नए यूजीसी बिल लाने को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार द्वारा की जा रही पहल के विरोध ने अब तूल पकड़ लिया है। मंगलवार को बाढ़ अनुमंडल क्षेत्र के अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर सड़क पर उतरकर यूजीसी कानून का विरोध किया और इसे काला कानून बताया। प्रदर्शनकारियों ने कॉलेज चौक से पैदल मार्च निकालते हुए अनुमंडल प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान दर्जनों लोग नारेबाजी करते नजर आए और सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया।
सवर्ण जाति के छात्रों का भविष्य बर्बाद करने वाला है यह कानून
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि यह कानून कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों, विशेषकर सवर्ण जाति के छात्रों के भविष्य को बर्बाद करने वाला है। उनका आरोप है कि छोटे-मोटे मामलों में फंसने पर तीन से दस साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है, जिससे छात्रों का करियर पूरी तरह चौपट हो सकता है। लोगों ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में समानता का अधिकार दिया गया है, लेकिन इस कानून के जरिए उसका उल्लंघन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यह सरकार की ऐसी रणनीति है, जो सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने का काम करेगी और समाज में ऊंच-नीच की खाई को और गहरा करेगी।

जानिए क्या कहा प्रदर्शन करने वालों ने?
प्रदर्शन करने वाले लोगों ने कहा कि यदि इस कानून को लागू किया गया तो सवर्ण समाज के लोग कहीं के नहीं रह जाएंगे। सरकार से मांग की गई कि यदि ऐसे नियम लागू करने हैं तो उच्च जाति के छात्रों के लिए अलग कॉलेजों की व्यवस्था की जाए। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि यूजीसी बिल के विरोध में भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा इस्तीफे का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। उनका कहना था कि जिस सरकार के नेता और कार्यकर्ता खुद सड़कों पर उतर आए हों, उसके लिए आगे हालात भयावह हो सकते हैं। इधर, बेलछी में एक कार्यक्रम के दौरान यूजीसी बिल को लेकर पूछे गए सवाल पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने चुप्पी साधे रखी। इससे लोगों आक्रोशित दिखे।