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Uk: कार्बन क्रेडिट में बदली जाएगी 5000 एकड़ भूमि, किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए उठाया जा रहा कदम

जीवन कुमार Published by: गायत्री जोशी Updated Thu, 19 Mar 2026 11:18 AM IST
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सार

काशीपुर और जसपुर में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए कार्बन क्रेडिट योजना शुरू की गई है जिसके तहत 5000 एकड़ भूमि को बदलने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए 1500 किसानों ने आवेदन किया है।

5000 acres of land in Kashipur and Jaspur will be converted into carbon credits
सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार

काशीपुर में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए कृषि विभाग ने काशीपुर और जसपुर में कार्बन क्रेडिट योजना शुरू की है। इसके तहत अब तक 5000 एकड़ भूमि को कार्बन क्रेडिट में बदलने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए 1500 किसानों ने आवेदन किया है।

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किसान खेत में जितनी हरियाली बढ़ाएंगे और मिट्टी को स्वस्थ रखेंगे, उतना ही कार्बन सोखा जाएगा। इस सोखे गए कार्बन को कार्बन क्रेडिट में बदला जाएगा। इन क्रेडिट्स को अंतरराष्ट्रीय कंपनियां खरीदती हैं। इसके बदले किसानों के बैंक खातों में सीधी आय आएगी।

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कार्बन डेवलपर्स संस्था वरहा क्लाइमेट एजी के राज्य प्रभारी धीरज भट्ट ने बताया कि उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर एक किसान प्रति हेक्टेयर सालाना 0.5 से 10 टन कार्बन उत्सर्जन कम कर सकता है। उन्होंने कहा कि कार्बन क्रेडिट के मौजूदा वैश्विक बाजार भाव को देखें तो किसानों को प्रति हेक्टेयर सालाना 7 हजार से लेकर 24 हजार रुपये तक की आय हो सकती है। यह कमाई उनकी मुख्य फसल की आय से अलग होगी।


किसानों को जागरूक करने के प्रयास
कृषि विभाग और वरहा क्लाइमेट एजी संस्था मिलकर किसानों को इस योजना के बारे में जागरूक कर रहे हैं। इसके लिए गांवों में आए दिन कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है। काशीपुर और जसपुर के करीब 1500 किसानों ने पहले ही अपनी भूमि को कार्बन क्रेडिट में बदलने के लिए आवेदन कर दिया है।

कॉबर्न डेवलपर्स संस्था बेचती हैं कॉबर्न क्रेडिट
संस्था के राज्य प्रभारी ने बताया कि किसान जब आवेदन करते हैं, तब उनकी जमीन का सर्वे होता है और उनकी फसलों के चक्र को देखा जाता है। किसानों को पराली नहीं जलानी है, उनके एक टन कार्बन डाइ ऑक्साइड को कम करने पर किसानों को एक क्रेडिट स्कोर यानी कॉबर्न क्रेडिट प्रमाण पत्र दिया जाता है। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर अंतरराष्ट्रीय कंपनियां कॉबर्न क्रेडिट को खरीदती हैं। दो से तीन साल तक मॉनिटरिंग की जाती है। एक क्रेडिट स्कोर की अंतरराष्ट्रीय बाजार में 15 से 20 डॉलर कीमत है। एक हेक्टेयर पर 5 से 8 कॉबर्न क्रेडिट बन सकते हैं।

किसानों को बदलनी होगी कार्यशैली
काशीपुर, जसपुर में 5000 हजार एकड़ भूमि को कार्बन क्रेडिट में बदलने की तैयारी है। इसके लिए किसानों को खेती के पुराने ढर्रे में बदलाव करने होंगे। फसल के अवशेषों (पराली आदि) को जलाने के बजाय उन्हें जमीन में ही दबाना होगा। ड्रिप और स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई का उपयोग करना। रासायनिक खादों के बजाय जैविक खाद, कंपोस्ट और इंटरक्रॉपिंग (मिश्रित खेती) को बढ़ावा देना। खेत की मेड़ों पर पेड़ लगाना और कम जुताई वाली खेती करना होगा। इस पहल से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा बढ़ेगी, जिससे भूमि अधिक उपजाऊ होगी।

कार्बन क्रेडिट योजना किसानों के साथ-साथ पर्यावरण के लिए लाभकारी है। जहां किसान को इससे फायदा होगा तो वहीं मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।- डॉ. कल्याण सिंह रावत, खंड कृषि अधिकारी काशीपुर

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