मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में इंसानियत और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक बन चुके वारिस खान और उनकी मदद को उजागर करने वाले पत्रकार अब्बास का अंजुमन इस्लाम कमेटी द्वारा सम्मान किया गया। शुक्रवार को ब्यावरा शहर में आयोजित इस कार्यक्रम में दोनों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया और स्मृति चिन्ह भेंट कर उन्हें विशेष उपाधियों से नवाजा गया।
13 नवंबर 2024 को, ब्यावरा से लगभग 10 किलोमीटर दूर गुना-भोपाल नेशनल हाईवे पर एक दर्दनाक हादसा हुआ। शिवपुरी से भोपाल जा रही एक कार ब्रेक फेल होने के कारण पलट गई। कार में सवार दो बच्चे, दो महिलाएं और तीन पुरुष अंदर फंसे हुए थे और जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
इसी दौरान, वारिस खान एक फरिश्ते की तरह मौके पर पहुंचे। बिना समय गंवाए, उन्होंने कार का कांच तोड़ा और पहले दो बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद, गाड़ी को सीधा कर दो महिलाओं और तीन पुरुषों को सुरक्षित बाहर निकाला। उनकी तत्परता और साहस ने 7 लोगों की जान बचाई।
वारिस खान बने इंसानियत की मिसाल
इस घटना की खबर जब स्थानीय पत्रकार अब्बास ने अपनी रिपोर्टिंग से उजागर की, तो यह समाचार सुर्खियों में आ गया। वारिस खान की निस्वार्थ सेवा को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी सराहा और उन्हें "एमपी का गौरव" घोषित करते हुए एक लाख रुपये का इनाम दिया। साथ ही, राजगढ़ कलेक्टर ने उन्हें "जिले का पहला गुड सेमेरिटन" घोषित करते हुए 5000 रुपये की प्रोत्साहन राशि भेंट की।
सम्मान समारोह में मिला शान-ए-ब्यावरा का खिताब
ब्यावरा शहर की अंजुमन इस्लाम कमेटी ने शुक्रवार को वारिस खान और पत्रकार अब्बास के सम्मान में यूसुफ कॉम्प्लेक्स में समारोह आयोजित किया। कमेटी के सदर इकबाल हुसैन ने कहा, "वारिस खान ने अपनी बहादुरी से 7 जिंदगियां बचाईं, और अब्बास ने अपनी लेखनी से इस नेक काम को दुनिया के सामने लाया। ऐसे ही कार्य समाज के लिए प्रेरणा हैं।" समारोह में वारिस खान को 5100 रुपये की प्रोत्साहन राशि और "शान-ए-ब्यावरा" की उपाधि दी गई। वहीं, पत्रकार अब्बास को "उत्कृष्ट पत्रकारिता" का सम्मान दिया गया।