ॐ कार क्रिया साधना संस्थान के तत्वावधान में वेद नगर स्थित आनंद भवन में एक निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में शामिल संत द्वारा अथर्ववेद पर आधारित शाश्वत चिकित्सा पद्धति से स्पर्श उपचार के माध्यम से सर्वाइकल, घुटनों का दर्द, माइग्रेन, सायटिका, गैस, एसिडिटी, गर्दन व कमर दर्द सहित अनेक रोगों का उपचार किया गया। इस शिविर का लाभ लगभग 400 लोगों ने लिया।
शिविर में पहुंची भारी भीड़
इस संबंध में जानकारी देते हुए ॐ कार क्रिया साधना संस्थान के अध्यक्ष अनिल जोशी एवं समाजसेवी रवि गुप्ता ने बताया कि अथर्ववेद आधारित शाश्वत चिकित्सा को जन-जन तक पहुंचाने वाले तथा अद्वितीय वैदिक चिकित्सा पद्धति के प्रमुख प्रणेता डॉ. स्वामी बाबा भक्ति प्रकाश के सान्निध्य में यह शिविर आयोजित किया गया। शिविर के पहले दिन से ही शहर वासियों की भारी भीड़ अपनी जटिल से जटिल बीमारियों के उपचार के लिए पहुंचने लगी थी।
शिविर में इन रोगों का किया गया इलाज
शिविर में जोड़ों के दर्द, नसों से संबंधित रोग, पुरानी शारीरिक समस्याएं, स्नायु विकार सहित अनेक रोगों का अथर्ववेद आधारित ड्रगलेस टच थेरेपी के माध्यम से उपचार किया गया।
कौन हैं डॉ. स्वामी बाबा भक्ति प्रकाश
डॉ. स्वामी बाबा भक्ति प्रकाश को मानद डॉक्टरेट, भारत गौरव अवॉर्ड, विजनरी लीडर अवॉर्ड, देवभूमि विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय प्रतिभा रत्न सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। वे अथर्ववेद में वर्णित शाश्वत चिकित्सा पद्धति को देश-विदेश के लाखों लोगों तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही वे चिकित्सा प्रशिक्षण हेतु ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहे हैं।
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30 वर्षों से सेवा कार्य में सक्रिय
स्वामी बाबा भक्ति प्रकाश अखिल भारतीय धर्म संघ एवं कारपात्री फाउंडेशन से संबद्ध एक प्रतिष्ठित संत हैं। वे विगत 30 वर्षों से ‘योगी-निरोगी-उपयोगी’ सूत्र पर आधारित साधना, अध्ययन और समाज सेवा में सक्रिय हैं। वे आंगिरस ऋषि द्वारा प्रतिपादित अथर्ववेद आधारित शाश्वत चिकित्सा के गहन ज्ञाता एवं मर्मज्ञ हैं। वैदिक शाश्वत चिकित्सा के माध्यम से वे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में समाज सेवा कर रहे हैं। उन्होंने “वैदिक शाश्वत चिकित्सा का अद्भुत विज्ञान” नामक एक महत्वपूर्ण पुस्तक की रचना भी की है, जिसमें इस प्राचीन वैदिक चिकित्सा पद्धति के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक स्वरूप को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।