Hindi News
›
Video
›
Chhattisgarh
›
A clash erupted between a forest department team and villagers in Balrampur during an anti-encroachment drive
{"_id":"695e42d23b360aa4f702fbd2","slug":"video-a-clash-erupted-between-a-forest-department-team-and-villagers-in-balrampur-during-an-anti-encroachment-drive-2026-01-07","type":"video","status":"publish","title_hn":"बलरामपुर में अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम और ग्रामीणों में झड़प, मारपीट का आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बलरामपुर में अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम और ग्रामीणों में झड़प, मारपीट का आरोप
बलरामपुर रामानुजगंज जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पंडरी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने गई वन विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच शुक्रवार को जमकर विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मचारियों पर मारपीट का आरोप लगाया है। दोनों पक्षों के बीच करीब एक घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। ग्रामीणों का आरोप है कि वन भूमि पर कब्जा कराने के लिए संबंधित रेंजर द्वारा पहले पैसे लिए गए थे। ग्रामीणों ने मौके पर नारेबाजी करते हुए कहा कि “रेंजर शिवनाथ ठाकुर हमारे पैसे वापस करें”। इस दौरान ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया।
जानकारी के अनुसार, पंडरी गांव के केंनवारी क्षेत्र में वन भूमि पर बीती रात जेसीबी मशीन के माध्यम से होटल खोलने के उद्देश्य से मड़ई (अस्थायी निर्माण) का निर्माण किया गया था। बताया जा रहा है कि यह निर्माण वनरक्षक के निवास से महज 10 मीटर की दूरी पर किया गया। आज दोपहर करीब 2:30 बजे वन विभाग की टीम जब अतिक्रमण हटाने पहुंची, तो ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया, जिसके बाद विवाद ने उग्र रूप ले लिया।
ग्रामीणों का कहना है कि जब रात में जेसीबी से अवैध निर्माण किया जा रहा था, उस समय वन विभाग ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि यदि वन भूमि पर अतिक्रमण हो रहा था तो जेसीबी मशीन को उसी समय क्यों नहीं जब्त किया गया। इस बात को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर एकत्र हो गए, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। हालांकि बाद में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दिए जाने के बाद हालात पर नियंत्रण पाया गया। फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।
वन विभाग की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि यदि पूरे मामले की ईमानदारी से जांच की जाए तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
$video_url='';
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।