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During the interaction program at the Bhiwani office, enlightened citizens and municipal councilors shared their views.
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भिवानी कार्यालय में संवाद कार्यक्रम के दौरान समाज के प्रबुद्ध नागरिकों और नगर पार्षदों ने रखे विचार
स्वच्छ पानी सबका हक हैं, सभी अधिकारी अपनी अच्छे से जिम्मेदारी को समझे और सरकारी विभाग भी जवाबदेही से काम करें तो हर व्यक्ति को उसका ये अधिकार मिल सकता है। हालांकि नागरिकों को भी स्वच्छ जल के लिए अपने कर्तव्यों के साथ-साथ जिम्मेदारी और विवेक से काम लेना होगा। यह बात शनिवार को भिवानी कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान समाज के प्रबुद्ध लोगों व नगर पार्षदों ने रखे।
जिसमें जल बचाने के साथ-साथ जल संसाधनाें का सही इस्तेमाल कर हर नागरिक तक स्वच्छ जल उपलब्ध कराने पर भी मंथन किया गया। संवाद कार्यक्रम में निष्कर्ष तौर पर यह विचार भी उठा कि भिवानी जिले के अधिकांश खंडों के गांवों का भूमिगत जलस्तर डेंजर जोन में पहुंच गया है।
जिनके अंदर ट्यूबवेल बोरवेल भी खराब पानी की वजह से बंद पड़े हैं। अब इन कुओं और बोरवेल का प्रयोग बरसाती पानी संचय के तौर पर किया जा सकता है, जिससे भूमिगत जल सुधरेगा और उपयोग के लिए भी पानी उपलब्ध होगा। इसी तरह नहरों के पानी में धार्मिक सामग्री प्रवाह करने की परंपरा पर भी रोक लगे। स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों के अंदर पीने के पानी के स्त्रोतों की नियमित जांच कर इनके अंदर स्वच्छ पान के प्रबंध पुख्ता करें।
संवाद कार्यक्रम में पार्षद सुभाष तंवर ने कहा कि आरओ प्लांटों पर सरकार निगरानी बढ़ाए और इनके पानी की नियमित सैंपलिंग कराकर जांच कराई जाए। हमारी जिम्मेदारी खुद के प्रति नहीं बल्कि दूसरों के प्रति अधिक है, ऐसे में हमें खुद से ही पानी बचाने और जल के महत्व को समझने की दिशा में समझदारी से कदम उठाने होंगे।
पार्षद संदीप तंवर ने कहा कि पानी का टीडीएस अब 800 से 900 तक पहुंच चुका है। इसके लिए जलघर टैंकों के साथ-साथ पूरे इलाके में अलग-अलग पानी की नियमित सैंपलिंग कराई जाए और इसकी निगरानी भी उपायुक्त नियमित रूप से खुद कर सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करे। समाजसेवी सुरेश सैनी ने कहा कि बााहरी क्षेत्रों में पीने के पानी के सीमित स्त्रोत हैं।
ऐसे में इन इलाकों में रहने वालों को शुद्ध पेयजल मिले और लोगों को भी जल बचाने के प्रति गंभीरता से कदम उठाने के लिए प्रेरित करें। भूमिगत पानी को खराब करने में ज्यादातर उद्योग जिम्मेदार हैं, इन पर निगरानी बढ़ाकर सुधार की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
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