धार्मिक नगरी चित्रकूट एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से सराबोर नजर आई, जब बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री देर रात भगवान कामतानाथ महाराज की पंचकोसी परिक्रमा के लिए पहुंचे। उनकी उपस्थिति से चित्रकूट की पावन धरती पर आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। जानकारी के अनुसार, पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने रात्रि करीब 10:55 बजे भगवान कामदगिरि की पंचकोसी परिक्रमा आरंभ की। यह परिक्रमा लगभग ढाई घंटे तक चली और रात्रि 1:20 बजे के आसपास पूर्ण हुई। परिक्रमा के दौरान उन्होंने मार्ग में स्थित विभिन्न मंदिरों में रुक-रुककर विधिवत दर्शन-पूजन किया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़, भक्ति से गूंजा चित्रकूट
कामदगिरि परिक्रमा के दौरान बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देर रात होने के बावजूद लोग सड़कों और मंदिर परिसरों में डटे रहे। हर ओर “जय श्रीराम” और “कामतानाथ महाराज की जय” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान कुछ युवतियों ने अपने हाथों से पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का चित्र बनाकर उन्हें भेंट किया। पं. शास्त्री ने इसे सहर्ष स्वीकार करते हुए युवतियों का उत्साहवर्धन किया, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालुओं में खासा आनंद और उल्लास देखने को मिला।
मंदिरों में दर्शन, पूजन और विशेष पड़ाव
परिक्रमा के क्रम में पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सबसे पहले कामदगिरि मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान कामतानाथ महाराज को प्रणाम कर आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात वे बरहा के हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने कुछ समय विश्राम किया और स्वयं अपने हाथों से चाय बनाकर पी, जिसे लेकर श्रद्धालुओं के बीच खास चर्चा रही। इसके बाद वे कामदगिरि महाआरती स्थल पहुंचे, जहां भगवान कामदगिरि पर्वत की विधिवत आरती की गई। इस अवसर पर उन्होंने वहां उपस्थित पंडितों और सेवकों को दक्षिणा भी प्रदान की। पूरी परिक्रमा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे और प्रशासन भी सतर्क नजर आया।
ये भी पढ़ें- हिंदू सम्मेलन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बड़ा बयान, आरएसएस को लेकर कही ये बड़ी बात
चित्रकूट और बागेश्वर धाम का आध्यात्मिक संबंध
परिक्रमा पूर्ण होने के बाद मीडिया से बातचीत में पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि कामदगिरि की परिक्रमा करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने बताया कि यह उनकी पहली चित्रकूट यात्रा नहीं है, बल्कि वे कई बार यहां आ चुके हैं। उनके अनुसार, बागेश्वर धाम और चित्रकूट धाम के बीच एक गहरा आध्यात्मिक और भावनात्मक जुड़ाव है, जो उन्हें बार-बार यहां खींच लाता है।
विश्व शांति और सद्भाव का संदेश
मीडिया से संवाद के दौरान पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने विश्व शांति की कामना करते हुए कहा कि बागेश्वर परिवार का मूल संकल्प शांति, सद्भाव और सनातन मूल्यों का प्रचार है। उन्होंने दो टूक कहा 'हम चाहते हैं कि भारत हिंदू राष्ट्र बने, लेकिन यह सब बिना हिंसा और बिना द्वेष के होना चाहिए। जो सनातन परंपरा पर घात लगाए, वह सनातनी नहीं हो सकता। हम क्यों हिंसा करें, हम दंगा क्यों करें, हम इस देश में गंगा क्यों न बनें।' उनके इस संदेश को श्रद्धालुओं ने खूब सराहा। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि शांति, सौहार्द और सामाजिक एकता का संदेश भी देकर गई। चित्रकूट की पावन धरती पर हुई यह परिक्रमा श्रद्धालुओं के लिए लंबे समय तक स्मरणीय बनी।