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Tehri News: कौशल को विद्यार्थियों तक पहुंचाने का काम करें शिक्षक
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Sat, 31 Jan 2026 07:15 PM IST
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डायट में पांच दिवसीय आर्ट एंड क्राफ्ट कार्यशाला का समापन
नई टिहरी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत कौशल-आधारित एवं अनुभवात्मक शिक्षण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सेवारत शिक्षकों का डायट में पांच दिवसीय आर्ट एंड क्राफ्ट कार्यशाला का समापन हो गया। कार्यशाला में कला-समेकित शिक्षा, व्यावसायिक कौशल विकास और स्थानीय सामग्री के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यशाला के क्राफ्ट सत्रों में प्रतिभागी शिक्षकों को स्थानीय प्राकृतिक संसाधन रिंगाल से विभिन्न प्रकार की उपयोगी और सजावटी वस्तुएं तैयार करना सिखाया गया। इसमें टोकरी, पेन स्टैंड सहित अन्य आकर्षक हस्तनिर्मित सामग्री बनाई गई। रिंगाल आधारित हस्तशिल्प के माध्यम से प्रतिभागियों को आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया गया।
आर्ट सत्रों के अंतर्गत विद्यालय परिसर की दीवारों को कलात्मक रूप से सजाया गया। प्रतिभागियों ने रंगों और आकृतियों के माध्यम से शिक्षा, प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को दीवार चित्रों में उकेरते हुए परिसर को जीवंत स्वरूप प्रदान किया।
राजेंद्र बड़वाल ने रिंंगाल से तैयार किए जाने वाले उत्पादों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने शिक्षकों को रिंगाल शिल्प की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया। समापन अवसर पर प्रभारी प्राचार्य देवेंद्र सिंह भंडारी ने शिक्षकों से कार्यशाला में अर्जित ज्ञान और कौशल को विद्यालयों में विद्यार्थियों तक पहुंचाने की अपील की।
इस मौके पर कार्यक्रम समन्वयक नरेश चंद कुमाई, डॉ. वीर सिंह रावत, विनोद पेटवाल, सीमा शर्मा, डॉ. मनवीर नेगी, दिव्या नौटियाल, गीता खुगसाल, माधुरी दीक्षित, डॉ. अजय जोशी, डोली आर्या, मनोज कुमार, बीना शर्मा, रजनीश नौटियाल, राधा प्रजापति, प्रीति कश्यप आदि मौजूद रहे।
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नई टिहरी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत कौशल-आधारित एवं अनुभवात्मक शिक्षण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सेवारत शिक्षकों का डायट में पांच दिवसीय आर्ट एंड क्राफ्ट कार्यशाला का समापन हो गया। कार्यशाला में कला-समेकित शिक्षा, व्यावसायिक कौशल विकास और स्थानीय सामग्री के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यशाला के क्राफ्ट सत्रों में प्रतिभागी शिक्षकों को स्थानीय प्राकृतिक संसाधन रिंगाल से विभिन्न प्रकार की उपयोगी और सजावटी वस्तुएं तैयार करना सिखाया गया। इसमें टोकरी, पेन स्टैंड सहित अन्य आकर्षक हस्तनिर्मित सामग्री बनाई गई। रिंगाल आधारित हस्तशिल्प के माध्यम से प्रतिभागियों को आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया गया।
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आर्ट सत्रों के अंतर्गत विद्यालय परिसर की दीवारों को कलात्मक रूप से सजाया गया। प्रतिभागियों ने रंगों और आकृतियों के माध्यम से शिक्षा, प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को दीवार चित्रों में उकेरते हुए परिसर को जीवंत स्वरूप प्रदान किया।
राजेंद्र बड़वाल ने रिंंगाल से तैयार किए जाने वाले उत्पादों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने शिक्षकों को रिंगाल शिल्प की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया। समापन अवसर पर प्रभारी प्राचार्य देवेंद्र सिंह भंडारी ने शिक्षकों से कार्यशाला में अर्जित ज्ञान और कौशल को विद्यालयों में विद्यार्थियों तक पहुंचाने की अपील की।
इस मौके पर कार्यक्रम समन्वयक नरेश चंद कुमाई, डॉ. वीर सिंह रावत, विनोद पेटवाल, सीमा शर्मा, डॉ. मनवीर नेगी, दिव्या नौटियाल, गीता खुगसाल, माधुरी दीक्षित, डॉ. अजय जोशी, डोली आर्या, मनोज कुमार, बीना शर्मा, रजनीश नौटियाल, राधा प्रजापति, प्रीति कश्यप आदि मौजूद रहे।
