प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर गए भारतीय अंतरिक्ष यात्री और ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से बातचीत की है। करीब 18 मिनट के संवाद में पीएम मोदी और शुभांशु शुक्ला ने कई मुद्दों पर बातचीत की है। इस दौरान पीएम मोदी ने शुभांशु शुक्ला से पूछा, परिक्रमा करना भारत की सदियों पुरानी परंपरा है। आपको तो पृथ्वी माता की परिक्रमा का सौभाग्य मिला है, अभी आप पृथ्वी के किस भाग के ऊपर से गुजर रहे होंगे?
इस पर शुभांशु ने बताया थोड़ी देर पहले वे अमेरिकी राज्य हवाई के ऊपर से गुजर रहे थे। उन्होंने ये भी बताया कि वे दिन में 16 बार पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। जिसके कारण उन्हें 16 सूर्य उदय और 16 सूर्यास्त दिखाई देता है। शुभांशु ने कहा कि- इस परिक्रमा में, इस तेज गति में जिस हम इस समय करीब 28 हजार किमी / घंटे की रफ्तार से चल रहे हैं। हालांकि आपसे बात करते हुए वक्त और गति का पता नहीं चल रहा है, क्योंकि हम तो अंदर हैं, लेकिन कहीं ना कहीं यह गति जरूर दिखाती है कि हमारा देश कितनी गति से आगे बढ़ रहा है।
इस दौरान पीएम मोदी ने शुभांशु शुक्ला से पूछा कि अंतरिक्ष की विशालता देखकर सबसे पहले आपको क्या विचार आया? इस पर शुभांशु शुक्ला ने कहा- जब पहली बार हम लोग ऑर्बिट में पहुंचे, अंतरिक्ष में पहुंचे, तो पहला जो दृश्य था, वह पृथ्वी का था और पृथ्वी को बाहर से देख के जो पहला ख्याल जो मन में आया, वह ये था कि पृथ्वी बिल्कुल एक दिखती है, मतलब बाहर से कोई सीमा रेखा नहीं दिखाई देती, कोई बॉर्डर नहीं दिखाई देता।
शुभांशु ने आगे कहा कि- दूसरी चीज जो बहुत ध्यान देने योग्य थी, जब पहली बार भारत को देखा, तो जब हम मैप पर पढ़ते हैं भारत को, हम देखते हैं बाकी देशों का आकार कितना बड़ा है, हमारा आकार कैसा है, वह मैप पर देखते हैं, लेकिन वह सही नहीं होता है क्योंकि वह एक हम 3D ऑब्जेक्ट को 2D यानी पेपर पर हम उतारते हैं। भारत सच में बहुत भव्य दिखता है, बहुत बड़ा दिखता है। जितना हम मैप पर देखते हैं, उससे कहीं ज्यादा बड़ा और जो एकता की फीलिंग है, पृथ्वी की एकता की फीलिंग है, जो हमारा भी मोटो है कि अनेकता में एकता, वह बिल्कुल उसका महत्व ऐसा समझ में आता है बाहर से देखने में कि लगता है कि कोई सीमा मौजूद ही नहीं करता, कोई राज्य ही नहीं मौजूद है, देश नहीं दिखते, आखिरकार हम सब इंसानियत का हिस्सा हैं और पृथ्वी हमारा एक घर है और हम सबके सब उसके निवासी हैं।