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MP High Court: 53 प्रजातियों के वृक्ष को परिवहन के लिए अनुमति मुक्त किया जाना असंवैधानिक, कोर्ट ने जताई चिंता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 05 Mar 2025 04:00 PM IST
प्रदेश सरकार द्वारा 53 प्रजातियों के वृक्ष की कटाई पर परिवहन के लिए अनुमति मुक्त किये जाने को लेकर हाईकोर्ट की लार्जर बेंच ने असंवैधानिक करार दिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत, जस्टिस एस ए धर्माधिकारी तथा जस्टिस विवेक जैन की लार्जर बेंच ने अपने आदेश में साल 2015 में जारी विवादित अधिसूचना और साल 2017 में किए गए संशोधन को वन अधिनियम प्रावधानों के विपरीत करार दिया है। लार्जर बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि जिस रफ्तार से वन क्षेत्र में कमी दर्ज हो रही है, ऐसे में आगामी 50 साल में प्रदेश का आधा वन क्षेत्र साफ हो जायेगा।
गौरतलब है कि गढ़ा जबलपुर निवासी विवेक कुमार शर्मा तथा एक अन्य की तरफ से दायर अलग-अलग याचिका में कहा गया था कि प्रदेश सरकार द्वारा सितंबर 2015 में जारी अधिसूचना के माध्यम से वृक्षों की 53 प्रजातियों को हटाने के अलावा मध्य प्रदेश परिवहन (वनोपज) नियम, 2000 के नियम 4(2) का प्रावधान भी हटा दिया गया है। जिसके परिणामस्वरूप निजी भूमि पर स्थित वृक्षों को काटने या परिवहन करने के लिए कोई अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है। लोगों के द्वारा उपयोग के लिए अधिक वृक्षों को काटने से पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ेगा। पर्यावरण संतुलन बिगड़ने से मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार व हस्ताक्षेपकर्ताओं की तरफ से युगलपीठ को बताया गया था। इस संबंध में दायर याचिका को इंदौर खंडपीठ ने खारिज कर दिया है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद इंदौर हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश की वैधानिकता पर लार्जर बेंच द्वारा सुनवाई करने के आदेश जारी किये हैं। लार्जर बैंच ने अपने आदेश में कहा है कि एक जलाशय दस कुंए के बराबर है, दस जलाशय एक पुत्र के बराबर है और दस पुत्र एक पेड़ के बराबर है। लार्जर बैंच ने 2019 से 2023 तक की एफएसआई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश में वन क्षेत्र में 420 वर्ग किलोमीटर की शुद्ध कमी आई है।
इस आंकड़े में अति सघन वन क्षेत्र में 363 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि, तथा इसी अनुपात में लगभग 630 वर्ग किलोमीटर की भारी तथा तीव्र कमी और मध्यम सघन वन एवं खुले वन क्षेत्र में लगभग 104 वर्ग किलोमीटर की कमी शामिल है। जिससे शुद्ध आंकड़ा 420 वर्ग किलोमीटर हो जाता है। यह आंकड़े स्पष्ट संकेत करते हैं कि हर वर्ष वन क्षेत्र तेजी से कम हो रहे हैं। मध्य प्रदेश में वन क्षेत्र में कमी इसी गति से होती रही, तो अगले 50 वर्षों में अधिसूचित वनों से वर्तमान वन क्षेत्र का लगभग आधा हिस्सा मिट जाएगा।
लार्जर बेंच ने फिल्म पुष्पा का उल्लेख करते हुए कहा है कि इसमें व्यापारियों व सिंडिकेट को उजागर किया है। जो आंध्र प्रदेश के शेषचलम के घने हरे-भरे जंगलों में लाल चंदन के अवैध परिवहन, व्यापार और बिक्री में लगे हुए हैं। तस्करों और व्यापारियों का सिंडिकेट इतना प्रभाव और दबदबा बनाने लगता है कि पुलिस ,वन विभाग, नीति निर्माताओं और अंततः विधायकों तक शासन का कोई भी हिस्सा अछूता नहीं रह जाता। यह दर्शाता है कि कैसे वनोपज के अवैध व्यापार और परिवहन का राक्षस और माफिया घने जंगलों में घुस सकता है और राज्य मशीनरी के साथ मिलीभगत करके जंगल की प्राकृतिक संपदा को लूट सकता है। कार्यपालिका ‘वन उपज’ के ऐसे विक्रेताओं के प्रभाव और दबदबे के आगे झुक जाती है।
वर्तमान मामलों में भी 1500 से अधिक पृष्ठों में दस्तावेजी रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए लार्जर बेंच ने कहा है कि पर्यावरणविद राजवीर सिंह हुरा और एनजीओ पर्यावरण प्रहरी के पदाधिकारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें पेश किये गये दस्तावेजों को देखकर हम चकित रह गये। दस्तावेज में इंदौर के वन प्रभाग के अधिकारियों तथा वन विभाग के भीतर आंतरिक रूप से आदान-प्रदान किए गए पत्राचार शामिल हैं। वन संरक्षक इंदौर द्वारा अप्रैल 2017 में वन मंडल अधिकारी को संबोधित पत्र में बड़े पैमाने पर हरे-भरे और फलों से लदे पुराने पेड़ों की अवैध कटाई और इंदौर की मंडी में भारी मात्रा में उनके व्यापार का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि रोजाना लगभग 100-150 वाहन बाजारों में 1000-1500 टन लकड़ी और वन उपज अवैध रूप लेकर पहुंच रहे हैं। जिसका स्रोत निराशाजनक रूप से अज्ञात है।
पत्र में आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके अलावा मुख्य वन संरक्षक, इंदौर वृत्त द्वारा वन संरक्षक, इंदौर संभाग को अप्रैल 2019 को लिखा गये पत्र में पुनः इसका उल्लेख करते हुए कहा गया था कि 53 प्रजातियों के वृक्षों को छूट अधिसूचना का अनुचित लाभ उठाते हुए इंदौर सहित राज्य के विभिन्न वन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वनों की कटाई, अवैध कटाई एवं लकड़ी का परिवहन हो रहा है। लकड़ी माफिया द्वारा लकड़ी बाजार में व्यापार के लिए हजारों की संख्या में पुराने हरे-भरे पेड़ों को अवैध रूप से काटा जा रहा है।
मुख्य वन संरक्षक इंदौर वृत्त द्वारा प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक को जुलाई 2019 में भेजी गयी जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि किस प्रकार 53 प्रजातियों को व्यापक छूट देने से इंदौर संभाग के वन एवं गैर-वनीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों के जीवन पर कहर बरपा रहा है। छूट अधिसूचना अवैध रूप से खरीदी गई लकड़ी, काष्ठ और वन उपज के परिवहन को वैध बनाने और जांच व नियंत्रण के बिना व्यापार करने का लाइसेंस बन गई है।
मुख्य वन संरक्षक एम. कल्लिदुरई की जांच रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि छूट अधिसूचना को वापस ले लिया जाए या संशोधित करना चाहिये। जिससे नियामक नियंत्रण को पुनर्जीवित किया जा सके और पारगमन की व्यवस्था उन सभी प्रजातियों को पार कर जाए, जो मध्य प्रदेश के जंगलों में प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। लार्जर बैंच ने अपने आदेश में कहा है कि यह पत्र इस बात का पुख्ता सबूत है कि छूट अधिसूचना ने निजी तौर पर उगाए गए पेड़ों और पौधों के व्यापार की आड़ में मध्य प्रदेश राज्य में वन संसाधनों की अप्रत्यक्ष रूप से खुली लूट को वैध बना दिया है।
लार्जर बैंच ने अपने आदेश में कहा है 10 दिनों की अवधि छूट प्राप्त प्रजातियों के वन उपज और लकड़ी के संबंध में ट्रांजिट पास के लिए अनिर्वाय रूप से आवेदन करें। ट्रांजिट पास के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों पर आगामी 30 दिनों तक कोई बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जाये। इस फैसले का प्रभावी हिस्सा का प्रकाशन राज्य के सभी संबंधित विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों के होमपेज पर किए जाएंगे। इस आदेश के प्रचार प्रसार की व्यक्तिगत जिम्मेदारी संबंधित विभागों के प्रमुख सचिव की होगी।
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