उज्जैन में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर बुधवार को भगवान गणेश की विशेष आराधना की गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने सौभाग्य, सुख-समृद्धि और संतान की लंबी उम्र की कामना के साथ संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा। शहर के प्रमुख गणेश मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली।
प्रमुख गणेश मंदिरों में आयोजन
श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर स्थित श्री सिद्धिविनायक गणेश मंदिर, प्रसिद्ध श्री चिंतामन गणेश मंदिर, बड़ा गणेश मंदिर सहित शहर के अन्य गणपति मंदिरों में अभिषेक, पूजन, अनुष्ठान, आरती और महाप्रसादी के आयोजन किए गए। चतुर्थी के अवसर पर मंदिरों को आकर्षक साज-सज्जा से सजाया गया और भगवान गणेश का विधिवत श्रृंगार किया गया।
संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार वर्ष भर में 24 से 26 चतुर्थी आती हैं, लेकिन माघ मास की संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व बताया जाता है। इस दिन भगवान गणेश को गुड़ और तिल से बने पकवानों का भोग अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि चतुर्थी पर भगवान गणेश के दर्शन मात्र से ही सभी कार्य सफल हो जाते हैं, इसी विश्वास के चलते मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।
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सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में विशेष पूजन
श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर स्थित श्री सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में भी चतुर्थी के अवसर पर विशेष साज-सज्जा की गई। मंदिर के पुजारी पंडित मोहित उपाध्याय ‘नन्नू गुरु’ ने बताया कि सुबह भगवान श्री गणेश का अभिषेक-पूजन कर श्रृंगार किया गया। इसके बाद तिल से बने पकवानों का भोग अर्पित किया गया और दोपहर में विधिवत पूजन के साथ महाआरती संपन्न हुई।
महिलाओं ने रखा संतान सुख का व्रत
पुजारी ने बताया कि संकष्टी चतुर्थी पर महिलाएं अपने परिवार और बच्चों की सुख-समृद्धि तथा संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन 108 बार “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में महिलाएं व्रत रखकर मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचीं। महाकाल दर्शन के पश्चात बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्री सिद्धिविनायक गणेश मंदिर पहुंचे और भगवान गणेश के दर्शन किए। सुबह से मंदिर परिसर भक्तों से भरा रहा।