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Una On the fifth day of the Shri Shiv Puran Mahakatha in Bahedi, the message of giving up pride and donating cows was conveyed
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Una: बहेड़ी में श्री शिवपुराण महाकथा के पांचवें दिन अभिमान त्याग और गौदान का संदेश
उपमंडल अंब के अंतर्गत पंचायत हम्बोली के गांव बहेड़ी में चल रही श्री शिवपुराण महाकथा के पांचवें दिन कथा व्यास आचार्य कन्हैया जोशी ने राजा हिमांचल और भगवान भोलेनाथ की प्रेरक कथा के माध्यम से मानव जीवन में अभिमान के त्याग, भक्ति और सद्कर्मों का गूढ़ संदेश दिया। कथा व्यास ने बताया कि माता पार्वती के विवाह के अवसर पर राजा हिमांचल ने भव्य भोज की व्यवस्था की। सबसे पहले देवताओं को भोजन कराया गया, उसके बाद राक्षसों को भी आदरपूर्वक भोजन परोसा गया। जब सभी अतिथि भोजन कर चुके तो राजा हिमांचल के मन में यह विचार आया कि इतनी विशाल व्यवस्था केवल वही कर पाए, किसी और से यह संभव नहीं था। यहीं से उनके मन में अभिमान का बीज अंकुरित हो गया। इसी बीच भगवान भोलेनाथ को भोजन के लिए आमंत्रित किया गया। भोलेनाथ ने भोजन ग्रहण करने से पहले कहा कि दो बालक—शुक्र और शनि—अभी भोजन से वंचित हैं, पहले उन्हें भोजन कराया जाए। जैसे ही शुक्र और शनि ने भोजन करना आरंभ किया, रसोई में बना सारा भोजन समाप्त हो गया, फिर भी उनका पेट नहीं भरा। यह देखकर राजा हिमाचल अत्यंत चिंतित हो गए और उन्हें अपने मन में आए अभिमान का बोध हुआ। उन्हें समझ आया कि यह सब शंकर भोलेनाथ की माया है। राजा हिमांचल ने तत्क्षण भगवान शिव के चरणों में नतमस्तक होकर क्षमा याचना की। तब भोलेनाथ ने उन्हें कुछ चावल के दाने प्रदान किए और जैसे ही वे भंडार में रखे गए, सारे भंडार पुनः भर गए। इस प्रसंग के माध्यम से कथा व्यास ने स्पष्ट किया कि अहंकार विनाश का कारण बनता है, जबकि भक्ति और विनम्रता से सब कुछ संभव हो जाता है। कथा के दौरान आचार्य कन्हैया जोशी ने सनातन धर्म में गौदान के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गौदान को महादान कहा गया है, क्योंकि गाय समस्त देवताओं का वास मानी जाती है और इससे पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही उन्होंने यह भी संदेश दिया कि घर में कभी अधर्म की कमाई नहीं लानी चाहिए, क्योंकि ऐसा धन सुख-शांति के स्थान पर कष्ट और अशांति ही देता है। महाकथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। कथा उपरांत भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण किया गया। आयोजकों ने बताया कि महाकथा के आगामी दिनों में भी शिवमहिमा और सनातन मूल्यों से जुड़ी प्रेरक कथाएं सुनाई जाएंगी।
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