मंदसौर जिले के ग्राम साबाखेड़ा में एक पशु बाड़े की ढीली मिट्टी के नीचे से करीब 80 कोबरा सांप के बच्चे निकले, जिन्हें रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया। इतनी बड़ी संख्या में कोबरा के बच्चों के मिलने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
यह झोपड़ी गांव के गोपाल पिता चंपालाल दायमा के कुएं के पास स्थित है, जहां पशुओं को बांधा जाता है। गोपाल को मिट्टी में हलचल दिखाई दी। जब उन्होंने ध्यान से देखा, तो उन्हें मिट्टी के नीचे जहरीले कोबरा सांप के बच्चों का झुंड नजर आया। उन्होंने तुरंत सर्प मित्र दुर्गेश पिता घीसालाल पाटीदार को सूचना दी।
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सर्प मित्र दुर्गेश ने करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद सभी कोबरा के बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया और बाद में उन्हें शिवना नदी के पास स्थित जंगल में छोड़ दिया। दुर्गेश ने बताया कि झोपड़ी के पास एक वयस्क नागिन को भी देखा गया था, लेकिन उसे पकड़ा नहीं जा सका।
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दुर्गेश ने कहा कि यह उनके लिए अब तक का सबसे जोखिम भरा और दुर्लभ अनुभव रहा। उन्होंने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में एक साथ कोबरा के बच्चों को पकड़ा है। उन्होंने बताया कि व्यस्क कोबरा मादा एक बार में लगभग 108 अंडे देती है, जिनमें से 30 से 35 अंडे नष्ट हो जाते हैं। वनमंडल अधिकारी संजय रायखेरे ने बताया कि बरसात के मौसम में फीमेल कोबरा अंडे देती है, और जैसे ही बच्चे अंडे से बाहर निकलते हैं, वह उन्हें छोड़कर चली जाती है। इसके बाद वे बच्चे स्वयं ही जीवन जीना सीखते हैं।