसे जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भी नहीं भेजा। केस डायरी के अनुसार जिस समय घटना होनी बताई गई, उस वक्त आरोपी के घर पर न होने का उल्लेख किया गया है। अदालत ने माना कि इस मामले में कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिनके संबंध में स्थिति विवेचना से स्पष्ट नहीं हो पाई है। अदालत ने माना कि विवेचना सरसरी तौर पर की गई है। इस कारण अदालत ने आरोपी विक्की को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।
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क्या था मामला
रायवाला क्षेत्र के छिद्दरवाला निवासी वेदपाल ने बीते 30 मार्च को दहेज हत्या के आरोप में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी मेघा की शादी साढ़े तीन साल पहले विक्की निवासी गंजालपुर, थाना मंडावर, जिला बिजनौर (उत्तर प्रदेश) से हुई थी। शादी के बाद से ही पति विक्की, सास और ससुर दहेज की मांग के लिए मेघा को प्रताड़ित करते थे। 28 मार्च की रात करीब 8:30 बजे उन्होंने मेघा का हालचाल जानने के लिए फोन किया। इस दौरान मेघा रोते हुए बोली, पापा जल्दी आ जाओ। जब वह मौके पर पहुंचे तो उनकी बेटी की हालत गंभीर थी। उन्होंने एम्बुलेंस बुलाकर उसे सरकारी अस्पताल पहुंचाया जहां चिकित्सकों ने कथित तौर पर जहर दिए जाने की आशंका जताते हुए उसे तत्काल एम्स रेफर कर दिया। उपचार के दौरान मेघा की मौत हो गई। शिकायत पर पुलिस ने मेघा के पति विक्की और सास, ससुर के खिलाफ दहेज हत्या के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले में विक्की के माता-पिता को भी आरोपी बनाया गया था लेकिन पुलिस विवेचना में उक्त दोनों के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं पाए गए।