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मेरा गांव मेरी शान: आसमान से ऊंचा है बहुअकबरपुर गांव में सैनिकों का शौर्य, मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह के नाम से रोहतक में मार्ग
रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 23 Apr 2026 08:03 PM IST
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बहुअकबरपुर गांव के वीर सैनिकों का शौर्य आसमान से भी ऊंचा है। यहां के बांकुरों ने मातृभूमि की रक्षा को अपनी जान से भी ज्यादा महत्व दिया है। इस गांव में जन्म मेजर जनरल जंग शमशेर सिंह के नाम से तो रोहतक शहर में न्यायालय के पास एक मार्ग का नामकरण भी किया गया है।
ग्रामीण जलकरण बताते हैं कि जांबाजी का जज्बा यहां के युवाओं के खून में बसा है। पंचायत निगरानी कमेटी के प्रधान एवं पंच विजय बल्हारा के अनुसार जंग शमशेर सिंह कुंडू मेजर जनरल के पद तक पहुंचने वाले पहले हरियाणवीं थे। ग्रामीण बताते हैं कि आजादी के बाद हैदराबाद रियासत के भारत में विलय में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके अलावा मेजर जनरल महावीर सिंह बल्हारा भी सेना में बड़े पद पर रहे और देश का गौरव बढ़ाया। रिसलदार रिसाल सिंह बल्हारा का नाम भी गांव में सम्मान के साथ लिया जाता है। हालांकि इन बड़े सैन्य अधिकारियों के परिवार अब गांव में नहीं रहते हैं। लेकिन उनके पैतृक घर आज भी शौर्य की गवाही दे रहे हैं।
शहर से 12 किलोमीटर दूर रोहतक-हिसार मार्ग पर स्थित बहुअकबरपुर गांव में 8600 परिवार हैं। जिनमें 300 से अधिक सैनिक हैं। ब्रिगेडियर, लेफ्टिनेंट, कैप्टन, कर्नल, मेजर व सूबेदार आदि तमाम पदों पर यहां के सैनिक रहे हैं। ग्रामीण मानते हैं कि देश के प्रति समर्पण की भावना यहां की मिट्टी में ही रची-बसी है।
इस गांव के 90 वर्षीय निरंकार बल्हारा ने सन 1962 में चीन जबकि 1965 व 1971 में पाकिस्तान के युद्ध लड़े हैं। वे इस गांव में रहने वाले सबसे अधिक आयु के पूर्व सैनिक हैं। इस गांव के युवाओं में खेल के प्रति भी रुझान है।
आजादी के बाद से ही गांव के युवाओं का लगाव सेना में है। इसी कारण यहां के युवा खेती-बाड़ी के अलावा सेना में जाकर देश सेवा को महत्व देते हैं। - ऑनरेरी कैप्टन रणधीर सिंह, बहुअकबरपुर ।
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