दमोह जिले के भरतला गांव की रहने वाली एक महिला मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान सल्फास की गोलियां लेकर पहुंच गई। महिला ने आरोप लगाया कि पांच वर्ष पहले खरीदी गई जमीन की रजिस्ट्री होने के बावजूद आज तक न तो नामांतरण हुआ और न ही उसे जमीन का कब्जा मिल सका। न्याय नहीं मिलने से आक्रोशित महिला ने अधिकारियों के सामने चेतावनी दी कि यदि अगले सप्ताह तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह कलेक्ट्रेट परिसर में ही सल्फास खाकर आत्महत्या कर लेगी। उसने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की होगी।
पांच साल पहले खरीदी थी जमीन, अब तक नहीं मिला कब्जा
भरतला निवासी नीतू राजपूत ने बताया कि उन्होंने करीब पांच वर्ष पहले मोहनी राजपूत से पांच आरे जमीन खरीदी थी और उसकी विधिवत रजिस्ट्री भी कराई थी। इसके बावजूद आज तक उनके नाम से नामांतरण नहीं हो पाया। उनका आरोप है कि विक्रेता के चाचा तेजी सिंह ने जमीन पर कब्जा कर रखा है और उन्हें उनकी खरीदी हुई जमीन पर अधिकार नहीं दिया जा रहा है।
चार बार तहसील, तीन बार कलेक्ट्रेट के लगाए चक्कर
महिला ने बताया कि वह अब तक चार बार तहसील कार्यालय और तीन बार कलेक्ट्रेट में शिकायत दर्ज करा चुकी हैं, लेकिन हर बार केवल अगली तारीख देकर मामला टाल दिया जाता है। उनका आरोप है कि तहसीलदार और संबंधित पटवारी की लापरवाही के कारण वर्षों से उनका मामला लंबित है। लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से वह मानसिक रूप से परेशान हो चुकी हैं।
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जनसुनवाई में दिखाई सल्फास की गोलियां
जनसुनवाई के दौरान महिला अपने साथ सल्फास की गोलियां भी लेकर पहुंची थी। अधिकारियों के सामने उन्होंने कहा कि यदि अगले सप्ताह तक नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर जमीन का वैधानिक कब्जा नहीं दिलाया गया तो वह कलेक्ट्रेट परिसर में ही सल्फास खाकर आत्महत्या कर लेंगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए पूरी तरह जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा।
अधिकारियों ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ प्रवीण फूलपागरे और एसडीएम सौरभ गंधर्भ ने महिला की शिकायत सुनी और निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिलाया। अधिकारियों ने कहा कि राजस्व विभाग से मामले की जानकारी लेकर यथाशीघ्र उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
राजस्व विभाग बोला- मामला तहसीलदार न्यायालय में विचाराधीन
राजस्व अधिकारियों के अनुसार संबंधित भूमि विवाद का मामला वर्तमान में तहसीलदार न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालयीन प्रक्रिया के अनुसार प्रकरण का परीक्षण किया जा रहा है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
जनसुनवाई में आत्महत्या की चेतावनी देने के बाद यह मामला गंभीर हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जिला प्रशासन और राजस्व विभाग कितनी शीघ्रता से जांच पूरी कर महिला को न्याय दिलाने और भूमि विवाद का समाधान करने में सफल होते हैं।