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NRI Amritpal Dhillon, the murderer of 114-year-old Fauja Singh, arrested
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114 साल के फौजा सिंह का कातिल नआरआई अमृतपाल ढिल्लों गिरफ्तार
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Wed, 16 Jul 2025 12:07 PM IST
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दुनिया को उम्र सिर्फ एक संख्या है, यह सिखाने वाले 114 वर्षीय बुज़ुर्ग मैराथन धावक सरदार फौजा सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। पंजाब के जालंधर ग्रामीण क्षेत्र के आदमपुर थाना इलाके में मंगलवार दोपहर एक हिट एंड रन हादसे में उनकी मौत हो गई। इस हादसे ने सिर्फ उनके परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरी खेल दुनिया को झकझोर दिया है।
हादसे के बाद से ही पंजाब पुलिस एक्टिव थी और अब इस मामले में एनआरआई युवक अमृतपाल सिंह ढिल्लों को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी फॉर्च्यूनर गाड़ी चला रहा था, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ। अमृतपाल हाल ही में कनाडा से लौटा था और फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।
मंगलवार की दोपहर करीब 3 बजे, सरदार फौजा सिंह रोज़ की तरह ब्यास स्थित अपने गांव में दोपहर का भोजन करने के बाद हेल्थ वॉक के लिए निकले थे। जालंधर-पठानकोट मुख्य मार्ग पर टहलते हुए वह जैसे ही सड़क किनारे पहुंचे, एक तेज़ रफ्तार फॉर्च्यूनर ने उन्हें टक्कर मार दी।
हादसा इतना भयानक था कि स्थानीय लोग भी कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए। उन्हें तुरंत श्रीमंत अस्पताल, जालंधर ले जाया गया, लेकिन वहां शाम करीब 7 बजे उनकी मृत्यु हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने आस-पास लगे CCTV फुटेज खंगाले और सैकड़ों संदिग्ध गाड़ियों की सूची बनाई। इसी दौरान एक फॉर्च्यूनर SUV पर संदेह हुआ, जो वरिंदर सिंह नामक व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड थी।
जब पुलिस कपूरथला पहुंची और वरिंदर से पूछताछ की, तो उसने बताया कि उसने दो साल पहले ये गाड़ी एनआरआई अमृतपाल सिंह ढिल्लों को बेच दी थी। ढिल्लों हाल ही में कनाडा से लौटा था और अपने पैतृक गांव करतारपुर में रह रहा था।
मंगलवार देर रात पुलिस ने अमृतपाल को हिरासत में लिया। भोगपुर थाने में उससे पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में उसने कथित रूप से स्वीकार किया है कि घटना के समय वही गाड़ी चला रहा था और हादसे के बाद वह कई गांवों से होते हुए करतारपुर भाग गया था।
फौजा सिंह महज़ नाम नहीं, बल्कि हिम्मत, जुनून और प्रेरणा का प्रतीक थे। 1911 में जन्मे फौजा सिंह ने 89 वर्ष की उम्र में दौड़ना शुरू किया और 100 साल की उम्र में लंदन मैराथन पूरी कर विश्व रिकॉर्ड बनाया।
उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है, और उन्हें “टर्बन टॉरनेडो” के नाम से जाना जाता है। उन्होंने न सिर्फ भारत और ब्रिटेन, बल्कि दुनियाभर में बुज़ुर्गों के लिए एक प्रेरणा बनकर दिखाया कि उम्र कभी भी रुकावट नहीं होती।
ब्यास गांव के स्थानीय लोगों के अनुसार, फौजा सिंह हर सुबह और दोपहर वॉक करते थे। हल्का जॉगिंग और घर में ही खुद को फिट रखने वाली एक्सरसाइज उनकी दिनचर्या का हिस्सा थी। वो शुद्ध शाकाहारी भोजन करते थे और सादा जीवन जीते थे।
गांव के लोगों का कहना है कि फौजा सिंह ने कभी किसी पर बोझ नहीं बनने दिया और वह हर रोज़ अपने कपड़े खुद धोते थे। उनकी मौत ने गांव को सदमे में डाल दिया है।
पंजाब सरकार, भारतीय एथलेटिक्स महासंघ और अंतरराष्ट्रीय मैराथन संगठनों ने सरदार फौजा सिंह के निधन पर गहरा शोक जताया है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा,
“फौजा सिंह पंजाब ही नहीं, पूरी दुनिया के बुज़ुर्गों के लिए मिसाल थे। उनका जाना एक युग का अंत है।”
भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के अध्यक्ष ने कहा,
“एक ऐसा धावक, जो 100 की उम्र पार कर दुनिया को चुनौती देता रहा। उनका योगदान अमूल्य है।”
फौजा सिंह के परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए कहा है कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ताकि कोई और फॉर्च्यूनर वाला सड़कों को खेल का मैदान न समझे।
उनके पोते हरप्रीत सिंह ने कहा, “दादा जी हमारी आत्मा थे। उन्होंने हमें सिखाया कि कभी हार मत मानो। वह सड़क पर सुरक्षित चल रहे थे, कोई शराबी या तेज रफ्तार गाड़ी चला रहा युवक उनकी जिंदगी छीन ले, ये हम कैसे स्वीकार करें?”
114 साल की उम्र में भी समाज को प्रेरित करने वाले फौजा सिंह का इस तरह सड़क हादसे में चले जाना सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और गैरजिम्मेदार ड्राइविंग पर सवालिया निशान है।
अब देखना है कि क्या पुलिस और न्याय व्यवस्था इस एनआरआई युवक को सख्त सजा दिला पाएगी या मामला भी धीरे-धीरे भूला दिया जाएगा।
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