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Rishikesh News: नेपालीफार्म से ब्रह्मपुरी तक रेंगते रहे वाहन

संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Updated Mon, 22 Jun 2026 01:48 AM IST
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Vehicles kept crawling from Nepali Farm to Brahmapuri
21 - चंद्रभागा पुल से कैलास गेट तक लगा वाहनों का लंबा जाम।संवाद
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चारधाम यात्रा पीक पर है और ऊपर से सप्ताहांत। नतीजा योग नगरी ऋषिकेश की सड़कें रविवार को पार्किंग जोन बन गईं। नेपालीफार्म से लेकर ब्रह्मपुरी तक करीब आठ से 10 किमी का स्ट्रेच घंटों तक रेंगता रहा। यातायात संभालने में पुलिस प्रशासन के पसीने छूट गए लेकिन जाम से राहत दिलाने वाला कोई ठोस और स्थायी प्लान न दिखने से आम जनता, तीर्थयात्री और पर्यटक दिनभर हलकान रहे।

जून माह में चारधाम यात्रियों की बाढ़ के बीच दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और यूपी से सैलानी अपने निजी वाहनों से मुनि की रेती, तपोवन, लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम में राफ्टिंग और हेंवलघाटी में कैंपिंग के लिए पहुंच रहे हैं। वीकेंड पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। एक ओर गंगा तट के कैम्प और दूसरी तरफ पार्किंग फुल। नतीजा सड़क पर ही वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। नेपालीफार्म से एंट्री लेते ही वाहन जाम में फंसना शुरू हो रहे हैं। श्यामपुर फाटक, कोयलघाटी, घाट चौक, चंद्रभागा पुल, कैलासगेट, तपोवन और ब्रह्मपुरी तक वाहन रेंग रेंगकर चल रहे हैं। कई जगह 500 मीटर चलने में 30-40 मिनट लग गए। दोपहर 12 बजे से देर रात तक यही हाल रहा। मुख्य बाजार घाट चौक पर जब वाहनों का दबाव ज्यादा बढ़ा तो पुलिस को बार-बार रूट बदलने पड़े। हरिद्वार की ओर से आने वाले वाहनों को श्यामपुर चौकी पर रोककर स्व. इंद्रमणी बडोनी चौक होते हुए गंगोत्री राजमार्ग से भद्रकाली की ओर मोड़ा गया। घाट चौक जाम होने पर कई बार वाहनों को रेलवे रोड के तंग रास्ते से निकालकर फिर बडोनी चौक की ओर भेजा गया। आईएसबीटी से चंद्रभागा पुल वाली सड़क भी सैलानियों की गाड़ियों से पट गई। यहां ऑटो, टैक्सी, कार आपस में उलझते रहे। हर बार डायवर्जन से एक जगह का बोझ हटकर दूसरी गली मोहल्ले में शिफ्ट होता रहा। नतीजन आंतरिक गलियों में भी घंटों जाम लगा रहा। दिल्ली से छह घंटे में ऋषिकेश पहुंचने वाले लोग तपोवन जाने में दो घंटे अतिरिक्त फंस गए। भीषण गर्मी, बंद एसी कार और बिना टॉयलेट के परिवारों के साथ महिलाएं बच्चे परेशान दिखे। स्थानीय व्यापारी सुनील मेहता, हर्षित गुप्ता, पवन शर्मा ने बताया कि ग्राहक तो आते हैं पर जाम में फंसकर लौट जाते हैं। हर साल चारधाम और वीकेंड पर यही कहानी दोहराई जाती है।
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