छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की जिला इकाई ने आज बुधवार को अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर कवर्धा में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने शहर में रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचते हुए मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन कलेक्टर के माध्यम से भेजा गया, जिसमें वेतन, नियमित भर्ती, निजीकरण और संविदा कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की गई।
रैली के दौरान स्वास्थ्य कर्मचारी हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए थे तथा अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शन में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े कर्मचारी शामिल हुए।
संघ के जिला अध्यक्ष अशोक डहरिया ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारियों की कई महत्वपूर्ण मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन अब तक उन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने पुनरीक्षित वेतनमान को शीघ्र लागू करने, स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने तथा रिक्त पदों पर नियमित भर्ती शुरू करने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्थायी मानव संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है।
जिला सचिव कृष्णकांत तिवारी ने कहा कि प्रदेश के अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। उनके अनुसार, लगभग 35 से 40 प्रतिशत पद रिक्त होने से कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ रहा है और मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्वीकृत पदों पर जल्द सीधी भर्ती शुरू करने की मांग की।
जीवनदीप कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष नारायण कांड्रा व विकास कुर्रे ने संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के मुद्दे उठाए। उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन की नीति लागू करने, लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण करने तथा जीवनदीप समिति के कर्मचारियों के लिए पूरे प्रदेश में एक समान मानदेय निर्धारित करने की मांग की।
ज्ञापन में पदोन्नति, जोखिम भत्ता, रजिस्ट्रेशन भत्ता, आवास सुविधा और अन्य सेवा संबंधी मांगों का भी उल्लेख किया गया है। संघ का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में बढ़ते निजीकरण और आउटसोर्सिंग का असर कर्मचारियों के भविष्य के साथ-साथ सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। इसलिए सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए।
इसके अलावा राज्य स्वास्थ्य आयोग के गठन और स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों एवं प्रशिक्षित युवाओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की गई। प्रदर्शन के अंत में संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे और व्यापक रूप दिया जाएगा।