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Dead birds were found in the water tanks at the water treatment plant in Bhiwani, and contaminated water is being supplied due to dirt mixed in the filters
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भिवानी में जलघर टैंकों में मरे हुए पक्षी पड़े, फिल्टर में भी घुली गंदगी से हो रहा दूषित पानी सप्लाई
शहर के पुराना जलघर के पांच पुराने टैंकों के अंदर नहरी पानी बहाव के साथ आने वाली मिट्टी (गाद) से 60 फीसदी भंडारण क्षमता घट चुकी है। इतना ही नहीं टैंकों के अंदर जलीय पौधों की वजह से पानी का स्वाद भी बिगड़ रहा है वहीं मरे हुए पक्षी भी टैंकों के अंदर सड़ रहे हैं। फिल्टर के अंदर गंदगी भरी है, जिसकी वजह से घरों तक भी आपूर्ति में दूषित पानी पहुंच रहा है। डबल क्लोरिनेशन के बावजूद पानी की शुद्धता में कोई सुधार नहीं है।
वहीं, लोग भी नल से आने वाले जल को लेकर आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि नल से बेहतर तो हैंडपंप का पानी है। जिसे पीने में किसी मवेशी की सड़न या फिर सीवर की गंदगी की बदबू तो नहीं है।महम रोड स्थित पुराना जलघर करीब साढ़े चार दशक पुराना है। जिसके अंदर सिर्फ दो टैंक नए बने हैं जबकि पांच टैंक अब भी पुराने हैं। नहरी पानी को चैनल के जरिए पुराने टैंकों तक पहुंचाया जाता है। नहरी पानी के साथ मिट्टी यानी गाद भी भारी मात्रा में पहुंच रही है।
यही वजह है कि 12 फीट गहराई वाले टैंकों के अंदर सात से आठ फीट तो गाद जमी है। जबकि उनकी भंडारण क्षमता भी मात्र 40 फीसदी ही बची है। वहीं अधिकारियों का तर्क है कि इन टैंकों के अंदर अब मिट्टी छंटाई भी संभव नहीं हैं, क्योंकि इनकी तलहटी में अब भूमिगत जलस्तर भी काफी ऊंचा है।
जेसीबी उतारने पर दलदल के अंदर ही धंस रही है। हालांकि विभाग अब इन पुराने टैंकों को तोड़कर आरसीसी पैटर्न पर नए टैंक निर्माण का खाका भी तैयार कर रहा है, लेकिन फिलहाल पुराना शहर की करीब डेढ़ लाख आबादी को इन्हीं टैंकों का गंदा पानी आपूर्ति में पीने को मिल रहा है। जिनके अंदर पक्षी मरे पड़े हैं और जलीय पौधों की वनस्पति भी सड़ रही है।
ये है पुराना जलघर टैंकों की पानी भंडारण क्षमता
पुराना जलघर के अंदर बने पांच पुराने टैंकों की करीब 160 मिलियन लीटर और दो नए टैंकों की 240 मिलियन लीटर पानी भंडारण क्षमता है। टैंकों का ये पानी पुराने शहर की प्यास बुझाने में 20 से 22 दिन तक ही सक्षम है। पुराने टैंकों में अब मिट्टी यानी गाद जमा होने और जलीय पौधों की वजह से तो पानी भंडारण भी अब नाममात्र ही हो रहा है। ऐसे में इन टैंकों को नए सिरे से निर्माण कराने की दरकार भी बनी है।
अधिकारी के अनुसार
शहरी दायरे में पेयजल आपूर्ति में काफी सुधार किया जा रहा है। लीकेज की वजह से कुछ जगहों पर दिक्कत बनी हैं, वहां पर समाधान का काम चल रहा है। शहर के पुराने जलघर में पुराने टैंकों का नए सिरे से निर्माण कराया जाएगा जबकि जलघर की पुरानी मशीनरी का भी नवीनीकरण किया जाएगा। शहर के जलघरों में पानी भंडारण क्षमता बढ़ाई जाएगी और बूस्टरों की स्थिति भी पहले से बेहतर होगी।
-कपिल देव कार्यकारी अभियंता शहरी पेयजल शाखा भिवानी।
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