मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य वक्फ बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्यों की नियुक्ति के फैसले को लेकर सियासी और सामाजिक चर्चाएं तेज हैं। इस बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज ने सरकार के फैसले का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इससे वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता आएगी और संपत्तियों से जुड़े विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।
'हिंदू सदस्यों से बढ़ेगी पारदर्शिता'
उज्जैन में मीडिया से बातचीत के दौरान महंत रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति सही और जरूरी कदम है। उनके मुताबिक, कई जगहों से वक्फ बोर्ड पर हिंदुओं की संपत्तियों पर कब्जे की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में बोर्ड में हिंदू सदस्य होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और इस तरह के मामलों पर प्रभावी निगरानी हो सकेगी।
विरोध करने वालों पर साधा निशाना
महंत रवींद्र पुरी ने वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति का विरोध करने वालों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम समुदाय का कोई वर्ग इसका विरोध करता है तो यह संकीर्ण सोच को दर्शाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदू विश्वविद्यालयों और संस्कृत महाविद्यालयों में मुस्लिम प्रोफेसर वर्षों से पढ़ा रहे हैं और हिंदू समाज ने कभी इसका विरोध नहीं किया। ऐसे में वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की भागीदारी पर आपत्ति उचित नहीं है।
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सरकार के फैसले को बताया स्वागत योग्य
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने मध्य प्रदेश सरकार के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि 2025 के नए वक्फ कानून के तहत राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर दो हिंदू सदस्यों को शामिल करना सकारात्मक पहल है। उनका मानना है कि इससे सभी समुदायों के बीच विश्वास बढ़ेगा और वक्फ संपत्तियों का बेहतर और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित हो सकेगा।