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मेरा गांव मेरी शान: सन 1082 में चौधरी कुंदन सिंह नांदल ने बसाया था बोहर गांव, यहां के कण-कण में आस्था
रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 13 May 2026 07:57 PM IST
देश-विदेश तक बाबा मस्तनाथ की तपोभूमि के नाम से विख्यात गांव बोहर के इतिहास की जड़ें बहुत गहरी हैं। यहां के कण-कण में आस्था, दानशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का मिश्रण साफ झलकता है। अपनी इसी समृद्ध संस्कृति और परंपरा को संजोने वाले इस बोहर के ग्रामीणों का मत है कि अब से 944 साल पूर्व यानी सन 1082 में चौधरी कुंदन सिंह नांदल ने बोहर गांव बसाया था। उस समय वे दिल्ली से आकर पहले यहां के टांडा नामक स्थान पर रहे और बाद में गांव आबाद होता गया, जिसे बोहर नाम दिया गया। नांदल खाप के प्रधान ओम प्रकाश नांदल , महासचिव संजीत नांदल सहित अनेक ग्रामीणों का कहना है कि चौधरी कुंदन नांदल के नाम से गांव में अब धर्मशाला भी बनाई गई है। यहां का नांदल भवन भी अपने सामाजिक दायित्व बखूबी निभा रहा है।
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