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कबीरधाम में किसानों का एलान: 30 करोड़ बकाया और खाद संकट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू, ये हैं प्रमुख मांगें
अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम Published by: कबीरधाम ब्यूरो Updated Tue, 30 Jun 2026 08:09 PM IST
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जिले के किसानों ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का एलान किया है। 29 जून 2026 को भारतीय किसान संघ व छत्तीसगढ़ समृद्ध किसान संघ ने संयुक्त धरना प्रदर्शन शुरू किया। यह अनिश्चितकालीन धरना ग्राम पलानसरी मोड़ पर चल रहा है। किसान संगठनों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
किसानों की सबसे बड़ी मांग सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना द्वारा खरीदे गए गन्ने का बकाया भुगतान है। किसान नेताओं के अनुसार गन्ना उत्पादकों का 30 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान पिछले छह माह से लंबित है। इससे किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। धान की बुवाई और रोपाई के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों के पास खेती के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र भुगतान नहीं हुआ तो कृषि कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष कई बार मांगें रखी गई हैं। लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इसी कारण किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
खाद संकट से बढ़ी परेशानी
धरना-प्रदर्शन की दूसरी प्रमुख मांग सहकारी समितियों में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है। किसानों का आरोप है कि डीएपी, यूरिया और पोटाश सहकारी समितियों में उपलब्ध नहीं है। इस कमी के कारण उन्हें निजी दुकानों से खाद खरीदनी पड़ रही है। निजी दुकानों पर खाद ऊंचे दामों पर बेची जा रही है। यह स्थिति किसानों के लिए एक बड़ी आर्थिक परेशानी बन गई है। खाद की कमी से फसल उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है।
कृषक उन्नति योजना में गन्ना शामिल करने की मांग
किसानों ने कृषक उन्नति योजना में गन्ना फसल को शामिल करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि धान उत्पादकों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। इसी तर्ज पर गन्ना किसानों को भी इस योजना का लाभ मिलना चाहिए। यह मांग गन्ना किसानों के साथ समानता सुनिश्चित करने के लिए है। इससे गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। यह योजना कृषि क्षेत्र में संतुलन लाएगी।
किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। इसे लोकतांत्रिक तरीके से संचालित किया जाएगा। लंबे समय से प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष मांगें रखी जा रही थीं। समाधान न होने के कारण ही किसानों ने यह कदम उठाया है। बारिश के बाद भी किसान आंदोलन में डटे हुए हैं। वे अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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