खरगोन जिले के बेड़िया क्षेत्र में शुक्रवार को आस्था और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला, जब ससुराल पक्ष के साढ़े सात गांवों में गणगौर माता के बाड़ी के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तों ने माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।
स्थानीय परंपरा के अनुसार इन गांवों में गणगौर माता की पूजा एक दिन पहले शुरू होती है। यहां एक दिन पूर्व पाठ बैठने की परंपरा निभाई जाती है, जिसके बाद अगले दिन माता के बाड़ी के पट सार्वजनिक दर्शन के लिए खोले जाते हैं। इसी परंपरा के चलते शुक्रवार को ससुराल पक्ष के गांवों में यह आयोजन संपन्न हुआ, जबकि मायका पक्ष के गांवों में शनिवार को माता के पट खोले जाएंगे।
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मान्यता के अनुसार ससुराल पक्ष के अंतर्गत आने वाले साढ़े सात गांवों में रावेरखेड़ी (आधा गांव), सांगवी, भोगांव, निपानी, डाल्याखेड़ी, कानापुर, मांधाता, ओंकारेश्वर, थापना और अंजरुद शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। ग्राम कानापुर के बुजुर्ग ओंकार मलगाया और रामलाल मुकाती सहित रावेरखेड़ी के अनिल बिरला ने बताया कि इन गांवों में माता की मूठ (बाड़ी बोना) अन्य गांवों की तुलना में एक दिन पहले रखी जाती है। इसी कारण यहां तिथि और मान्यता के अनुसार एक दिन पहले ही माता के बाड़ी के पट खोल दिए जाते हैं।
पट खुलने के साथ ही श्रद्धालु माता को सेवा-चकरी के लिए बाड़ी से अपने घर लेकर गए। इस दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति का माहौल बना रहा और गांव-गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की गई। शनिवार को मायका पक्ष के बेड़िया सहित अन्य गांवों में भी गणगौर माता के पट खुलेंगे, जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर दर्शन करेंगे। उल्लेखनीय है कि गणगौर महापर्व निमाड़ अंचल में उत्साह से मनाया जाता है। वर्ष भर नागरिक इस पर्व को इंतजार करते हैं। गणगौर महापर्व लेकर बाजार में रौनक बनी हुई है।