सागर जिला अस्पताल में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब महिला मेडिसिन वार्ड में भर्ती मरीज और उनके परिजन कूलर की हवा को लेकर आपस में भिड़ गए। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई, जिसमें महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। रात के सन्नाटे में चीख-पुकार सुनकर अस्पताल स्टाफ और सुरक्षा गार्ड मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद मामला शांत कराया।
आधी रात को 'रणक्षेत्र' बना वार्ड नंबर 6
जानकारी के अनुसार, घटना महिला मेडिसिन वार्ड नंबर 6 की है। मंगलवार रात करीब 1:30 बजे जब पूरा अस्पताल सो रहा था, तभी कूलर की ठंडी हवा की दिशा को लेकर दो पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद हाथापाई तक पहुंच गया। उमस और भीषण गर्मी से परेशान मरीज और उनके तीमारदार एक-दूसरे पर टूट पड़े। इस हंगामे के चलते वार्ड में भर्ती अन्य 40 मरीजों की सांसें अटक गईं और पूरे वार्ड में दहशत का माहौल बन गया।
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40 मरीज और सिर्फ 2 कूलर: बदहाली ने बढ़ाई परेशानी
इस विवाद की जड़ अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाएं हैं। बताया जा रहा है कि वार्ड नंबर 6 में करीब 40 मरीज भर्ती हैं, लेकिन उन्हें राहत देने के लिए पूरे वार्ड में मात्र 2 कूलर ही चालू हालत में हैं। वार्ड की दीवारों पर लगे पंखे वर्षों से कबाड़ बन चुके हैं। केवल वार्ड ही नहीं, बल्कि वार्ड नंबर 3 के एसी भी लंबे समय से खराब हैं। सबसे गंभीर स्थिति चेस्ट आईसीयू की है, जहां सेंट्रल एसी का एक हिस्सा बंद होने से गंभीर मरीजों को भी पसीने में तरबतर होना पड़ रहा है।
स्टाफ बोला- शिकायतों की कोई सुध नहीं लेता
ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि उन्होंने कई बार अस्पताल प्रशासन को खराब पंखों और कूलरों की जानकारी दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। गर्मी के कारण मरीजों का पारा चढ़ रहा है, जो आए दिन ऐसे छोटे-बड़े विवादों का कारण बन रहा है।
अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल
मरीजों के परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण उन्हें नारकीय स्थिति में इलाज कराना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में पर्याप्त इंतजाम न होने के कारण न केवल मरीज परेशान हैं, बल्कि अस्पताल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था भी खतरे में पड़ गई है। देर रात हुई इस मारपीट के बाद अब अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।